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Showing posts from April, 2020

”पुरी में श्री जगन्नाथ जी का मन्दिर अर्थात् धाम कैसे बना“

उड़ीसा प्रांत में एक इन्द्रदमन नाम का राजा था। वह भगवान श्री कृष्ण जी  का  अनन्य भक्त था। एक रात्रा को श्री कृष्ण जी ने राजा को स्वपन में दर्शन देकर कहा कि जगन्नाथ नाम से मेरा एक मन्दिर बनवा दे। श्री कृष्ण जी ने यह भी कहा था कि इस मन्दिर में मूर्ति पूजा नहीं करनी है। केवल एक संत छोड़ना है जो दर्शकों को पवित्रा गीता अनुसार ज्ञान प्रचार करे। समुद्र तट पर वह स्थान भी दिखाया जहाँ मन्दिर बनाना था। सुबह उठकर राजा इन्द्रदमन ने अपनी पत्नी को बताया कि आज रात्रा को भगवान श्री कृष्ण जी दिखाई दिए। मन्दिर बनवाने के लिए कहा है। रानी ने कहा शुभ कार्य में देरी क्या? सर्व सम्पत्ति उन्हीं की दी हुई है। उन्हीं को समर्पित करने में क्या सोचना है? राजा ने उस स्थान पर मन्दिर बनवा दिया जो श्री कृष्ण जी ने स्वपन में समुद्र के किनारे पर दिखाया था। मन्दिर बनने के बाद समुद्री तुफान उठा, मन्दिर को तोड़ दिया। निशान भी नहीं बचा कि यहाँ मन्दिर था। ऐसे राजा ने पाँच बार मन्दिर बनवाया। पाँचों बार समुद्र ने तोड़ दिया। राजा ने निराश होकर मन्दिर न बनवाने का निर्णय ले लिया। यह सोचा कि ...
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महामारी कोरोना

👇👇👇महामारी👇👇👇 एक बार एक राजा के राज्य में महामारी फैल गयी। चारो ओर लोग मरने लगे। राजा ने इसे रोकने के लिये बहुत सारे उपाय करवाये मगर कुछ असर न हुआ और लोग मरते रहे। दुखी राजा ईश्वर से प्रार्थना करने लगा। तभी अचानक आकाशवाणी हुई। आसमान से आवाज़ आयी कि हे राजा तुम्हारी राजधानी के बीचो-बीच जो पुराना सूखा कुंआ है अगर अमावस्या की रात को राज्य के प्रत्येक घर से एक – एक बाल्टी दूध उस कुएं में डाला जाये तो अगली ही सुबह ये महामारी समाप्त हो जायेगी और लोगों का मरना बन्द हो जायेगा। राजा ने तुरन्त ही पूरे राज्य में यह घोषणा करवा दी कि महामारी से बचने के लिए अमावस्या की रात को हर घर से कुएं में एक-एक बाल्टी दूध डाला जाना अनिवार्य है!  अमावस्या की रात जब लोगों को कुएं में दूध डालना था उसी रात राज्य में रहने वाली एक चालाक एवं कंजूस बुढ़िया ने सोंचा कि सारे लोग तो कुंए में दूध डालेंगे अगर मै अकेली एक बाल्टी "पानी" डाल दूं तो किसी को क्या पता चलेगा। इसी विचार से उस कंजूस बुढ़िया ने रात में चुपचाप एक बाल्टी पानी कुंए में डाल दिया। अगले दिन जब सुबह हुई तो लोग वैसे ही मर रहे थे। कुछ भी ...

