सत साहेेेब जी ‘‘प्रदूषण से मुक्ति’’ संत रामपाल जी का सख्त आदेश है कि किसी त्यौहार व खुशी के अवसर पर पटाखे नहीं छोड़ने हैं। मोमबत्ती नहीं जलानी जो प्रदूषण के अतिरिक्त कुछ लाभ देने वाला नहीं है। उस अवसर पर भी प्रतिदिन की तरह देशी घी की एक ज्योति जलाने की ही आज्ञा है। हम तथा हमारे छोटे-छोटे बच्चे भी प्रभु कृपा छूटने (नाम सम्पर्क टूटने) के डर से आदेश का सख्ती से पालन करते हैं। उस दिन हम परमात्मा की भक्ति प्रतिदिन की तरह करते हैं। फगुन यानि होला तथा होली के त्यौहार पर किसी प्रकार का रंग व कीचड़ व पानी एक-दूसरे पर नहीं डालते, न कोरड़े का खेल खेलते हैं क्योंकि वर्तमान में लोग इसके बहाने दुश्मनी निकालने लगे हैं। आपसी झगड़े होने लगे हैं। पहले सहनशील व्यक्ति होते थे। ताकतवर होते थे जो कोरड़ों की मार सह लेते थे। वर्तमान में धक्का लगकर गिरने से युवा श्वांस भूल जाता है। इसलिए गुरू जी ने यह खेल सख्त मना कर रखा है। उस दिन परमात्मा की स्तुति करते हैं। जिस दिन भक्त प्रहलाद की रक्षा करके परमात्मा ने भक्तों का मनोबल बढ़ाया है। परमात्मा पर दृढ़ विश्वास हुआ है। दैनिक कार्य...
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