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Showing posts from January, 2019

क्यों किसानों को सरकार से हक की लडाई करनी पड़ रही है

न्यूनतम समर्थन मुल्य और अधिकतम खुदरा मुल्य (M.S.P और M.R.P) के बीच पीसता हुआ किसान न्यूनतम समर्थन मुल्य किसानो की फसल का सरकार द्वारा दिया जाने वाला मुल्य है इसका मतलब है कम से कम मुल्य इसको साधारण भाषा मे कहे तो यह किसानो के आर्थिक जीवन पर सरकार की लगाम है जो दिखावा करती है कि सरकार किसानो की फसल खरीदने के लिये कटिबद्ध है लेकिन यह सब ढोंग है क्योंकि यह जमाखोरों को दिया जाने वाला अप्रत्यक्ष संरक्षण है ये जमाखोर किसान की फसल को खरीदते ही उसकी कीमत जनता के लिये दस गुना बढा देते है और सरकार कम उत्पादन की दुहाई देकर भ्रमित करती है यदि उत्पादन कम था तो किसान से न्यूनतम समर्थन मुल्य पर क्यो खरीदा गया कुदरती तौर पर किसानो की फसल खरीदने के लिये प्रत्येक मानव ही मजबूर है क्योकि किसान का अन्न सबकी दैहिक आवश्यकता है यानि चाहे अनचाहे सबको यह खरीदना ही पडेगा लेकिन सरकार मे बैठे बाघड घुसखोर बिल्ले जमाखोरों के साथ मिल कर किसान के फसल की बिक्री के समय जानबूझकर भाव और ग्राहकी कम कर देते तब गरीब किसान विचलित हो उठता फिर उन्ही चोर सरकारी खरीद के नाम पर न्यूनतम मुल्य के नाम पर किसान की लूट भी की और...

वशंवाद की राजनीति मे उलझा रहा आज तक विकास।

      वशंवाद की राजनीति मे उलझा रहा आज तक विकास। भारत की राजनीति किस प्रकार वंशानुगत हमारा शोषण कर रही है। जिस राजनीति की बात करते करते हम अपना सारा जीवन नष्ट कर लेते है वो कुछ परिवारो के यंहा गिरवी पडी है। यदि हम उतर से दक्षिण भारत की ओर चले तो सबसे पहले कश्मीर जिसमे दो पार्टियां National Conference, और People democratic party दोनो वंशानुगत है दोनो के अध्यक्ष उनके वंशज ही है। पंजाब मे अकाली दल पूर्णतया वशंवादी है हरियाणा मे तीन लाल की चौथी पीढी शासन तक पहुच चुकी है हिमाचल और राजस्थान कुछ ऐसे राज्य है जिनमे मुख्य दल काग्रेंस और भाजपा है। जिनके वशंवाद के बारे मे सब परिचित है। उतरप्रदेश मे बहुजन समाज पार्टी मे काशीराम के बाद मायावती और मायावती के बाद इसका भतीजा। समाजवादी पार्टी परिवारवाद का सबसे बड़ा उदाहरण रहा है एक समय मे सबसे ज्यादा विधायक इसी दल के रह चूके है। लालू की पार्टी मे उसके लडको कि अध्यक्ष होना यही दर्शाता है। पश्चिम बंगाल में ममता का ममत्व उसके परिवार के प्रति होना है। उडीसा बीजू जनता दल परिवारिक दल है। आन्ध्रप्रदेश मे तेलगूदेशम पार्टी ससुर जवांई ...

