भगवान रामपाल जी ही भगवान क्यों है 🙏🙏🙏
किसी भी लेख को लिखने के बाद हम भगवान रामपाल जी की जय लिखते है क्योंकि हमने जो भी लिखा प्रभु रामपाल जी की दया से ही लिखा हमने लेख मे क्या लिखा इसकी चर्चा नही की जाती अपितु रामपाल जी को भगवान लिखा इस पर आक्षेप किये जाते है। रामपाल जी ही भगवान है जिसको यह समझना है वह भगवान रामपाल जी का सत्संग सुने और उनके द्वारा रचे गये ग्रन्थों का अध्ययन करे।
हमारे शिक्षित कानून को जानने वाले वकील अदालत मे न्यायाधीश को My Lord कह कर सम्बोधित करते है जिसका अर्थ मेरे प्रभु होता है जबकि न्यायाधीश भगवान नही होता एक इन्सान होता है पर किसी की औकात नही कि वकीलों के My Lord कहने की समीक्षा कर सके क्योंकि वहाँ हम डर के शिकार है।
पति को परमेश्वर मानने वाली बहनो और माताओ की हमारे देश मे कमी नही है पर सब जानते है कि पति और परमेश्वर दोनो मे बहुत भेद है परन्तु इस पर कोई आपत्ति नही होती मातपिता को भगवान की भांति पूजने वाले श्रवण जैसे पुत्र और पुत्रियों की भी आज कमी नही है ऐसा करने वालो को भी समाज मे सम्मान की दृष्टि से ही देखा जाता है। जबकि सब जानते है मातपिता भगवान नही होते वे स्वयं भी किसी अन्य भगवान की पूजा करते और अपने बच्चों की कुशलता के लिये किसी ओर की शरण मे है। हमने मातपिता पति को भगवान मानने वालो पर कोई आक्षेप नही किया क्योकि इससे हमारी प्रतिष्ठा पर आंच आ जाती। हम यहां मान बडाई के शिकार है।
आप सब सोचेगें कि ऐसे ही जो भगवान नही थे उनको भगवान कहा गया जैसे ओशो को मानने वालो ने ओशो को भगवान कहा बौद्व को मानने वालो ने भगवान बुद्व कहा ,भगवान महावीर, भगवान बाल्मीकि, भगवान दत्तात्रेय, भगवान राम भगवान कृष्ण, साई बाबा आदि को भी भगवान साबित करने का प्रयास किया जाता है।हमे सब स्वीकार थे। यहां हमने आपत्ति नही की क्योंकि यहां हम अन्धश्रद्धा के शिकार थे
लेकिन आपत्ति केवल भगवान रामपाल जी पर ही करने की धृष्टता की जाती है क्योंकि ये असली भगवान है और काल भगवान की चपेट मे हमारी बुद्धि है।
ये सत कबीर ही है कबीर जी ने स्वयं फरमाया है कि
12वें वंश मे हम ही चल आवै
सब पंथ मेट कर एक ही पंथ चलावै
जब आवैगा पचपन सौ पांचा
तब हमारा वचन होगा सांचा
पचपंन सौ पांच यानि 1997 मे रामपाल जी महाराज को कबीर परमात्मा मार्च की एक तारीख को प्रातः 10 बजे मिले उसके बाद से कबीर जी सशरीर यंहा है रामपाल जी महाराज सतलोक प्रवान कर गये। यदि किसी का वचन सत्य है तो कबीर परमात्मा के वचन ही सत्य है।
इसी कडी मे साहिब गरीबदासजी ने फरमाया कि
दिल्ली मण्डल पाप की भूमा
धरती नाल जगाऊ सूमा
सतगुरू दिल्ली मण्डल आयसी सूती धरणी सूम जगायसी
तो फिर सतगुरू यानि कबीर परमात्मा आ गये
जैसे सहारणपुर मे गरीबदासजी के नाम और रुप के साथ प्रकट होकर कबीर परमात्मा भक्तो के कल्याणार्थ पैतीस साल रहे थे।
ऐसे ही आज रामपाल जी महाराज के नाम से कबीर परमात्मा हमारे बीच मे है। हमारा काम आप सबको सूचित करना है आपको मनाना हमारा काम नही है तप्तशिला पर जब काल भून कर खायेगा तब सब याद आ जाएगा यहाँ जितना चाहो हमे गालियां दो पागल बताओ हमे कोई फर्क नही पडता लेकिन यदि आप यह सब नही समझ पाये तो आप का मानव जन्म नष्ट हो जायेगा
बुद्वि लगाओ भगवान का सत्संग सुनो और पहचान लो सौ परीक्षण किजिये सौ का सौ यह कबीर हर प्रकार की कसौटी से महान और उच्चतम शक्ति और अत्यंत दयालु और श्रेष्ठतम ईश्वर अर्थात परमेश्वर है हमारा काम आप सबको सूचित करना था सो भगवान रामपाल की कृपा से हमने तो कर दिया अब आप जी की मर्जी वाद विवाद करो या स्वीकार करो🙏🙏🙏🙏🙏🙏
भगवान रामपाल जी की जय हो जय हो जय हो