‘‘दास की परिभाषा

                      ‘‘दास की परिभाषा                  ``दास की परिभाषा,, एक समय सुल्तान एक संत के आश्रम में गया। वहाँ कुछ दिन संत जी के विशेषआ आग्रहसे रूका । संत का नाम हुकम दास था। बारह शिष्य उनके साथ आश्रम में रहते थे। सबके नाम के पीछे दास लगा था। फकीर दास, आनन्द दास, कर्म दास, धर्मदास। उनका व्यवहार दास वाला नहीं था। उनके गुरू एक को सेवा के लिए कहते तो वह कहता कि धर्मदास की बारी है, उसको कहो, धर्मदास कहता कि आनन्द दास का नम्बर है। उनका व्यवहार देखकर सुल्तानी ने कहा किः- दासा भाव नेड़ै नहीं, नाम धराया दास। पानी के पीए बिन, कैसे मिट है प्यास।। सुल्तानी ने उन शिष्यों को समझाया कि मैं जब राजा था, तब एक दास मोल लाया था। मैंने उससे पूछा कि तू क्या खाना पसंद करता है। दास ने उत्तर दिया कि दास को जो खाना मालिक देता है, वही उसकी पसंद होती है। आपकी क्या इच्छा होती है? आप क्या कार्य करना पसंद करते हो? जिस कार्य की मालिक आज्ञा देता है, वही मेरी पसंद है। आप क्या पहनते हो? मालिक के ...

तब्लीग का मतलब है

                    तब्लीग का मतलब है  अल्लाह और कुरान, हदीस की बात दूसरों तक पहुंचाना. वहीं जमात का मतलब समूह से है. तबलीगी जमात यानी एक समूह की जमात. तबलीगी मरकज का मतलब इस्लाम की बात दूसरे लोगों तक पहुंचाने का केंद्र हैं. अल-कांधलवी इसे सभी दाव (अभियोग) के माध्यम से समाप्त करना चाहता था। उन्होंने अपने स्वयंसेवकों को "अल्लाह का संदेश" फैलाने के लिए गांवों में भेजा। ब्रिटिश भारत में संगठन तेजी से बढ़ा। नवंबर 1941 में आयोजित इसके वार्षिक सम्मेलन में, लगभग 25,000 लोगों ने भाग लिया। विभाजन के बाद, यह पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान (हाल ही में बांग्लादेश) में मजबूत हुआ। अब, तब्लीगी की सबसे बड़ी राष्ट्रीय शाखा बांग्लादेश में है। समूह की 150 देशों और लाखों अनुयायियों में उपस्थिति है। तबलीगी जमात का मतलब है आस्था का प्रचार करने वालों की एक टोली या समूह। 2. यह सुन्नी देवबंदी या वहाबी मुसलमानों की जमात है. 3. इसे मेवात के रहने वाले देव

मुसलमान खतना क्यों करवाते हैं

मुसलमान मूंछ क्यों कटवाते हैं सिर पर चोटी क्यों नहीं रखते खतना क्यों होती है इन अनसुलझे प्रश्नों को के उत्तर आज बताता हूं हजरत मुहम्मद (मुसलमान धर्म का प्रवर्तक) एक स्त्री के साथ अवैध संबंध बनाकर पाप के भागी बन गए थे। उनकी पत्नी बड़े घराने से थी जो बहुत पैसे वाली धनवान थी। उसकी उस क्षेत्र में बहुत चलती थी। धन के प्रभाव से लोग उसकी आज्ञा का पालन करते थे। नौकर भी रखती थी। जब हजरत मुहम्मद दूर क्षेत्र में प्रचार करने जाने लगा तो उसकी पत्नी खदीजा ने कहा था कि किसी अन्य स्त्री के चक्कर न पड़ना। यदि ये गलती की तो तेरे को सजा दी जाएगी। मुहम्मद ने शर्त स्वीकार कर ली। दूर स्थान पर मुसलमान धर्म का प्रचार करते समय आदि माया की प्रेरित सुंदर स्त्री जो विधवा थी, मुहम्मद के सम्पर्क में आई, मुसलमान बन गई। दोनों का अवैध संबंध भी हो गया खदीजा को उसके नौकरों ने बताया तो खदीजा ने मुहम्मद को बुलाकर सजा दिलाई। मुहम्मद का लिंग, आगे से मूंछे तथा सिर की चोटी कटवाने का आदेश नौकरों को दिया। नौकरों ने मूँछे तथा चोटी काट दी, परंतु लिंग नहीं काटा। लिंग की कुछ खाल (चमड़ी) जो आगे के भाग पर होती है, वह काट दी और खद...