हिन्दू हिन्दू और हिन्दू
यह एक विद्वानों की विचारधारा थी ऐसा हमारे पूर्वज कहते आये है क्योंकि हमारा जन्म भी इसी विचारधारा को मानने वाले लोगो के बीच हुआ है अतः इस धर्म के बारे मे हमारी जानकारी निश्चित तौर पर सही होगी इस धर्म मे जिसमे से आज विद्ववता विलुप्तप्राय हो चुकी है। उसका कारण इस धर्म के ठेकेदार जिसमे ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य वर्ग आते है इन तीनो वर्गो ने निजी हितो को साधने के लिये इस धर्म का बेजा इस्तेमाल किया जिसके कारण आज इस धर्म मे इतनी भ्रांतियां और रुढिवादिता घर कर चुकी जिसका इस धर्म विशेष मे कदाचित कोई स्थान नही था। जिस धर्म के इष्ट हजारो बन जाये उस धर्म को एक परमात्मा की सत्ता समझने के लिये विशेष पुनरावलोकन की गहरी आवश्यकता है सांस्कृतिक रुप अति विलक्षण होने के उपरांत आज इसकी स्थिति शोचनीय है जिसकी जिम्मेदारी इसका दोहन करने वाले तीनो वर्णों को लेनी होगी जिसने सबसे उत्तम वर्ण को जो बहुजन था इससे दूर करने मे कोई कोर कसर नही छोडी। हम इस लेख मे हजारो इष्टदेव मे से सिर्फ श्रीराम जी ,श्रीकृष्ण जी पर ही चर्चा कर पायेंगे। एक परमात्मा का सृष्टि रचियता का अभी हिन्दूओं मे कोई स्थान नही है
श्रीराम जी इनका विवरण पवित्र पुस्तक रामायण मे कलमबद्ध है जिस कथा की जानकारी हर हिन्दू को है परन्तु श्रीराम को पूजने की विधि का रामायण से कोई सरोकार नही है आजकल एक राजनैतिक दल श्रीराम का ठेकेदार बना है जिसके कारिंदे इसकी नयी नयी पूजा विधि जनता मे बांटते रहते है जैसे कि लिखिये एक हजार बार श्रीराम तो भोली जनता facebook पर भी जय श्रीराम लिखना शुरु हो जाती है,कभी कभी सन्देश आता है कि यदि आपको मनोकामना पूर्ण करनी है तो लिखिये राम नाम और जनता राम नाम से पुस्तकें भर देती है इस राम का जन्म को रामनवमी कहा जाता है इनके मरण का दिन किसी को नही बताया गया इन्होनें जल समाधि ली थी।
श्रीराम जी पर सवाल उठाने और श्रीराम जी का आयोध्या मे मन्दिर बनाने दोनो पर पाबन्दी है भाजपा और भाजपा का पिता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के यहां श्रीराम जी का copyright प्रतीत होता है स्मरण रखे प्रतीत शब्द लिखा गया है यथार्थ से परे है।
आयोध्या मे जिस स्थान पर मन्दिर बनना है वहां एक मस्जिद थी उस मस्जिद को तोडने के किसी भी कोर्ट के आदेश की परवाह नही की गयी थी और 6 dec. 1992 को वह मस्जिद तोड दी गयी थी लेकिन उसके बाद से मस्जिद को तोडने वाले कानून पर भरोसा करते प्रतीत होने लगे और राममंदिर बनाने के लिये आजकल सुप्रीम कोर्ट की शरण मे है हमे तो यह समझ नही आया जब मस्जिद तोडी गया तो कानून की परवाह नही थी अब मन्दिर बनाना है तो कोर्ट बताएगा जैसे मस्जिद तोडी वैसे मन्दिर क्यो नही बन सकता अब हिन्दूशक्ति इस काम को पिछले 27 साल से क्यो नही कर रही है कोर्ट भी इस मामले का आनन्द क्यो और किस प्रकार ले रही है आपको समझ आये तो comments मे बता देना। अतः श्रीराम भारत मे मोक्ष प्राप्ति का साधन हो या ना हो परन्तु सत्ता प्राप्ति का उत्तम साधन है।
