सोई गुरु पूरा कहावै दो अखर का भेद बतावै
एक छूडावै एक लखावै तो प्राणी निज घर को जावै।
नामा छीपा औम तारी पाछै सोहम् शब्द विचारी
सार शब्द पाया जद लोई आवागमन बहुर ना होई।
सब कुछ कबीर जी का है अधिकारी है तो केवल एक कबीर🙏🙏🙏
कबीर जी के ये अखिल ब्रह्मांड कबीर साहिब सब के पिता सभी ने कबीर जी से बोलना सीखा सभी ने कबीरजी की कृपा से मानव जीवन सदभक्ति सब कुछ कबीर जी से पाया चाहे दादू साहिब हो चाहे नानक साहिब चाहे घीसा साहिब हो या गरीबदास साहिब सब स्वयं कबीर कबीर कबीर ही करते रहे और संसार को कबीर कबीर ही सीखा कर चले गये।
लेकिन हम दो कौडी के कतृध्नी जीव अब इन सन्तो की वाणी पर किसकी छाप लगी है इस पर भी झगडा खड़ा किये है जो भी सन्त महाराज हुये उन्होंने सिर्फ यही कहा जो कुछ है वो कबीरजी ही है और कोई कुछ नही लेकिन हम उस मूलज्ञान को भूला कर कबीरजी के प्यारे सन्तो का बंटवारा करने पर अड़े है परमात्मा कबीरजी है वह सशरीर आता है हमे उसकी पूजा करनी चाहिए इस बात को केवल गुरुजी महाराज रामपाल जी साहिब जी ने परिचित करवाया अन्य सभी कबीर जी को सन्त की उपाधि दिये बैठे थे।
आज जब महाराज रामपाल जी ने अनमोल कबीर ज्ञान का पिटारा खोल दिया है तो हर कोई वैद्य बन कर अपना झोला उठा कर वाणी सुना कर ढोंग कर रहा है कोई कहता है कि यह वाणी मदन साहिब की है कोई कहता है नही है क्या कभी उन परमात्मा की प्रिय आत्माओ ने स्वयं को कभी कबीर साहिब के समकक्ष खडा किया था यदि नही तो हम दो कौड़ी के जीव उन महान आत्माओ के नाम पर अपनी स्वार्थ सिद्वी क्यो कर रहे है।
ये मदन साहिब कौन है ये साहिब है तो कैसे है इनसे परमात्मा कब मिले परमात्मा से मिले भी थे या नही इसकी जानकारी किसी को नही लेकिन वाणी पर राजनीति जोरो पर है अकसर परमात्मा कबीर जी की वाणी पर किसी अन्य सन्त की छाप लग भी गयी तो उससे क्या कयामत आ गयी हमारा उद्देश्य कबीरज्ञान को समझने से ही होना चाहिए जैसे आदरणीय नित्यानंद जी महाराज की एक शब्द पर छाप है जबकि वो शब्द मूलतः कबीर परमात्मा का है ऐसे ही अनेक शब्द जो मूलतः है तो परमात्मा के लेकिन उन पर अन्य परमात्मा प्रेमियों की छाप लग जाती है। यदि लोकव्यवहार मे छाप लग भी गयी तो कोई बात नही विषय तो मूलज्ञान से होना चाहिए
गुरुजी साहिब महाराज रामपाल जी जो एकमात्र ज्ञानी महामानव है उन्होंने नीर खीर को बिल्कुल स्पष्ट रुप से छान कर या यह कहे कि नौ मण सूत को सुलझा कर हमे दे दिया है यदि अब कोई अपनी कुत्सित मानसिकता के चलते इसे उलझाने का प्रयत्न भी करेगा तो मानव नही अपितु अन्धा गधा होगा जो केवल और केवल अपना जीवन नाश करेगा। हमे ऐसे मूर्ख से ना कोई हमदर्दी है और ना कोई द्वेष परमात्मा का निश्चित समय आया है अब जो बहेगा वो चौरासी मे जायेगा जो गुरुजी साहिब से लिपटा रहेगा वो सतलोक जायेगा अब इच्छा आप सबकी और चुनाव आप सबका 🙏🙏
गुरुजी साहिब का गला भी दर्द कर उठता था जब आप सबको उस परमात्मा से लज्जा नही तो हम तो दो कौडी के जीव है हमारी क्या बिसात की आप बह जाना चाहे और हम रोक सके पर यह सच है कि ऐसा ज्ञान और ऐसा भगवान कही नही है। काशी की चूक के कारण आज तक भुगत रहे है अब चुके तो सब बरबाद हो जायेगा
कुत्ते है गुरुदेव के रोते रोते आप सब से यह विनती करते है
ये सौदा फिर नाही सन्तो ये सौदा फिर नाही
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 🙏🙏🙏

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