आइए जानते हैं कुछ ऐसे तथ्य जिनके बारे में अधिक लोग नहीं जानते।
अध्यात्म के अन्दर कुछ गूढ़ बातें होती हैं जिनको ठीक से न समझकर गुरू
लोग भ्रमित ज्ञान प्रचार करके अध्यात्म का स्वरूप ही बिगाड़ देते हैं।
उदाहरण के लिए :- आज तक हिन्दू धर्म गुरूजनों-संतजनों, आचार्यों तथा
शंकराचार्यों को पता नहीं है कि श्री ब्रह्मा जी, श्री विष्णु जी तथा श्री शिव जी के
माता-पिता कौन हैं? आप जी को यह जानकारी भी इसी पुस्तक से होगी। धैर्य से
पढ़ना।
अध्यात्म में मूल रूप में पूज्य, पूजा, साधक तथा साधना शब्द आते हैं,
जिनको समझना अनिवार्य है। इस के साथ-साथ आध्यात्म ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है,
उसको जानना चाहिए।
अ पूज्य :- परमेश्वर जिसे हम प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं।
अ पूजा, अर्थात भक्ति :- जिस परमेश्वर को हम प्राप्त करना चाहते हैं
उस के गुणों का ज्ञान हमें होता है, फिर उसकी प्राप्ति के लिए तड़फ, समर्पण,
तथा आस्था अटूट श्रद्धा यह पूजा कहलाती है।
अ साधक :- परमेश्वर की प्राप्ति के लिए कमर कसकर प्रयत्न करने
वाला व्यक्ति साधक कहा जाता है, इसे पुजारी भी कह सकते हैं तथा भक्त भी।
अ साधना :- परमेश्वर 🙏अर्थात पूज्य पदार्थ की प्राप्ति के लिए किया जाने
वाला प्रयत्न साधना कहलाती है
उदाहरण :- जैसे किसी को पीने के पानी 🏝की आवश्यकता है, उसको ज्ञान
हुआ कि पृथ्वी🗽 में नीचे पीने का मीठा पानी है, यह पूज्य पदार्थ हुआ अर्थात् पानी
पूज्य वस्तु है।
उसके प्राप्ति के लिए किया जाने वाला प्रयत्न ‘साधना‘ कहलाती है जैसे
बोकी लगाना, पाईप जमीन में डालना, फिर ऊपर हैंडपम्प लगाकर हैंडल से पम्प
चलाना फिर पानी होता है।
पानी पूज्य हुआ, इसकी इच्छा करने वाला भक्त साधक हुआ।
उसके पाने के लिए जो प्रयत्न मजदूरी की वह साधना हुई।
पानी को प्राप्ति की इच्छा ‘पूजा‘ कहलाती है।
साधना में प्रयोग किए गए उपकरण पूज्य नहीं होते परन्तु आदरणीय होते
हैं। उनका विशेष ध्यान रखा जाता है। http://Supremegod.org

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