Skip to main content

Posts

Showing posts from 2019

‘भक्त दीपक दास के परिवार की आत्म कथा Result_Of_RealWorship

                #Result_Of_RealWorship ‘भक्त दीपक दास के परिवार की आत्म कथा‘‘ ।। बन्दी छोड़ सतगुरू रामपाल जी महाराज जी की दया ।। मुझ दास का नाम दीपक दास पुत्रा श्री बलजीत सिंह, गांव महलाना जिला सोनीपत है। हम तीन पीढि़यों से राधास्वामी पंथ डेरा बाबा जैमल सिंह से नाम उपदेशी थे। सबसे पहले मेरी दादी जी की माता जी यानि मेरे पिता जी की नानी जी ने राधास्वामी पंथ से नाम उपदेश ले रखा था। उसके बाद मेरे दादा-दादी जी और फिर मेरे माता-पिता जी ने भी राधास्वामी पंथ के संत गुरविन्द्र सिंह जी से नाम लिया हुआ था। हम भी गुरविन्द्र जी महाराज को पूर्ण पुरूष मानते थे तथा इस पंथ में पूर्ण श्रद्धा यह सोच कर रखते थे कि यह संसार में प्रभु प्राप्ति का श्रेष्ट पंथ है और उनके विशाल डेरे और विशाल संगत समूह को देखकर विशेष आकर्षित थे और सेवा करने के लिए डेरा बाबा जैमल सिंह व्यास (पंजाब) में तथा छत्तरपुर पूसा रोड़ दिल्ली भी जाते रहते थे। लेकिन इस पंथ में उम्र विशेष में नाम दिया जाता है इसलिए अभी मैं इस पात्राता के लिए अयोग्य था। मेरे माता-पिता जिस दिन छत्तरपुर ...

कबीर दास ही भगवान

कबीर परमेश्वर कबीर दास नाम से प्रसिद्ध हैं जो की जुलाहे का काम करते थे और बनारस में रहते थे। आश्चर्य की बात ये है की परमात्मा स्वयम इस पृथ्वी पर अवतरित हुए और परमेश्वर होते हुए भी एक दास कहलाए।  परमेश्वर कबीर ने अपने भेद को इस तरह गुप्त रखा की कोई भी उनको पहचान नहीं सका। कुछ पर उन्होने अपनी कृपा की जिस के कारण वो उनका भेद पा सके। उनमे से कुछ के नाम हैं धरमदास जी, गुरु नानक देव जी। वेद भी परमात्मा के इस गुण की गवाही देते हैं। ऋग वेद मण्डल 10, सुक्त 4, मंत्र 6 में परमात्मा को तस्कर कहा है। कहा है की परमात्मा तस्कर की तरह आता है और अपना भेद किसी को नहीं लगने देता। गुरु नानक देव जी ने भी अपनी वाणी में कबीर परमेश्वर को एक "ठग" कहा है. (श्री गुरु ग्रंथ साहिब राग सिरी महला पहला, पृष्ठ 24)|

अंध श्रद्धा भक्ति - खतरा-ए-जान

अंध श्रद्धा का अर्थ है बिना विचार-विवेक के किसी भी प्रभु में आस्था करके उसे प्राप्ति की तड़फ में पूजा में लीन हो जाना। फिर अपनी साधना से हटकर शास्त्रा प्रमाणित भक्ति को भी स्वीकार न करना। दूसरे शब्दों में प्रभु भक्ति में अंधविश्वास को ही आधार मानना। जो ज्ञान शास्त्रों के अनुसार नहीं होता, उसको सुन-सुनाकर उसी के आधार से साधना करते रहना। वह साधना जो शास्त्रों के विपरीत है, बहुत हानिकारक है। अनमोल मानव जीवन नष्ट हो जाता है।   अपने पवित्रा धर्मग्रन्थों के प्रमाणों को इस पुस्तक में पढ़ें और फिर शास्त्रों से मेल करें। आँखों देखकर तुरंत शास्त्रा विरूद्ध साधना त्यागकर शास्त्राविधि अनुसार साधना मेरे (लेखक के) पास आकर प्राप्त करें।  https://www.jagatgururampalji.org/andh_shradha_khatra_e_jaan.pdf

