इस असार संसार में कोई अमर नहीं है, सिर्फ हरि नाम ही सार है। इतना कहकर कबीर साहिब उठ खड़े हुए और बोतल को देखा तो उसमें थोड़ा सा ही जल शेष था उन्होंने उस शेष थोड़े जल को अपने पैरों पर डालना शुरु कर दिया जल की धार ही नहीं टूटी और उस पानी से दरबार में बिछी फर्श-कालीन गीली होने लगीं। इस कारनामे को देखकर राजा और मंत्री सभी चोक कर अपनी-अपनी जगहों पर खड़े हो गये। राजा ने कबीर साहिब के पास जाकर कहा ये आप क्या कर रहे हैं महाराज? हमारा सारा राजदरबा भीग जाएगा। इस पर कबीर साहिब ने जल गिराना बंद करके कहा अपने दरबार की भीगने की चिन्ता न करें राजन। हम तो जगन्नाथ पुरी के पण्डा रामहर्ष के पैरों की जलन शांत कर रहे थे। क्षणभर पहले ही तप्त जल से उसके पैर जल गए थे और वह मदद के लिए हमें पुकार रहा था।य यह सुनकर राजा और दरबारी सभी विस्मित हो गए कि कबीर साहिब काशी राजदरबार के बीच खड़े होकर, जगन्नाथ पुरी में मौजूद पण्डा के पैरो की जलन कैसे शांत कर सकते हैं? ऐसा नहीं हो सकता। इस पर रविदास जी ने राजा से कहा कि ऐसा ही हुआ है राजन! राम हर्ष...
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