संत कबीर के द्वारा बताया गया मार्ग

 नकली ढोंगी गुरु इस ppपवित्र ज्ञान को फिर से उलझाना चाहते है जो अब असंभव है🙏🙏🙏 आदि नाम है अक्षर माहीP  बिन गुरु नरक छूटै नाही आदिनाम मै भाख सुनायो यह नाम जपै से मुक्ति पायो है अनाम अक्षर के माही। निह अक्षर कोई जानत नाही। सब संसार कबीर जी को सन्त की पदवी देकर निढाल होकर बैठा था कोई भी कबीर जी को परमात्मा नही कहता था। लेकिन आजकल कबीर जी को परमात्मा कहने वालो की संख्या मे दिन प्रतिदिन बढोतरी होती जा रही है आज सभी नकली कबीरपंथी कबीर जी को परमात्मा कहना शुरु कर चुके है। इसका ज्ञान भगवान रामपाल जी महाराज ने ही दिया है।  परन्तु कुछ वाणीचोर अब भगवान रामपाल जी महाराज का ज्ञान चोरी करके अपना ठप्पा लगाकर बेचने की नाकाम कोशिश कर रहे है ये धन्धेबाज लोग है जो शातिराना तरीके से परमात्मा के अदभुत ज्ञान को दोबारा से उलझाने की फिराक मे है जो अब अंसभव है। इसी उलझाने की प्रक्रिया मे मदन साहिब की कुछ वाणियो को पेश किया जा रहा है मदन साहिब की वाणी पेश करने वाले स्वयं आत्मा और परमात्मा के संशय मे है इसलिए गुप्त रुप से ठगने का प्रयासरत है। वो साबित करना चाहते है कि परमात्मा का...

हम साकार तो हमे बनाने वाला भी साकार

सब जगत साकार है परमात्मा भी साकार ही है साकारता का नाम ही ब्रह्मंड है ब्रह्मांड की प्रत्येक वस्तु का परिमाप है सुर्य चन्द्र सब का व्यास और परिधि से हम परिचित है वायु भी निराकार नही होती वायुमंडल का भी परिमाप है कि भुमि से तीन सौ किलोमीटर का घेरा है वायु को भी दिशा,गति और शक्ति से माप लेते है। हिन्दु  निर्गुण और निराकार मे भेद ही नही कर पाते जबकि ये दोनो बिल्कुल अलग अलग शब्द है निर्गुण सगुण का विपरीतार्थक शब्द है सगुण यानि रज,तम,सत गुणो के सहित है जो व्यक्त है देखा जा सकता है निर्गुण तीनो गुणो से परे जो अव्यक्त है। सगुण जैसे आम का पेड निर्गुण मतलब आम की गुठली मे आम का पेड। निर्गुण निराकार नही होता दोनो मे शाब्दिक भेद भी है जिसका आकार ना हो निराकार कहा जाता है कोई भी अस्तित्व निराकार नही हो सकता भिन्न भिन्न आकार लेने वाले को या अचानक प्रकट होने वाले को भी निराकार नही कह सकते जैसे बादल पल पल मे आकार बदल लेते है पर है साकार। बहुत ज्यादा बडा है तो जिसको हम मापने मे अक्षम है तो वह भी बहुत ज्यादा साकार ही है बहुत छोटा है जिसे देख नही सकते तो भी साकार ही है। मुस्ल...

भक्त भूमड की क्या है कथा Sharanpur

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जाकिर नाईक को खुली चुनौती

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ja ganes ja ganes kio kara

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#धिक्कार भारतीय पाठ्यक्रम की पुस्तकों मे लिखा है कबीर का जन्म विधवा ब्राह्मणी से हुआ

#धिक्कार भारतीय पाठ्यक्रम की पुस्तकों मे लिखा है  कबीर का जन्म विधवा ब्राह्मणी से हुआ वेद जिस कबीर के प्रकट होने का बखान करते हो कुरानेपाक और बाईबल जिसकी हकुमत को स्वीकार करती हो तमाम सन्त उसकी समर्थता का गुणगान करते हो कि वो कबीर स्वयं चल कर आता है सशरीर प्रकट होता है। उसी कबीर परमात्मा के बारे में ब्राह्मणवादी दुष्प्रभाव से त्रस्त मानसिकता के लोग पाठ्यक्रम की पुस्तकों मे कबीर को एक विधवा ब्राह्मणी की अवैध सन्तान घोषित कर महाअपमानित करने की धृष्टता करते है और तमाम कबीरपन्थी विद्वान इस अपमान को पिछले सैकड़ो साल से घोल कर पीते चले आ रहे है। इससे बड़ी अज्ञानता इस भुमि पर क्या होगी जिसे अध्यात्मिकता की धरती कहा जाता है। यदि साधारणतया भी किसी आम इन्सान को जातिसूचक  अपशब्द कहे जाये तो भारतीय दण्ड विधान के तहत कठोर सजा का प्रावधान है और आज से 125 वर्ष पुर्व एक ब्राह्मणवादी अज्ञानी दयानंद ने कबीर परमात्मा को जातिसुचक अपशब्द कहे उस घटिया पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश को विशेष ग्रन्थ मानना ही परमात्मा के प्रति जानबूझकर द्रोही होना है। घिन्न आती है इस धरती से जिस पर रहने वाले लोग असभ...