#Who_Is_Kaal

Free book

via IFTTT

Holy Bible Genesis 18:1 to 18:5 These verses describe the Lord God walking in the garden which Adam

via IFTTT

#Reality_Of_Christianity

कुछ मित्र कहते है तुम्हारे गुरु जी ने जान बूझकर कर सबसे पन्गा ले लिया ...#सरकारसे पन्गा...#धर्मगुरुओसे पन्गा...#न्यायप्रणाली से पन्गा...#पुलिसप्रशासन से पन्गा...मैंने कहा भाई अब तुम खुद समझ लो इन सब से पन्गा लेने वाला कोई साधारण व्यक्ति तो हो नही सकता...तुम भी सच के साथ चलना शुरू करदो सारीदुनिया तुम्हारी दुश्मन न बन जाय तो कहना...इतिहास उठा कर देख लो....#जीसस के साथ क्या हुआ - जीवित शूली पर टांग दिया #नानक देव जी को बाबर ने बंदी बना लिया #मीरा बाई को जहर के प्याले पिला दिए गए #सुकरात , मंसूर ,और न जाने कितने.....#स्वमं परमेश्वर कबीर साहेब को सिकंदर लोधी ने बहुत जुल्मकिये कई बार मारने की चेष्ठा की अंत में हार मान करसाहेब की शरण लीजय हो बंदी छोड़ की . #Reality_Of_Christianity https://twitter.com/sandeepdass508/status/1190835653593812993?s=19

भगवान कबीर साहेब है I

via IFTTT

Bhagwan ki bhakti karne se labh hua

via IFTTT

अल्लाह का आदेश नहीं फिर भी बकराईद पर बकरे की बलि क्यों दी जा रही है

via IFTTT

बकरा हलाल करने से अल्लाह खुश नहीं होते

via IFTTT

गीता जी मे क्या बताया है

via IFTTT

‘‘जगन्नाथ मंदिर की पुरी (उड़ीसा) में स्थापना‘

‘‘जगन्नाथ मंदिर की पूर्ण सत कथा कहानी जिस समय दुर्वासा ऋषि के शॉप से 56 करोड़ यादव आपस में लड़कर गए। कुछ शेष बचे थे, वे श्री कृष्ण जी ने मूसलों से मार डाले। बलभद्र (बलराम) शेष नाग का अवतार था। मृत्यु के पश्चात् सर्प रूप बनाकर यमुना नदी में प्रवेश कर गया। श्री कृष्ण जी वृक्ष के नीचे विश्राम करने के लिए लेट गए। एक बालीया नाम के भील शिकारी ने श्री कृष्ण के पैर में लगे पदम को हिरण की आँख जानकर वृक्ष की झुरमटों के अंदर से विषाक्त तीर मार दिया। जिस कारण श्री कृष्ण जी की मृत्यु हुई। मृत्यु से पहले श्री कृष्ण जी से उस शिकारी ने क्षमा याचना की तथा कहा हे राजन! मेरे से धोखे से तीर लग गया। मैंने जान-बूझकर नहीं मारा। श्री कृष्ण जी ने कहा कि यह तेरा और मेरा पिछले जन्म का बदला था, सो आपने पूरा कर लिया। आप त्रोतायुग में सुग्रीव के भाई बाली थे। उस समय मैं रामचन्द्र रूप में जन्मा था। मैंने आपको वृक्ष की ओट लेकर मारा था। आज आपने मुझे वृक्ष की ओट से ही मारा है। मैं कुछ समय का मेहमान हूँ। एक कार्य कर दे, मेरे रिश्तेदार पाण्डवों को संदेशा भेज दो कि यादव आपस में लड़कर मर रहे हैं, शीघ्र आओ। ज...

