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Showing posts from June, 2019

संत रामपाल जी ने सभी धर्म गुरुओं को ज्ञान में हरा दिया

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पवित्र ज्ञान को उलझाना अब नकली गुरुओं के हाथ में नहीं

नकली ढोंगी गुरु इस पवित्र ज्ञान को फिर से उलझाना चाहते है जो अब असंभव है🙏🙏🙏 आदि नाम है अक्षर माही  बिन गुरु नरक छूटै नाही आदिनाम मै भाख सुनायो यह नाम जपै से मुक्ति पायो है अनाम अक्षर के माही। निह अक्षर कोई जानत नाही। सब संसार कबीर जी को सन्त की पदवी देकर निढाल होकर बैठा था कोई भी कबीर जी को परमात्मा नही कहता था। लेकिन आजकल कबीर जी को परमात्मा कहने वालो की संख्या मे दिन प्रतिदिन बढोतरी होती जा रही है आज सभी नकली कबीरपंथी कबीर जी को परमात्मा कहना शुरु कर चुके है। इसका ज्ञान भगवान रामपाल जी महाराज ने ही दिया है।  परन्तु कुछ वाणीचोर अब भगवान रामपाल जी महाराज का ज्ञान चोरी करके अपना ठप्पा लगाकर बेचने की नाकाम कोशिश कर रहे है ये धन्धेबाज लोग है जो शातिराना तरीके से परमात्मा के अदभुत ज्ञान को दोबारा से उलझाने की फिराक मे है जो अब अंसभव है। इसी उलझाने की प्रक्रिया मे मदन साहिब की कुछ वाणियो को पेश किया जा रहा है मदन साहिब की वाणी पेश करने वाले स्वयं आत्मा और परमात्मा के संशय मे है इसलिए गुप्त रुप से ठगने का प्रयासरत है। वो साबित करना चाहते है कि परमात्मा का आदि नाम इन...

घरेलू हिंसा (वैवाहिक दुर्व्यवहार, अंतरंग साथी हिंसा, घरेलु मारपीट या पारिवारिक हिंसा

घरेलू हिंसा : चुपचुप रहना कब तक सहना #जीने_की_राह' बुक को घर बैठे फ्री में मंगवा सकते हैं। 7496801825 पुरा पता sms करे ================== घरेलू हिंसा : चुपचुप रहना कब तक सहना यूं तो आपस में इसका कोई ताल मेल नहीं पर फिर भी ये अपराध घरों के अन्दर पनप रहा है। घरेलू हिंसा का रूप बन रहा है। ये एक ऐसा अपराध है जो अपनों द्वारा किया जाता है और इसको सहने पर मजबूर हैं महिलाएं। शादी के बाद पति द्वारा व ससुराल पक्ष से एक महिला को यातनाएं सहने पर मजबूर होना पड़ता है। पिता की लाडो एक बड़े अरमानों से डोली में बैठ कर दूसरे घर जाती हैं पर वो ही घर उसके पूरे जीवन व उसके वजूद का अखाड़ा बन जाता है। अपने ही घर की चार दीवारी में अपने ही पति के हाथों पिटती एक औरत प्रमाण है हमारे समाज के पुरूषों की मनोदशा का पुरूषों ने अपनी कमजोरी को और अपने झूठे पुरूषत्व का वर्चस्व कायम रखने के लिए मर्दानगी का मुखौटा पहन रखा है। शर्मिन्दगी के साथ कहना पड़ रहा है कि ये स्थिति केवल निम्न वर्ग की नही हमारे शिक्षित समाज की है। बात 21वीं सदी है जहाँ महिलाओं की स्वतन्त्रता का जोर-शोर से डंका पीट जा रहा है वहीं इस शिक्षित...