ब्राह्मणवाद द्वारा वैदिकता का हरण परिणाम कुम्भ Prayagraj PrayagrajKumbh

PRAYAGRAJ kumbhmala2019                                     👇👇 हम सत्य सनातन है वैदिक है यह कहते हुये कुम्भ के मेले मे करोडो हिन्दू डूबकी लगाने का ढोंग करेगे वेद मे कुम्भ को स्वीकृति कहां है? यह जांच लेना हिन्दशक्ति का कर्त्तव्य क्यो नही है यदि वेद मे कुम्भ आदि स्नान का जिक्र नही फिर भी हम इन सब को महत्व देते है तो हम स्वयं को सनातन और वैदिक कैसे कह सकते है। वेद मे पाप काटने का पूरा विवरण है वेद कहते है कि परमात्मा पाप काट देता है लेकिन उसके लिये किसी स्थान विशेष पर जाकर स्नान करने की विधि कदाचित नही है। वैदिक का अपहरण ब्राह्मणवाद बहुत पहले कर चुका जिसके परिणाम स्वरूप इन स्नान और तीर्थो की व्यर्थं की बातो को महत्व दिया जाने लगा। एक बार विचार करे अमृत के कुम्भ पर देवताओं और राक्षसो का झगडे मे चन्द बून्द पृथ्वीलोक पर गिरी तो वह स्थान पाप नाशक कैसे हुआ उस अमृत का पान करनेवाले देवता भी मरते है उनकी भी देह छूटती है विचार करो परमेश्वर के बच्चो विचार करो उस पानी मे रहने वाले जीव लाखो कष्ट पाते है ...

धार्मिक भावनाओं को ठेस

 यदि कोई सज्जन पुरूष (स्त्रा-पुरूष) उस अंध श्रद्धालु को कहे कि आप जिस देवी-देवता को ईष्ट मानकर जो साधना कर रहे हो, यह गलत है। इससे आपको कोई लाभ नहीं मिलेगा। आपका मानव जीवन नष्ट हो जाएगा। आप देवी-देवताओं की पूजा ईष्ट मानकर ना करो। आप मूर्ति की पूजा ना करो। आप धामों तथा तीर्थों पर मोक्ष उद्देश्य से ना जाओ। आप श्राद्ध न करो, पिण्डदान ना करो। तेरहवीं, सतरहवीं क्रिया या अस्थियाँ उठाकर गति कराने के लिए मत ले जाओ। आप व्रत न रखो। इसके स्थान पर अन्न-जल करने में संयम करो, न अधिक खाओ, न बिल्कुल भूखे रहो। आप अपने धर्म के शास्त्रों में बताए भक्ति मार्ग के अनुसार साधना करो। वह अंध श्रद्धावान यदि उस सज्जन पुरूष से कहे कि आप अच्छे व्यक्ति नहीं हो। आप ने हमारी धार्मिक भावनाऐं आहत की हैं। चला जा यहाँ से, वरना तेरी हड्डी-पसली एक कर दूँगा। जोर-जोर-से शोर मचाने लगता है। उसके शोर को सुनकर उसी क्षेत्रा के उसी तरह उन्हीं देवी-देवताओं व तीर्थों-धामों के उपासकों का हुजूम इकठ्ठा हो जाता है। बात धर्मगुरूओं तक पहुँच जाती है। धर्मगुरू भी वही शास्त्राविरूद्ध मनमाना आचरण करने-कराने वाले हो...

