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Showing posts from February, 2019

भारतीय मीडिया क्यों बिकी हुई है

विरोध अन्तर्राष्ट्रीय है अन्तर्धर्मीय मत बनाईए किसी भी राष्ट्र के दुसरे राष्ट्र से संघर्ष के अनेक कारण होते है जिसमे धर्म जाति आदि के नाम पर धुर्वीकरण कर के लाभ उठाने की कोशिश की जाती है। ऐसी ही दुष्ट पाकिस्तान की साजिश है यह हमारे देश को हिन्दु मुस्लिम मे बांटना चाहता है पाकिस्तान की इस नापाक साजिश को असफल करना ही हमारा प्रयास है। हमे एक रहना है हम सब भारतीय है। पाकिस्तान जानबूझकर कर आंतकवाद के भारतीय मुसलमानों का ही प्रयोग करता है यह  पाकिस्तान का षडयंत्र है। पंजाब के मामले मे भी उसका ऐसा ही प्रयास था जिसमे हम भारतीयो की एकता विजयी रही थी। रुस एक मुस्लिम बाहुल्य राष्ट्र रहा है लेकिन हमारा मित्र भी रहा है हमारे ही देश के स्वार्थी लोग भारत पाकिस्तान की बात तो हिन्दु मुस्लिम की करेगे पर जब रुस की बात आयेगी तो यह नही बताएगें कि रुस भी बहुसंख्यक मुस्लिम रहा है। देश देश का दुश्मन होता है धर्म धर्म का दुश्मन नही है हमारा दुश्मन देश पाकिस्तान है जो हमारे विरूद्व साजिश करता रहता है पाकिस्तान मे मुस्लिम बाहुल्य है तो नासमझी मे हम मुसलमान विरोधी बन जाते है जो पूर्णतया गलत है देश की...

भारत माँ के बेटे

भारत मांं के दो बेवकुफ बेटे कट्टरपंथी हिन्दु मुस्लिम आपस मे लडते लडते भारत माता का सीना घायल करते रहते है। ये दोनो अपनी लडाई मे भारतमाता की चिन्ता भी नही करते इनकी इसी लडाई ने 70 साल पहले भारत माता का बंटवारा कर दिया था चीर दिया था भारत माता का सीना और पाकिस्तान बग्लादेश बना दिया था कोई हिन्दु और मुस्लिम भारतीयता से बडा नही हो सकता लेकिन ये धर्मान्धता मे देश को भूला देते है देश किसी हिन्दु या मुस्लिम का नही होता देश प्रत्येक देशवासी का होता है पर ये नेताओं और मौलवी पंडो के बहकाये लोग किसी की नही सुनते और भारतमाता का चीर लहुलुहान करते रहते है। भारतीय हिन्दु मुस्लिमों को गाली देते बदले मे मुस्लिम हिन्दुओ को गाली देते है बस यही सिलसिला राजनीति के कारण चलता आ रहा है दोनो एक.दुसरे को गाली देकर और कमी निकाल कर बहुत खुश होते है इन दोनो ही धर्मो मे ऐसे मुर्खो की भरमार है इन मुर्खो के पैमाने भी यही है असली हिन्दु वही है जो मुस्लिम को गाली दे ये एक दुसरे पर कीचड उछालते हुये ये भूल जाते है कि दोनो एक भारत मां के सपूत है दोनो की इस लड़ाई ने बहुत कुछ खो दिया अब तो मान जाओ लेकिन इन्हे भारतीयता...

सुप्रीम कोर्ट के जज ने बोला राम भगवान नहीं है who is god 👇

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‘देवदासी’ पंडो के पाप की एक कुप्रथा है। कुरितियां आरम्भ ही पंडो और राजाओ से होती है। भारत के कुछ क्षेत्रों में खास कर दक्षिण भारत में महिलाओं को धर्म और आस्था के नाम पर वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेला जाता है। सामाजिक-पारिवारिक दबाव के चलते ये महिलाएं इस धार्मिक कुरीति का हिस्सा बनने को मजबूर होती है। देवदासी प्रथा के अंतर्गत कोई भी महिला मंदिर में खुद को समर्पित करके देवता की सेवा करती थीं। देवता को खुश करने के लिए मंदिरों में नाचती थीं। इस प्रथा में शामिल महिलाओं के साथ मंदिर के पुजारियों ने यह कहकर शारीरिक संबंध बनाने शुरू कर दिए कि इससे उनके और भगवान के बीच संपर्क स्थापित होता है। धीरे-धीरे यह उनका अधिकार बन गया, जिसको सामाजिक स्वीकायर्ता भी मिल गई है। उसके बाद राजाओं ने अपने महलों में देवदासियां रखने का चलन शुरू किया। जब राजाओं ने महसूस किया कि इतनी संख्या में देवदासियों का पालन-पोषण करना उनके वश में नहीं है, तो देवदासियां सार्वजनिक संपत्ति बन गर्इं। कर्नाटक के 10 और आंध्र प्रदेश के 14 जिलों में यह प्रथा अब भी बदस्तूर जारी है। देवदासी प्रथा को लेकर कई गैर-सरकारी संगठन अपना विरोध दर्ज कराते रहे। सामान्य सामाजिक अवधारणा में देवदासी ऐसी स्त्रियों को कहते हैं, जिनका विवाह मंदिर या अन्य किसी धार्मिक प्रतिष्ठान से कर दिया जाता है। उनका काम मंदिरों की देखभाल तथा नृत्य तथा संगीत सीखना होता है। पहले समाज में इनका उच्च स्थान प्राप्त होता था, बाद में हालात बदतर हो गये। इन्हें मनोरंजन की एक वस्तु समझा जाने लगा। देवदासियां परंपरागत रूप से वे ब्रह्मचारी होती थी पर अब उन्हे पुरुषों से संभोग का अधिकार भी रहता है। यह एक अनुचित और गलत सामाजिक प्रथा है। इसका प्रचलन दक्षिण भारत में प्रधान रूप से था। बीसवीं सदी में देवदासियों की स्थिति में कुछ परिवर्तन आया। अग्रेज़ो ने देवदासी प्रथा को समाप्त करने की कोशिश की तो लोगों ने इसका विरोध किया। इसलिए शायद भारतभूमि पर हुए अनेक विद्वान एवं बुद्धिजीवी जातिवाद के कट्टर विरोधी रहे है जिनमे डॉ अबेडकर जैसे महान समाजवादी भी शामिल हैं। भारत को अपने इतिहास से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। भगवान रामपाल जी महाराज की जय हो जय हो

