कबीर ज्ञान प्रकाश और अंधविश्वास का अन्धेरा।
आज हम बुद्विमता विद्ववता का ढिढोरा पीटते नही थकते आज स्वयं की बौद्विक विकास की पराकाष्ठा का गुमान करते है लेकिन सत्य इसके विपरीत है हम अत्यंत रुढिवादी और विक्षिप्त मानसिकता के शिकार होकर अन्धविश्वासी हो चुके है हमारे बौद्धिक चक्षु दृष्टि हीन हो चुके है क्योकि छः सौ साल पहले कबीर परमात्मा जिन वाणियो को साधारण जन भाषा मे कह कर गये थे आज तक हम उन्हे ही नही समझ पाये है छः सौ साल पहले झूठी और नकली आस्था पर जो कबीरज्ञान का प्रहार हुआ था आज उससे भी अधिक झूठी आस्था के बोझ तले हम दबे है हम आज तक रति भर भी लाभ उस अमरवाणी का नही ले पाये है जो कबीर परमात्मा ने स्वयं फरमाई और अपनी प्यारी आत्माओं के मुखकमल से उनका प्रचार करवाया था।
कबीर जी सबको सहर्ष स्वीकार्य है उनकी वाणी प्रत्येक जन साधारण को याद है लेकिन जो कबीर जी ने हमारे लिये अवैध किया हम ने उसे ही करने के लिये प्राण झोंक दिये मसलन जातिवाद, कबीर जी ने हमे बहुत समझाया है कि हम सब की जाति मानव है लेकिन हम आज भी सवर्ण बनने का अन्य को असवर्ण बताने का पाप कर रहे है। कबीर जी ने दोनो धर्मों के (हिन्दू मुस्लिम) के धर्मगुरुओं को बहुत धिक्कारा दोनो की रीति रिवाजों को ढकोसला बताया लेकिन हम आज भी थोथली आस्थाओं और नकली रीतिरिवाजो के रथ पर सवार होकर अयोध्या और सबरीमाला के लिये मानवता का वध करने को तत्पर है। हिन्दूओं की पत्थर पूजा और मुसलमानों की मस्जिद पर चढ कर चिल्लाने को,बिस्मिल को कबीर परमात्मा ने व्यर्थ बताया था लेकिन हम कबीर जी को भी सही बताते रहेगे और वही झूठी शास्त्रविरुद्व उपासना करते रहेगें। हम वो है जो यह वाणी गुनगुनाते हुये मन्दिरों मे जाते है पत्थर पूजे हरि मिलै तो मै पूजू पहाड़
शर्म आती है हमे अपनी बुदिहीनता पर!!! जिस शराब के पीने से इन्सान कुत्ते की योनि पाता है उस शराब के ठेके हमारी वोटो से चुनी सरकार खुलवाती है धिक्कार है हमारी मूढता पर
कबीर जी ने हमे सहज योग दिया काम करते करते भक्ति करने का विधान दिया लेकिन हमने चार धाम अडसठ तीर्थ बनाये रखे और कष्ट पाते रहे धक्के भी खाते रहे कबीरसाहिब ने हमे गुरु की पहचान और उसके काम का बखान किया गुरुकी महत्वत्ता पर अत्यधिक बल दिया लेकिन हम आज भी सच्चे गुरु की पहचान और अनिवार्यता से मुहं फेरे बैठे है कबीर जी ने हजारो वाणियो मे नकली गुरु से बचाव करने का प्रयत्न किया लेकिन हम ढीठ नकली गुरुओ की शरण पडते पडते आज नास्तिक प्राय हो चुके है जिसकी सर्वसत्ता है उस कबीर जी को ही आज हम दुष्ट मानसिकता के चलते वही सत्ताहीन दर्शाने मे कोई कोर कसर नही छोडते आज सब नकली धर्मगुरुओ का एक ही कुत्सित प्रयास है कि मानव कबीर परमात्मा को पहचान कर स्वयं को सुखी ना कर ले जिसके चलते भगवान रामपाल जी महाराज जेल यात्रा पर है यह सृष्टि के सबसे काले दिनो मे गिने जायेगे जिस समय हम सब समझदारी के छदम वेश को धारण किये महापाप के भागी हो रहे है।
जय हो जय हो भगवान रामपाल जी महाराज की जय हो🙏🙏🙏
