स्वार्थी ब्राह्मणो ने हमारे देश को गन्दगी का ढेर बना दिया जिस वर्ण का सबसे ज्यादा सम्मान किया जाना चाहिये था उसी को हमने शुद्र कह कर दुत्कार दिया। सबसे पवित्र कार्य साफ सफाई को माना जाता है लेकिन ब्राह्मणो के बहकावे मे आकर हमने उस श्रेष्ठ कार्य को ही निकृष्ट मान लिया जिसके कारण सारी सामाजिक व्यवस्था ही चरमरा गयी।
स्वार्थी ब्राह्मणो को गीता और वेद ज्ञान स्वयं ही नही था और ऐसे नियम बना दिये कि अक्षर ज्ञान ही नही होने दिया इनके इस षडयन्त्र के कारण हमारे पुर्वज अनपढ रह गये ताकि ये उन्हे शास्त्रो के नाम पर लूट सके। इसलिये आज अगर हम वैज्ञानिक आधार पर देखे तो नयी खोज करने मे भारत का योगदान न्यून है।
अगर इन्होने समाज को अक्षर ज्ञान दिया होता तो आज हम युरोप अमेरिका आदि देशो के प्रतियोगी होते। आज हमारे पास कृषि और औधोगिक मशीनरी होती पर हम शिक्षा बिना पीछे रह गये अब आप स्वयं निर्णय करो कि इनसे बडा देश का दुश्मन कौन हो सकता है।
इन्होने क्षत्रियो को भी अन्धविश्वास के नाम पर ठगा है इन्हे भगवान की कोई जानकारी नही थी बस उसके नाम पर दुकानदारी करते मनमुखी साधना पर राजा को आश्रित कर दिया और भ्रमित करते रहे कि अकाल से बचेगे ब्राह्मण को दान करो दुश्मन को हरा दोगे ब्राह्मण की पूजा करो और पाखंडियो ने देश गुलाम करवा दिया। संत रामपाल जी महाराज की जय
स्वार्थी ब्राह्मणो को गीता और वेद ज्ञान स्वयं ही नही था और ऐसे नियम बना दिये कि अक्षर ज्ञान ही नही होने दिया इनके इस षडयन्त्र के कारण हमारे पुर्वज अनपढ रह गये ताकि ये उन्हे शास्त्रो के नाम पर लूट सके। इसलिये आज अगर हम वैज्ञानिक आधार पर देखे तो नयी खोज करने मे भारत का योगदान न्यून है।
अगर इन्होने समाज को अक्षर ज्ञान दिया होता तो आज हम युरोप अमेरिका आदि देशो के प्रतियोगी होते। आज हमारे पास कृषि और औधोगिक मशीनरी होती पर हम शिक्षा बिना पीछे रह गये अब आप स्वयं निर्णय करो कि इनसे बडा देश का दुश्मन कौन हो सकता है।
इन्होने क्षत्रियो को भी अन्धविश्वास के नाम पर ठगा है इन्हे भगवान की कोई जानकारी नही थी बस उसके नाम पर दुकानदारी करते मनमुखी साधना पर राजा को आश्रित कर दिया और भ्रमित करते रहे कि अकाल से बचेगे ब्राह्मण को दान करो दुश्मन को हरा दोगे ब्राह्मण की पूजा करो और पाखंडियो ने देश गुलाम करवा दिया। संत रामपाल जी महाराज की जय

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