किसी भी लेख को लिखने के बाद हम भगवान रामपाल जी की जय लिखते है क्योंकि हमने जो भी लिखा प्रभु रामपाल जी की दया से ही लिखा हमने लेख मे क्या लिखा इसकी चर्चा नही की जाती अपितु रामपाल जी को भगवान लिखा इस पर आक्षेप किये जाते है। रामपाल जी ही भगवान है जिसको यह समझना है वह भगवान रामपाल जी का सत्संग सुने और उनके द्वारा रचे गये ग्रन्थों का अध्ययन करे।
हमारे शिक्षित कानून को जानने वाले वकील अदालत मे न्यायाधीश को My Lord कह कर सम्बोधित करते है जिसका अर्थ मेरे प्रभु होता है जबकि न्यायाधीश भगवान नही होता एक इन्सान होता है पर किसी की औकात नही कि वकीलों के My Lord कहने की समीक्षा कर सके क्योंकि वहाँ हम डर के शिकार है।
पति को परमेश्वर मानने वाली बहनो और माताओ की हमारे देश मे कमी नही है पर सब जानते है कि पति और परमेश्वर दोनो मे बहुत भेद है परन्तु इस पर कोई आपत्ति नही होती मातपिता को भगवान की भांति पूजने वाले श्रवण जैसे पुत्र और पुत्रियों की भी आज कमी नही है ऐसा करने वालो को भी समाज मे सम्मान की दृष्टि से ही देखा जाता है। जबकि सब जानते है मातपिता भगवान नही होते वे स्वयं भी किसी अन्य भगवान की पूजा करते और अपने बच्चों की कुशलता के लिये किसी ओर की शरण मे है। हमने मातपिता पति को भगवान मानने वालो पर कोई आक्षेप नही किया क्योकि इससे हमारी प्रतिष्ठा पर आंच आ जाती। हम यहां मान बडाई के शिकार है।
आप सब सोचेगें कि ऐसे ही जो भगवान नही थे उनको भगवान कहा गया जैसे ओशो को मानने वालो ने ओशो को भगवान कहा बौद्व को मानने वालो ने भगवान बुद्व कहा ,भगवान महावीर, भगवान बाल्मीकि, भगवान दत्तात्रेय, भगवान राम भगवान कृष्ण, साई बाबा आदि को भी भगवान साबित करने का प्रयास किया जाता है।हमे सब स्वीकार थे। यहां हमने आपत्ति नही की क्योंकि यहां हम अन्धश्रद्धा के शिकार थे
लेकिन आपत्ति केवल भगवान रामपाल जी पर ही करने की धृष्टता की जाती है क्योंकि ये असली भगवान है और काल भगवान की चपेट मे हमारी बुद्धि है।
ये सत कबीर ही है कबीर जी ने स्वयं फरमाया है कि
12वें वंश मे हम ही चल आवै
सब पंथ मेट कर एक ही पंथ चलावै
जब आवैगा पचपन सौ पांचा
तब हमारा वचन होगा सांचा
पचपंन सौ पांच यानि 1997 मे रामपाल जी महाराज को कबीर परमात्मा मार्च की एक तारीख को प्रातः 10 बजे मिले उसके बाद से कबीर जी सशरीर यंहा है रामपाल जी महाराज सतलोक प्रवान कर गये। यदि किसी का वचन सत्य है तो कबीर परमात्मा के वचन ही सत्य है।
इसी कडी मे साहिब गरीबदासजी ने फरमाया कि
दिल्ली मण्डल पाप की भूमा
धरती नाल जगाऊ सूमा
सतगुरू दिल्ली मण्डल आयसी सूती धरणी सूम जगायसी
तो फिर सतगुरू यानि कबीर परमात्मा आ गये
जैसे सहारणपुर मे गरीबदासजी के नाम और रुप के साथ प्रकट होकर कबीर परमात्मा भक्तो के कल्याणार्थ पैतीस साल रहे थे।
ऐसे ही आज रामपाल जी महाराज के नाम से कबीर परमात्मा हमारे बीच मे है। हमारा काम आप सबको सूचित करना है आपको मनाना हमारा काम नही है तप्तशिला पर जब काल भून कर खायेगा तब सब याद आ जाएगा यहाँ जितना चाहो हमे गालियां दो पागल बताओ हमे कोई फर्क नही पडता लेकिन यदि आप यह सब नही समझ पाये तो आप का मानव जन्म नष्ट हो जायेगा
बुद्वि लगाओ भगवान का सत्संग सुनो और पहचान लो सौ परीक्षण किजिये सौ का सौ यह कबीर हर प्रकार की कसौटी से महान और उच्चतम शक्ति और अत्यंत दयालु और श्रेष्ठतम ईश्वर अर्थात परमेश्वर है हमारा काम आप सबको सूचित करना था सो भगवान रामपाल की कृपा से हमने तो कर दिया अब आप जी की मर्जी वाद विवाद करो या स्वीकार करो🙏🙏🙏🙏🙏🙏
भगवान रामपाल जी की जय हो जय हो जय हो


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