स्वर्ग क्या है

via IFTTT

संत रामपाल जी ने सभी धर्म गुरुओं को ज्ञान में हरा दिया

via IFTTT

पवित्र ज्ञान को उलझाना अब नकली गुरुओं के हाथ में नहीं

नकली ढोंगी गुरु इस पवित्र ज्ञान को फिर से उलझाना चाहते है जो अब असंभव है🙏🙏🙏 आदि नाम है अक्षर माही  बिन गुरु नरक छूटै नाही आदिनाम मै भाख सुनायो यह नाम जपै से मुक्ति पायो है अनाम अक्षर के माही। निह अक्षर कोई जानत नाही। सब संसार कबीर जी को सन्त की पदवी देकर निढाल होकर बैठा था कोई भी कबीर जी को परमात्मा नही कहता था। लेकिन आजकल कबीर जी को परमात्मा कहने वालो की संख्या मे दिन प्रतिदिन बढोतरी होती जा रही है आज सभी नकली कबीरपंथी कबीर जी को परमात्मा कहना शुरु कर चुके है। इसका ज्ञान भगवान रामपाल जी महाराज ने ही दिया है।  परन्तु कुछ वाणीचोर अब भगवान रामपाल जी महाराज का ज्ञान चोरी करके अपना ठप्पा लगाकर बेचने की नाकाम कोशिश कर रहे है ये धन्धेबाज लोग है जो शातिराना तरीके से परमात्मा के अदभुत ज्ञान को दोबारा से उलझाने की फिराक मे है जो अब अंसभव है। इसी उलझाने की प्रक्रिया मे मदन साहिब की कुछ वाणियो को पेश किया जा रहा है मदन साहिब की वाणी पेश करने वाले स्वयं आत्मा और परमात्मा के संशय मे है इसलिए गुप्त रुप से ठगने का प्रयासरत है। वो साबित करना चाहते है कि परमात्मा का आदि नाम इन...

घरेलू हिंसा (वैवाहिक दुर्व्यवहार, अंतरंग साथी हिंसा, घरेलु मारपीट या पारिवारिक हिंसा

घरेलू हिंसा : चुपचुप रहना कब तक सहना #जीने_की_राह' बुक को घर बैठे फ्री में मंगवा सकते हैं। 7496801825 पुरा पता sms करे ================== घरेलू हिंसा : चुपचुप रहना कब तक सहना यूं तो आपस में इसका कोई ताल मेल नहीं पर फिर भी ये अपराध घरों के अन्दर पनप रहा है। घरेलू हिंसा का रूप बन रहा है। ये एक ऐसा अपराध है जो अपनों द्वारा किया जाता है और इसको सहने पर मजबूर हैं महिलाएं। शादी के बाद पति द्वारा व ससुराल पक्ष से एक महिला को यातनाएं सहने पर मजबूर होना पड़ता है। पिता की लाडो एक बड़े अरमानों से डोली में बैठ कर दूसरे घर जाती हैं पर वो ही घर उसके पूरे जीवन व उसके वजूद का अखाड़ा बन जाता है। अपने ही घर की चार दीवारी में अपने ही पति के हाथों पिटती एक औरत प्रमाण है हमारे समाज के पुरूषों की मनोदशा का पुरूषों ने अपनी कमजोरी को और अपने झूठे पुरूषत्व का वर्चस्व कायम रखने के लिए मर्दानगी का मुखौटा पहन रखा है। शर्मिन्दगी के साथ कहना पड़ रहा है कि ये स्थिति केवल निम्न वर्ग की नही हमारे शिक्षित समाज की है। बात 21वीं सदी है जहाँ महिलाओं की स्वतन्त्रता का जोर-शोर से डंका पीट जा रहा है वहीं इस शिक्षित...