इसके बाद हुये श्रीकृष्ण जी इनकी मान्यता भी बहुत है इनका उल्लेख महाभारत नामक महाकाव्य मे है इन्हे योगीपुरुष भी माना जाता है इनकी पूजा भी विभिन्न प्रकार से की जाती है इन्हे लड्डू गोपाल भी कहा जाता है इनके बालरूप को झूला भी झूलाया जाता है। हम अपने ही इष्ट को झूला झूलाये अपने पुर्वज की मूर्ति के साथ ही एक बालक की भांति व्यवहार करे कोई अपने इस पुर्वज को पति माने कोई भगवान कोई पाबंदी नही है। इस पर आप कोई तर्क ना करे इससे आस्था जुडी है आस्था के विषय पर बुद्वि के प्रयोग का हमारे यहां सख्त प्रतिबन्ध है। आपको यह कभी नही सोचना है कि किस प्रकार की मूर्ति की आपको पूजा करनी है या कोई भी व्यक्ति यदि रामकृष्ण किसी का भी मेकअप करके आ जाये तो आपको उसके सामने हाथ जोड कर सिर झुकाना ही झूकाना है भले ही उस व्यक्ति के चरित्र का इन महापुरुषों के चरित्र से कोई लेनादेना ना हो।
T.V. पर यदि रामायण या कृष्ण लीला आती थी तो उस पर भी श्रद्धा सुमन अर्पित करते हम देखते थे खैर अब you tube का जमाना आ गया तो श्रद्धा सुमन कैसे अर्पित होते है यह आप बता देना। जय श्रीराम का बोलबाला है जय श्रीकृष्ण सुनने को नही मिलता क्यो मत पूछना आस्था पर प्रशन धार्मिकता को खतरा हो जाएगा। एक और विडंबना है हमारे हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को खतरा वहीं पर होता है जहां बहुसंख्यक होते है जहाँ अल्पसंख्यक है वहाँ धार्मिक भावनाएं सही रहती है आप फिर पूछना चाहते हो क्यो तो फिर से आस्था आप जब भी कुछ जानना चाहोगे कि क्यो हम कहेगें कि अपनी अपनी आस्था होती है। यह हिन्दू धर्म के प्रचार की सबसे नायाब विधि है जिसके कारण हिन्दू धर्म के महान ग्रन्थो की कोई भागीदारी करने का विकल्प ही नही रखा जाता हिन्दू ग्रन्थ सभी पूजनीय माने जाते है पढे भी अनवरत जाते है पर समझे नही जाते यदि कोई महापुरुष उन्हे समझाने का प्रयत्न करता है तो उसे देशद्रोह के तहत जेल मे डाल दिया जाता है।
अतः हिन्दू धर्म ग्रन्थो के विषय मे वार्ता करने की हिमाकत ना करे उन्हे पढे ओर सो जाये अन्यथा आप मुस्लिम देशो को कट्टरपंथी कहने लायक नही रहोगे जहां कुरान को केवल पढा ही जाता है समझने का विकल्प ही नही रखा जाता।
हिन्दुओं का महान पवित्र ग्रन्थ श्रीमद्भगवद्गीता जी और पवित्र वेद है जिनको शिरोधार्य माना जाता है लेकिन किसी भी हिन्दू की पूजापद्धति गीतानुसार या वेदानुकूल नही होगी इनका मानना है कि पढनी तो गीता जी जरूर चाहिए लेकिन माननी पडिंत जी की चाहिए अब पडिंत जी का स्थान श्रीमद्भगवद्गीता और वेदो से पहले क्यों है यह पूछने से फिर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुचेगी अतः आप शान्त रहे एक और भेद हम चुपके से बता दिये देते है कि राम कृष्ण की मूर्तिपूजा की जाये यह रामायण और महाभारत दोनो मे से किसी मे भी उल्लेखित नही है आप भी किसी को मत बताना क्योंकि 2019 के चुनाव है। हिन्दू गलत उपासना करे या सही इससे किसी को कोई सरोकार नही है पर सरकार अपने नरेन्द्र भाई मोदी जी की आनी चाहिए क्योंकि इसी से हिन्दू धर्म की रक्षा हो सकती है हिन्दू धर्म को खतरा भी बहुत है अपनो से है या अन्य से यह सोचना हिन्दूओं का काम नही है बस धर्मरक्षा जरूरी है धर्मरक्षा से पहले यह जानना भी जरुरी नही है कि हिन्दू धर्म क्या है ??