क्या है मकर संक्रांति का पर्व

मकर संक्रांति सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने का दिन, सूर्य के उत्तरायण होने का दिन, सूर्य के मकर रेखा पर से गुजरने का दिन है । और इस दिन को भारत सहित नेपाल, बांग्लादेश, कम्बोडिया, श्रीलंका आदि देशों में भिन्न भिन्न नाम और भिन्न परम्पराओं के अनुसार मनाया जाता है। भारत देश के विभिन्न राज्यों में भी इसे भिन्न भिन्न नाम व तरीकों से मनाया जाता है। मकर सक्रांति के पर्व में चाहे वह भिन्न भिन्न राज्य या भाषा बोलने वाले मनाते हों लेकिन इस पर्व में जो सामान्य बात नजर आती है वह यह है कि इस दिन सभी दान करने के विशेष महत्त्व को ध्यान में रखते हुए दान करने में आगे रहते हैं। दान में धन, अन्न, वस्त्र, भोजन या कोई भी जीवनयापन के साधन रूपी वस्तु का ही प्रयोग करते हैं। लेकिन गीता अध्याय 4 में ज्ञान यज्ञ को सभी यज्ञ से श्रेष्ठ बताया गया है। ज्ञान की प्राप्ति सच्चे गुरु के बिना नहीं हो सकती। गीता ज्ञान दाता भी कहता है कि उस ज्ञान की प्राप्ति के लिए तत्वदर्शी सन्त की खोज करो, वही तुझे तत्वज्ञान का उपदेश करेंगे। कहते हैं कि गुरु बिन माला फेरते, गुरु बिन देते दान। गुरु बिन दोनों ...

स्वार्थी ब्राह्मणों ने हमारे देश को कूड़े का ढेर बना दिया

स्वार्थी ब्राह्मणो ने हमारे देश को गन्दगी का ढेर बना दिया जिस वर्ण का सबसे ज्यादा सम्मान किया जाना चाहिये था उसी को हमने शुद्र कह कर दुत्कार दिया। सबसे पवित्र कार्य साफ सफाई को माना जाता है लेकिन ब्राह्मणो के बहकावे मे आकर हमने उस श्रेष्ठ कार्य को ही निकृष्ट मान लिया जिसके कारण सारी सामाजिक व्यवस्था ही चरमरा गयी। स्वार्थी ब्राह्मणो को गीता और वेद ज्ञान स्वयं ही नही था और ऐसे नियम बना दिये कि अक्षर ज्ञान ही नही होने दिया इनके इस षडयन्त्र के कारण हमारे पुर्वज अनपढ रह गये ताकि ये उन्हे शास्त्रो के नाम पर लूट सके। इसलिये आज अगर हम वैज्ञानिक आधार पर देखे तो नयी खोज करने मे भारत का योगदान न्यून है। अगर इन्होने समाज को अक्षर ज्ञान दिया होता तो आज हम युरोप अमेरिका आदि देशो के प्रतियोगी होते। आज हमारे पास कृषि और औधोगिक मशीनरी होती पर हम शिक्षा बिना पीछे रह गये अब आप स्वयं निर्णय करो कि इनसे बडा देश का दुश्मन कौन हो सकता है।  इन्होने क्षत्रियो को भी अन्धविश्वास के नाम पर ठगा है इन्हे भगवान की कोई जानकारी नही थी बस उसके नाम पर दुकानदारी करते मनमुखी साधना पर राजा को आश्रित कर दिया और भ्...