गुरु जी के दशर्न कर लो

via IFTTT

पुलिस अगर हमारे ऊपर हाथ उठाए तो हमारे पास क्या अधिकार है कि हम उन्हे रोके कैसे

क्योंकि मैं अभी 2018 में ही इस परिस्थिति में था । मैं अपनी एक मित्र के साथ था में उसकी माता जी भी थी । वो बस पर आगे  . थी उसके ठीक पीछे हम बैठे हुए थे । हम दोनों झांक झांक कर विभिन्न विषयों पर चर्चा भी कर रहे थे । सामने एक गोल मुंह वाला पुलिस हवलदार बैठा था । उसका चेहरा गहरे रंग का था और गाल एकदम भरे हुए थे मुझे अच्छे से याद है , उसके बाल झड़े हुए थे और चेहरे पर एक विचित्र प्रकार की शांति थी मानो वह मोह माया से मुक्त है । हम दोनों ने उसे देखा मेरी महिला मित्र ने उसकी प्रशंसा कर दी कि देखिये सोमेंद्र जी कितने शांत हैं ये , हमने भी प्रशंसा में दो चार वाक्य बोल दिए । उसके बाद हम बैठ गए , लगभग 20 मिनट बाद वो महोदय पास आये मेरा नाम पूछा और उसके बाद मेरी महिला मित्र का नाम पूछा और उसकी माता श्री का नाम पूछने के बाद उसने तुरंत मेरे बाल पकड़ लिए और अपने वाक्यों में अपशब्दों के आभूषण पिरोकर बोलने लगे । उनके वाक्यों में से अपशब्द हटाकर हम बात रहे हैं । “ज्यादा दिमाग खराब है तो बोल यही पुलिस स्टेशन आने वाला है उतार के दो चार बेल्ट लगाएंगे” । अच्छा हम ठहरे आत्मसम्मानी व्यक्ति , हम ...

ऋषिकेश निवासी को भविष्य नजर आता है 2019 में एक ऐसा व्यक्ति आएगा जो पूरे देश पर राज करेगा

via IFTTT

मानव को धर्म के नाम पर बहुत भ्रमित किया गया है।

सत्य कबीर से परिचित होकर उसको पाने के लिये किये गये कर्मो को धर्म या धार्मिक कर्म कहा गया है। मानव को धर्म के नाम पर बहुत भ्रमित किया गया है। हर व्यक्ति के कार्यों को उसका धर्म कह कर गुमराह किया जाता रहा है। सांसारिक कार्यों को कर्तव्य कहा जाना चाहिए। जैसे विधार्थी का कर्तव्य है कि वो विधाध्ययन करे सैनिक का कर्तव्य है कि वह देश की रक्षा करे किसान का कर्तव्य है कि वह संसार के लिये अन्न उत्पादन करे यह सब कर्तव्यों को हमने धर्म का नाम देकर धर्म की मूल परिभाषा को भूला दिया है धर्म परमात्मा प्राप्ति के लिये किये गये कार्यो को कहते है जिन्हे यज्ञ भी कहा गया है। जैसे गुरु को दान, गुरुआदेश से ध्यान, गुरु से कबीर परमात्मा का सतज्ञान गुरु को प्रणाम ,ज्योति हवन और सेवा आदि ये सब मानव के मूल कर्तव्य है इन्ही मूल कर्तव्यों को धार्मिक कार्य कहा जाता है।  सांसारिक कार्य अनिवार्य है परन्तु वो मुख्य नही है वे गौण कर्म है गौण कर्मो का स्वरूप बदल सकता है जैसे एक विधार्थी सैनिक हो सकता है एक सैनिक किसान हो सकता है लेकिन मुख्य कर्म या धार्मिक कर्म कभी नही बदलते ये सबके समान होते है और आजी...

पहली बार ऐसा हुआ जो एक संत परमार्थ के लिए जेल धाम मे है

😵-हिसार_धाम - 😵         जेल :- शब्द अगर किसी मनुष्य के #चरित्र से जुड़ जाता है तो उसकी गरिमा पर सवाल उठने लगते है, और बदनामी का दाग लग ही जाता है! किसी व्यक्ति के जेल जाने के बाद उसे घृणा या #संदेह कि निगाह से देखा जाना लाजमी है! जेल जाने के भी विविध कारण हो सकते है और कभी-कभी उद्देश्य भी | व्यक्ति दुराचारी, भ्रष्टाचारी, दुष्कर्मी, चोर, हत्यारा, होकर भी “जेल” जाता है, और ऐसे व्यक्ति से घृणा करना या उसकी बेगुनाही पर संदेह करना स्वाभाविक है | लेकिन जरुरी नही की जेल जाने वाला हर व्यक्ति कुकर्मी हो, कुछ लोग #परमार्थ और समाज सुधार के उद्देश्य को पुरा करने के लिए भी “जेल” जैसी प्रताड़नाये स्वीकार करते है | जहाँ एक तरफ चंद्र शेखर आजाद, भगत सिंह, जैसे देश-प्रेमी हंसते-हंसते फांसी चढ़ गये तो वही दुसरी तरफ महात्मा गांधी जैसे राष्ट्रपिता भी जेल भोगकर परमार्थ मे “जेल”जाने की मिशाल कायम कर गये| श्री कृष्ण! जी का तो जन्म ही जेल मे हुआ था, फिर भी इंसान आज उन्हे धिक्कारने की बजाय पूजता है | ईसा मसीह ने “सत्य” कहा तो इसी जनता ने उन्हे शूली पर टांग दिया, और वर्तमान मे उन्ह...