कानून क्या कहता है? पिछले 20 सालों से पूरे देश में इस प्रथा का प्रचलन बंद हो चुका है। कर्नाटक सरकार ने 1982 में और आंध्र प्रदेश सरकार ने 1988 में इस प्रथा को गैरकानूनी घोषित कर दिया था, लेकिन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 2013 में बताया था कि अभी भी देश में लगभग 4,50,000 देवदासियां हैं। इस प्रथा को निभाने वाले लोगों को या तो कानून के बारे में पता नहीं होता है या फिर वे जानते हुए भी इसकी परवाह नहीं करते। क्योंकि देवदासी प्रथा में शामिल लोग और इसकी खातिर सजा पाने वाले लोगों को आंकड़े में बहुत फर्क है। ‘देवदासी’  पंडो के पाप की एक कुप्रथा है।  कुरितियां आरम्भ ही पंडो और राजाओ से होती है। भारत के कुछ क्षेत्रों में खास कर दक्षिण भारत में महिलाओं को धर्म और आस्था के नाम पर वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेला जाता है। सामाजिक-पारिवारिक दबाव के चलते ये महिलाएं इस धार्मिक कुरीति का हिस्सा बनने को मजबूर होती है।  देवदासी प्रथा के अंतर्गत कोई भी महिला मंदिर में खुद को समर्पित करके देवता की सेवा करती थीं। देवता को खुश करने के लिए मंदिरों में नाचती थीं। इस प्र...

क्या आप जानते हैं,पढ़ें मजेदार तथ्य

आइए जानते हैं कुछ ऐसे तथ्य जिनके बारे में अधिक लोग नहीं जानते। अध्यात्म के अन्दर कुछ गूढ़ बातें होती हैं जिनको ठीक से न समझकर गुरू लोग भ्रमित ज्ञान प्रचार करके अध्यात्म का स्वरूप ही बिगाड़ देते हैं। उदाहरण के लिए :- आज तक हिन्दू धर्म गुरूजनों-संतजनों, आचार्यों तथा शंकराचार्यों को पता नहीं है कि श्री ब्रह्मा जी, श्री विष्णु जी तथा श्री शिव जी के माता-पिता कौन हैं? आप जी को यह जानकारी भी इसी पुस्तक से होगी। धैर्य से पढ़ना। अध्यात्म में मूल रूप में पूज्य, पूजा, साधक तथा साधना शब्द आते हैं, जिनको समझना अनिवार्य है। इस के साथ-साथ आध्यात्म ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है, उसको जानना चाहिए। अ पूज्य :- परमेश्वर जिसे हम प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं। अ पूजा, अर्थात भक्ति :- जिस परमेश्वर को हम प्राप्त करना चाहते हैं उस के गुणों का ज्ञान हमें होता है, फिर उसकी प्राप्ति के लिए तड़फ, समर्पण, तथा आस्था अटूट श्रद्धा यह पूजा कहलाती है। अ साधक :- परमेश्वर की प्राप्ति के लिए कमर कसकर प्रयत्न करने वाला व्यक्ति साधक कहा जाता है, इसे पुजारी भी कह सकते हैं तथा भक्त भी। अ साधना ...

भारत की न्याय व्यवस्था विश्वास करने वाले वीडियो जरूर देखें

जो इस देश मे न्यायपालिका के आदेश की और कानून की दुहाई देते है तो सुने एक सांसद को अपनी जमीन का केस हाईकोर्ट से 2013 मे जीतने के बाद आजतक कब्जा नही मिल पाया हाईकोर्ट से जीतने के बाद प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति सबको कई कई बार गुहार लगा चुका है यह एक सांसद है तो आम आदमी की तो बिसात ही क्या है। ये सब ठीक करने के लिये ही भगवान रामपाल जी संघर्षरत है।

sant rampal ji maharaj

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