क्योंकि मैं अभी 2018 में ही इस परिस्थिति में था । मैं अपनी एक मित्र के साथ था में उसकी माता जी भी थी । वो बस पर आगे . थी उसके ठीक पीछे हम बैठे हुए थे । हम दोनों झांक झांक कर विभिन्न विषयों पर चर्चा भी कर रहे थे । सामने एक गोल मुंह वाला पुलिस हवलदार बैठा था । उसका चेहरा गहरे रंग का था और गाल एकदम भरे हुए थे मुझे अच्छे से याद है , उसके बाल झड़े हुए थे और चेहरे पर एक विचित्र प्रकार की शांति थी मानो वह मोह माया से मुक्त है । हम दोनों ने उसे देखा मेरी महिला मित्र ने उसकी प्रशंसा कर दी कि देखिये सोमेंद्र जी कितने शांत हैं ये , हमने भी प्रशंसा में दो चार वाक्य बोल दिए । उसके बाद हम बैठ गए , लगभग 20 मिनट बाद वो महोदय पास आये मेरा नाम पूछा और उसके बाद मेरी महिला मित्र का नाम पूछा और उसकी माता श्री का नाम पूछने के बाद उसने तुरंत मेरे बाल पकड़ लिए और अपने वाक्यों में अपशब्दों के आभूषण पिरोकर बोलने लगे । उनके वाक्यों में से अपशब्द हटाकर हम बात रहे हैं । “ज्यादा दिमाग खराब है तो बोल यही पुलिस स्टेशन आने वाला है उतार के दो चार बेल्ट लगाएंगे” । अच्छा हम ठहरे आत्मसम्मानी व्यक्ति , हम ...