आज हम बुद्विमता विद्ववता का ढिढोरा पीटते नही थकते आज स्वयं की बौद्विक विकास की पराकाष्ठा का गुमान करते है लेकिन सत्य इसके विपरीत है हम अत्यंत रुढिवादी और विक्षिप्त मानसिकता के शिकार होकर अन्धविश्वासी हो चुके है हमारे बौद्धिक चक्षु दृष्टि हीन हो चुके है क्योकि छः सौ साल पहले कबीर परमात्मा जिन वाणियो को साधारण जन भाषा मे कह कर गये थे आज तक हम उन्हे ही नही समझ पाये है छः सौ साल पहले झूठी और नकली आस्था पर जो कबीरज्ञान का प्रहार हुआ था आज उससे भी अधिक झूठी आस्था के बोझ तले हम दबे है हम आज तक रति भर भी लाभ उस अमरवाणी का नही ले पाये है जो कबीर परमात्मा ने स्वयं फरमाई और अपनी प्यारी आत्माओं के मुखकमल से उनका प्रचार करवाया था।
कबीर जी सबको सहर्ष स्वीकार्य है उनकी वाणी प्रत्येक जन साधारण को याद है लेकिन जो कबीर जी ने हमारे लिये अवैध किया हम ने उसे ही करने के लिये प्राण झोंक दिये मसलन जातिवाद, कबीर जी ने हमे बहुत समझाया है कि हम सब की जाति मानव है लेकिन हम आज भी सवर्ण बनने का अन्य को असवर्ण बताने का पाप कर रहे है। कबीर जी ने दोनो धर्मों के (हिन्दू मुस्लिम) के धर्मगुरुओं को बहुत धिक्कारा दोनो की रीति रिवाजों को ढकोसला बताया लेकिन हम आज भी थोथली आस्थाओं और नकली रीतिरिवाजो के रथ पर सवार होकर अयोध्या और सबरीमाला के लिये मानवता का वध करने को तत्पर है। हिन्दूओं की पत्थर पूजा और मुसलमानों की मस्जिद पर चढ कर चिल्लाने को,बिस्मिल को कबीर परमात्मा ने व्यर्थ बताया था लेकिन हम कबीर जी को भी सही बताते रहेगे और वही झूठी शास्त्रविरुद्व उपासना करते रहेगें। हम वो है जो यह वाणी गुनगुनाते हुये मन्दिरों मे जाते है पत्थर पूजे हरि मिलै तो मै पूजू पहाड़
शर्म आती है हमे अपनी बुदिहीनता पर!!! जिस शराब के पीने से इन्सान कुत्ते की योनि पाता है उस शराब के ठेके हमारी वोटो से चुनी सरकार खुलवाती है धिक्कार है हमारी मूढता पर
कबीर जी ने हमे सहज योग दिया काम करते करते भक्ति करने का विधान दिया लेकिन हमने चार धाम अडसठ तीर्थ बनाये रखे और कष्ट पाते रहे धक्के भी खाते रहे कबीरसाहिब ने हमे गुरु की पहचान और उसके काम का बखान किया गुरुकी महत्वत्ता पर अत्यधिक बल दिया लेकिन हम आज भी सच्चे गुरु की पहचान और अनिवार्यता से मुहं फेरे बैठे है कबीर जी ने हजारो वाणियो मे नकली गुरु से बचाव करने का प्रयत्न किया लेकिन हम ढीठ नकली गुरुओ की शरण पडते पडते आज नास्तिक प्राय हो चुके है जिसकी सर्वसत्ता है उस कबीर जी को ही आज हम दुष्ट मानसिकता के चलते वही सत्ताहीन दर्शाने मे कोई कोर कसर नही छोडते आज सब नकली धर्मगुरुओ का एक ही कुत्सित प्रयास है कि मानव कबीर परमात्मा को पहचान कर स्वयं को सुखी ना कर ले जिसके चलते भगवान रामपाल जी महाराज जेल यात्रा पर है यह सृष्टि के सबसे काले दिनो मे गिने जायेगे जिस समय हम सब समझदारी के छदम वेश को धारण किये महापाप के भागी हो रहे है।
जय हो जय हो भगवान रामपाल जी महाराज की जय हो🙏🙏🙏

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