गुरू ही भगवान क्यौं

सोई गुरु पूरा कहावै दो अखर का भेद बतावै  एक छूडावै एक लखावै तो प्राणी निज घर को जावै। नामा छीपा औम तारी पाछै सोहम् शब्द विचारी  सार शब्द पाया जद लोई आवागमन बहुर ना होई। सब कुछ कबीर जी का है अधिकारी है तो केवल एक कबीर🙏🙏🙏 कबीर जी के ये अखिल ब्रह्मांड कबीर साहिब सब के पिता सभी ने कबीर जी से बोलना सीखा सभी ने कबीरजी की कृपा से मानव जीवन सदभक्ति सब कुछ कबीर जी से पाया चाहे दादू साहिब हो चाहे नानक साहिब चाहे घीसा साहिब हो या गरीबदास साहिब सब स्वयं कबीर कबीर कबीर ही करते रहे और संसार को कबीर कबीर ही सीखा कर चले गये।  लेकिन हम दो कौडी के कतृध्नी जीव अब इन सन्तो की वाणी पर किसकी छाप लगी है इस पर भी झगडा खड़ा किये है जो भी सन्त महाराज हुये उन्होंने सिर्फ यही कहा जो कुछ है वो कबीरजी ही है और कोई कुछ नही लेकिन हम उस मूलज्ञान को भूला कर कबीरजी के प्यारे सन्तो का बंटवारा करने पर अड़े है परमात्मा कबीरजी है वह सशरीर आता है हमे उसकी पूजा करनी चाहिए इस बात को केवल गुरुजी महाराज रामपाल जी साहिब जी ने परिचित करवाया अन्य सभी कबीर जी को सन्त की उपाधि दिये बैठे थे। आज ज...

सतलोक आश्रम करोंथा में होगा सत्संग

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sant rampal ji maharaj jale sa bhar kio nhi aa jata

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कबीर ज्ञान प्रकाश और अंधविश्वास का अंधेरा

कबीर ज्ञान प्रकाश और अंधविश्वास का अन्धेरा। आज हम बुद्विमता विद्ववता का ढिढोरा पीटते नही थकते आज स्वयं की बौद्विक विकास की पराकाष्ठा का गुमान करते है लेकिन सत्य इसके विपरीत है हम अत्यंत रुढिवादी और विक्षिप्त मानसिकता के शिकार होकर अन्धविश्वासी हो चुके है हमारे बौद्धिक चक्षु दृष्टि हीन हो चुके है क्योकि छः सौ साल पहले कबीर परमात्मा जिन वाणियो को साधारण जन भाषा मे कह कर गये थे आज तक हम उन्हे ही नही समझ पाये है छः सौ साल पहले झूठी और नकली आस्था पर जो कबीरज्ञान का प्रहार हुआ था आज उससे भी अधिक झूठी आस्था के बोझ तले हम दबे है हम आज तक रति भर भी लाभ उस अमरवाणी का नही ले पाये है जो कबीर परमात्मा ने स्वयं फरमाई और अपनी प्यारी आत्माओं के मुखकमल से उनका प्रचार करवाया था। कबीर जी सबको सहर्ष स्वीकार्य है उनकी वाणी प्रत्येक जन साधारण को याद है लेकिन जो कबीर जी ने हमारे लिये अवैध किया हम ने उसे ही करने के लिये प्राण झोंक दिये मसलन जातिवाद, कबीर जी ने हमे बहुत समझाया है कि हम सब की जाति मानव है लेकिन हम आज भी सवर्ण बनने का अन्य को असवर्ण बताने का पाप कर रहे है। कबीर जी ने दोनो धर्मों के (हिन्दू ...

pustak aur unke lekhak who this book gayan ganga

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हिन्दू हिन्दू और हिन्दू क्योंकि हमारा जन्म भी इसी विचारधारा को मानने वाले लोगो के बीच हुआ है

हिन्दू हिन्दू और हिन्दू यह एक विद्वानों की विचारधारा थी ऐसा हमारे पूर्वज कहते आये है क्योंकि हमारा जन्म भी इसी विचारधारा को मानने वाले लोगो के बीच हुआ है अतः इस धर्म के बारे मे हमारी जानकारी निश्चित तौर पर सही होगी इस धर्म मे जिसमे से आज विद्ववता विलुप्तप्राय हो चुकी है। उसका कारण इस धर्म के ठेकेदार जिसमे ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य वर्ग आते है इन तीनो वर्गो ने निजी हितो को साधने के लिये इस धर्म का बेजा इस्तेमाल किया जिसके कारण आज इस धर्म मे इतनी भ्रांतियां और रुढिवादिता घर कर चुकी जिसका इस धर्म विशेष मे कदाचित कोई स्थान नही था। जिस धर्म के इष्ट हजारो बन जाये उस धर्म को एक परमात्मा की सत्ता समझने के लिये विशेष पुनरावलोकन की गहरी आवश्यकता है सांस्कृतिक रुप अति विलक्षण होने के उपरांत आज इसकी स्थिति शोचनीय है जिसकी जिम्मेदारी इसका दोहन करने वाले तीनो वर्णों को लेनी होगी जिसने सबसे उत्तम वर्ण को जो बहुजन था इससे दूर करने मे कोई कोर कसर नही छोडी। हम इस लेख मे हजारो इष्टदेव मे से सिर्फ श्रीराम जी ,श्रीकृष्ण जी पर ही चर्चा कर पायेंगे। एक परमात्मा का सृष्टि रचियता का अभी हिन्दूओं मे कोई स...

