न्यूनतम समर्थन मुल्य और अधिकतम खुदरा मुल्य (M.S.P और M.R.P) के बीच पीसता हुआ किसान न्यूनतम समर्थन मुल्य किसानो की फसल का सरकार द्वारा दिया जाने वाला मुल्य है इसका मतलब है कम से कम मुल्य इसको साधारण भाषा मे कहे तो यह किसानो के आर्थिक जीवन पर सरकार की लगाम है जो दिखावा करती है कि सरकार किसानो की फसल खरीदने के लिये कटिबद्ध है लेकिन यह सब ढोंग है क्योंकि यह जमाखोरों को दिया जाने वाला अप्रत्यक्ष संरक्षण है ये जमाखोर किसान की फसल को खरीदते ही उसकी कीमत जनता के लिये दस गुना बढा देते है और सरकार कम उत्पादन की दुहाई देकर भ्रमित करती है यदि उत्पादन कम था तो किसान से न्यूनतम समर्थन मुल्य पर क्यो खरीदा गया कुदरती तौर पर किसानो की फसल खरीदने के लिये प्रत्येक मानव ही मजबूर है क्योकि किसान का अन्न सबकी दैहिक आवश्यकता है यानि चाहे अनचाहे सबको यह खरीदना ही पडेगा लेकिन सरकार मे बैठे बाघड घुसखोर बिल्ले जमाखोरों के साथ मिल कर किसान के फसल की बिक्री के समय जानबूझकर भाव और ग्राहकी कम कर देते तब गरीब किसान विचलित हो उठता फिर उन्ही चोर सरकारी खरीद के नाम पर न्यूनतम मुल्य के नाम पर किसान की लूट भी की और...
इस ब्लॉग साइट पर आप अपने धार्मिक प्रश्नों के उत्तर विस्तार पूर्वक देख वह पढ़ सकते हैं