गीता का ज्ञान

गीता अध्याय 8 श्लोक 1 में अर्जुन ने प्रश्न किया कि हे भगवान! (किम् तत् ब्रह्म) वह ब्रह्म क्या है? जिसको जानकर साधक केवल मोक्ष ही चाहता है। इसका उत्तर गीता अध्याय 8 श्लोक 3 में गीता ज्ञान दाता ने दिया है। कहा है कि “वह परम अक्षर ब्रह्म है।” गीता ज्ञान दाता ने इस परम अक्षर ब्रह्म की जानकारी गीता अध्याय 8 में ही श्लोक नं. 8ए 9ए 10ए 20ए 21ए 22ए में भी दी है जो गीता ज्ञान दाता से अन्य है। गीता अध्याय 2 श्लोक 17 में कहा है कि जिस परमेश्वर ने सम्पूर्ण जगत् की रचना की है, जिससे यह जगत व्याप्त है (अर्थात् जिसकी शक्ति से सर्व ब्रह्माण्ड टिके हैं, रूके हैं) वह वास्तव में अविनाशी परमात्मा है जिसका नाश करने में कोई समर्थ नहीं है। गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में भी कहा है कि पुरूषोत्तम तो अन्य है (गीता अध्याय 15 श्लोक 16 में दो पुरूष कहे हैं, क्षर पुरूष तथा अक्षर पुरूष। उत्तम पुरूष इन से अन्य है, अर्थात् श्रेष्ठ परमेश्वर) जो तीनों लोकों में प्रवेश करके सब का धारण-पोषण करता है। वह परमात्मा कहा जाता है। वही वास्तव में अविनाशी परमेश्वर है। (गीता अध्याय 15 श्लोक 17), फिर गीता अध्याय 2 के ह...

आदरणीय श्री नानक साहेब जी प्रभु कबीर (धाणक) जुलाहा के साक्षी

कबीर साहिब ने गुरु नानक देव जी को सतनाम दिया तथा सत लोक (सचखंड) दिखाया। साहेब कबीर द्वारा श्री नानक जी को तत्वज्ञान समझाना नानक जी का संक्षिप्त परिचय श्री नानक देव का जन्म विक्रमी संवत् 1526 (सन् 1469) कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को हिन्दु परिवार में श्री कालु राम मेहत्ता (खत्री) के घर माता श्रीमति तृप्ता देवी की पवित्र कोख (गर्भ) से पश्चिमी पाकिस्त्तान के जिला लाहौर के तलवंडी नामक गाँव में हुआ। इन्होंने फारसी, पंजाबी, संस्कृत भाषा पढ़ी हुई थी। श्रीमद् भगवत गीता जी को श्री बृजलाल पांडे से पढ़ा करते थे। श्री नानक देव जी के श्री चन्द तथा लखमी चन्द दो लड़के थे। श्री नानक जी अपनी बहन नानकी की सुसराल शहर सुल्तान पुर में अपने बहनोई श्री जयराम जी की कृपा से सुल्तान पुर के नवाब के यहाँ मोदी खाने की नौकरी किया करते थे। प्रभु में असीम प्रेम था क्योंकि यह पुण्यात्मा युगों-युगों से पवित्र भक्ति ब्रह्म भगवान(काल) की करते हुए आ रहे थे। सत्ययुग में यही नानक जी राजा अम्ब्रीष थे तथा ब्रह्म भक्ति विष्णु जी को इष्ट मानकर किया करते थे। दुर्वासा जैसे महान तपस्वी ऋषि भी इनके दरबार में हार मान कर क...