मेरे भगवान

sat sahib aal friend

भगवान रामपाल जी ही भगवान क्यों है 🙏🙏

 भगवान रामपाल जी ही भगवान क्यों है 🙏🙏🙏 किसी भी लेख को लिखने के बाद हम भगवान रामपाल जी की जय लिखते है क्योंकि हमने जो भी लिखा प्रभु रामपाल जी की दया से ही लिखा हमने लेख मे क्या लिखा इसकी चर्चा नही की जाती अपितु रामपाल जी को भगवान लिखा इस पर आक्षेप किये जाते है। रामपाल जी ही भगवान है जिसको यह समझना है वह भगवान रामपाल जी का सत्संग सुने और उनके द्वारा रचे गये ग्रन्थों का अध्ययन करे। हमारे शिक्षित कानून को जानने वाले वकील अदालत मे न्यायाधीश को My Lord कह कर सम्बोधित करते है जिसका अर्थ मेरे प्रभु होता है जबकि न्यायाधीश भगवान नही होता एक इन्सान होता है पर किसी की औकात नही कि वकीलों के My Lord कहने की समीक्षा कर सके क्योंकि वहाँ हम डर के शिकार है। पति को परमेश्वर मानने वाली बहनो और माताओ की हमारे देश मे कमी नही है पर सब जानते है कि पति और परमेश्वर दोनो मे बहुत भेद है परन्तु इस पर कोई आपत्ति नही होती मातपिता को भगवान की भांति पूजने वाले श्रवण जैसे पुत्र और पुत्रियों की भी आज कमी नही है ऐसा करने वालो को भी समाज मे सम्मान की दृष्टि से ही देखा जाता है। जबकि सब जानते है मातपिता भगवा...

बधाई एक पाखण्ड

 नया साल नया दिन बधाइयां एक पाखंड हर उस काम को जिसका दिखावा बहुत हो और उसके करने से लाभ की अपेक्षा नुकसान हो उसे पाखंड कहते है। नया साल पढे लिखे लोगो द्वारा किया जाने वाला महा पांखड है। ये जो अक्षर ज्ञान युक्त भाई बहन है इन्हे स्वयं का आत्म निरीक्षण करने का समय ही नही मिलता ये लोग हमेशा दुसरो की ही समीक्षा करते रहते हैआज हम इनसे इस नये साल के पाखंड के बारे मे जानना चाहेगे। दरअसल कुछ लोग इस ओर ध्यान ना देकर एक प्रवाह मे बहते हुये इसका अनुसरण करते रहते है। यह जिम्मेदारी के साथ निभाया जाने वाला एक पाखंड है यदि आप गलती से किसी को आज शुभकामनाएं नही दे पाये तो वह आपसे नाराज भी हो सकता है।  इन्ही फालतू बातो की वजह से ही हम whatsapp नाम की सुविधा प्रयोग नही कर पाते क्योंकि सारा दिन प्रातःकाल से रात्रि तक यही पाखंड पोषित होता रहता है।  जब तक good morning का पाखंड खत्म होगा तब तक good night का ढोग शुरु हो जायेगा और आज तो नये साल की शुभकामनाओ का तांता लगा है। अरे भाईयो जी लेने दो यारो। हमारी प्रातः सांय हमारे कर्माधार पर सुखी दुखी होती है और हमारे कर्म भगवान ने ठीक करवा ...