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Showing posts from May, 2019

गुरु जी के दशर्न कर लो

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पुलिस अगर हमारे ऊपर हाथ उठाए तो हमारे पास क्या अधिकार है कि हम उन्हे रोके कैसे

क्योंकि मैं अभी 2018 में ही इस परिस्थिति में था । मैं अपनी एक मित्र के साथ था में उसकी माता जी भी थी । वो बस पर आगे  . थी उसके ठीक पीछे हम बैठे हुए थे । हम दोनों झांक झांक कर विभिन्न विषयों पर चर्चा भी कर रहे थे । सामने एक गोल मुंह वाला पुलिस हवलदार बैठा था । उसका चेहरा गहरे रंग का था और गाल एकदम भरे हुए थे मुझे अच्छे से याद है , उसके बाल झड़े हुए थे और चेहरे पर एक विचित्र प्रकार की शांति थी मानो वह मोह माया से मुक्त है । हम दोनों ने उसे देखा मेरी महिला मित्र ने उसकी प्रशंसा कर दी कि देखिये सोमेंद्र जी कितने शांत हैं ये , हमने भी प्रशंसा में दो चार वाक्य बोल दिए । उसके बाद हम बैठ गए , लगभग 20 मिनट बाद वो महोदय पास आये मेरा नाम पूछा और उसके बाद मेरी महिला मित्र का नाम पूछा और उसकी माता श्री का नाम पूछने के बाद उसने तुरंत मेरे बाल पकड़ लिए और अपने वाक्यों में अपशब्दों के आभूषण पिरोकर बोलने लगे । उनके वाक्यों में से अपशब्द हटाकर हम बात रहे हैं । “ज्यादा दिमाग खराब है तो बोल यही पुलिस स्टेशन आने वाला है उतार के दो चार बेल्ट लगाएंगे” । अच्छा हम ठहरे आत्मसम्मानी व्यक्ति , हम ...

ऋषिकेश निवासी को भविष्य नजर आता है 2019 में एक ऐसा व्यक्ति आएगा जो पूरे देश पर राज करेगा

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मानव को धर्म के नाम पर बहुत भ्रमित किया गया है।

सत्य कबीर से परिचित होकर उसको पाने के लिये किये गये कर्मो को धर्म या धार्मिक कर्म कहा गया है। मानव को धर्म के नाम पर बहुत भ्रमित किया गया है। हर व्यक्ति के कार्यों को उसका धर्म कह कर गुमराह किया जाता रहा है। सांसारिक कार्यों को कर्तव्य कहा जाना चाहिए। जैसे विधार्थी का कर्तव्य है कि वो विधाध्ययन करे सैनिक का कर्तव्य है कि वह देश की रक्षा करे किसान का कर्तव्य है कि वह संसार के लिये अन्न उत्पादन करे यह सब कर्तव्यों को हमने धर्म का नाम देकर धर्म की मूल परिभाषा को भूला दिया है धर्म परमात्मा प्राप्ति के लिये किये गये कार्यो को कहते है जिन्हे यज्ञ भी कहा गया है। जैसे गुरु को दान, गुरुआदेश से ध्यान, गुरु से कबीर परमात्मा का सतज्ञान गुरु को प्रणाम ,ज्योति हवन और सेवा आदि ये सब मानव के मूल कर्तव्य है इन्ही मूल कर्तव्यों को धार्मिक कार्य कहा जाता है।  सांसारिक कार्य अनिवार्य है परन्तु वो मुख्य नही है वे गौण कर्म है गौण कर्मो का स्वरूप बदल सकता है जैसे एक विधार्थी सैनिक हो सकता है एक सैनिक किसान हो सकता है लेकिन मुख्य कर्म या धार्मिक कर्म कभी नही बदलते ये सबके समान होते है और आजी...