किसी भी विचारधारा की रक्षा भी तो तभी होगी जब उसकी उचित जानकारी होगी ज्ञान होगा लेकिन जानना नही है क्योंकि आस्था का प्रशन है और आस्था अपनी अपनी होती है तो यह भी मत पूछना कि फिर धर्मग्रंथ किस लिये है। अरे भाई वो सिर्फ पढने के लिये है नक्शा हाथ मे रखो चीन का और जा पहुचों ईरान इसी का नाम होता है आस्था आस्था और आस्था।
इन्ही धर्मग्रंथों को नही जानने से लाखो बहन और भाई सैकड़ों वर्ष पहले मुस्लिम धर्म को अपना कर भारत का कलेजा जिसकी आज एक अलग राष्ट्र की पहचान पाकिस्तान के रुप मे होती है वह ले चुके है इन्ही ग्रन्थों नही जानने से हिन्दू धर्मी भाई बहन भ्रमित होकर सांईबाबा के भक्त हो रहे जो सांईबाबा स्वयं हिन्दू धर्म से अनभिज्ञ थे इन्ही धर्मग्रंथों को नही जानने को लेकर भारत मे ईसाईयत का प्रचार प्रसार जोरो पर है इसी नही जानने को लेकर आज भी हिन्दुओं मे जात बिरादरी धर्म सम्प्रदाय पर घमासान है जिसके धर्मग्रंथों मे ऐसा अमृतज्ञान हो जिससे हमेशा विश्वकल्याण होता आया हो और आज उसी विचारधारा के लोग छोटी छोटी बातो पर सामाजिक सद्भावना भूला कर हिंसक होते हुये भीड के रुप मे मानवहत्या करते हो इससे दुर्भाग्यपूर्ण क्या हो सकता है पर होने दिजिए आप किसी विश्वकल्याण की कल्पना मत कीजिए बस 2019 के चुनाव की सोचिये यह उसी प्रकार से जिस प्रकार से किसी ऊंट पर किशमिश लदी हो और वह अनजान ऊंट कंटीली झाडियां खा रहा हो आप सब भी इन्हे कुछ ना कहे क्योंकि इनकी आस्था के साथ साथ चुनाव का भी प्रशन है एक बात हम कहे देते जो इनको हजम ही नही होती और ये सब चिन्ताएं छोडकर हमसे एक ही सवाल करते रहेगे और वह है
भगवान रामपाल जी महाराज की जय हो जय हो🙏🙏
यह एक विद्वानों की विचारधारा थी ऐसा हमारे पूर्वज कहते आये है क्योंकि हमारा जन्म भी इसी विचारधारा को मानने वाले लोगो के बीच हुआ है अतः इस धर्म के बारे मे हमारी जानकारी निश्चित तौर पर सही होगी इस धर्म मे जिसमे से आज विद्ववता विलुप्तप्राय हो चुकी है। उसका कारण इस धर्म के ठेकेदार जिसमे ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य वर्ग आते है इन तीनो वर्गो ने निजी हितो को साधने के लिये इस धर्म का बेजा इस्तेमाल किया जिसके कारण आज इस धर्म मे इतनी भ्रांतियां और रुढिवादिता घर कर चुकी जिसका इस धर्म विशेष मे कदाचित कोई स्थान नही था। जिस धर्म के इष्ट हजारो बन जाये उस धर्म को एक परमात्मा की सत्ता समझने के लिये विशेष पुनरावलोकन की गहरी आवश्यकता है सांस्कृतिक रुप अति विलक्षण होने के उपरांत आज इसकी स्थिति शोचनीय है जिसकी जिम्मेदारी इसका दोहन करने वाले तीनो वर्णों को लेनी होगी जिसने सबसे उत्तम वर्ण को जो बहुजन था इससे दूर करने मे कोई कोर कसर नही छोडी। हम इस लेख मे हजारो इष्टदेव मे से सिर्फ श्रीराम जी ,श्रीकृष्ण जी पर ही चर्चा कर पायेंगे। एक परमात्मा का सृष्टि रचियता का अभी हिन्दूओं मे कोई स्थान नही है
श्रीराम जी इनका विवरण पवित्र पुस्तक रामायण मे कलमबद्ध है जिस कथा की जानकारी हर हिन्दू को है परन्तु श्रीराम को पूजने की विधि का रामायण से कोई सरोकार नही है आजकल एक राजनैतिक दल श्रीराम का ठेकेदार बना है जिसके कारिंदे इसकी नयी नयी पूजा विधि जनता मे बांटते रहते है जैसे कि लिखिये एक हजार बार श्रीराम तो भोली जनता facebook पर भी जय श्रीराम लिखना शुरु हो जाती है,कभी कभी सन्देश आता है कि यदि आपको मनोकामना पूर्ण करनी है तो लिखिये राम नाम और जनता राम नाम से पुस्तकें भर देती है इस राम का जन्म को रामनवमी कहा जाता है इनके मरण का दिन किसी को नही बताया गया इन्होनें जल समाधि ली थी।
श्रीराम जी पर सवाल उठाने और श्रीराम जी का आयोध्या मे मन्दिर बनाने दोनो पर पाबन्दी है भाजपा और भाजपा का पिता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के यहां श्रीराम जी का copyright प्रतीत होता है स्मरण रखे प्रतीत शब्द लिखा गया है यथार्थ से परे है।
आयोध्या मे जिस स्थान पर मन्दिर बनना है वहां एक मस्जिद थी उस मस्जिद को तोडने के किसी भी कोर्ट के आदेश की परवाह नही की गयी थी और 6 dec. 1992 को वह मस्जिद तोड दी गयी थी लेकिन उसके बाद से मस्जिद को तोडने वाले कानून पर भरोसा करते प्रतीत होने लगे और राममंदिर बनाने के लिये आजकल सुप्रीम कोर्ट की शरण मे है हमे तो यह समझ नही आया जब मस्जिद तोडी गया तो कानून की परवाह नही थी अब मन्दिर बनाना है तो कोर्ट बताएगा जैसे मस्जिद तोडी वैसे मन्दिर क्यो नही बन सकता अब हिन्दूशक्ति इस काम को पिछले 27 साल से क्यो नही कर रही है कोर्ट भी इस मामले का आनन्द क्यो और किस प्रकार ले रही है आपको समझ आये तो comments मे बता देना। अतः श्रीराम भारत मे मोक्ष प्राप्ति का साधन हो या ना हो परन्तु सत्ता प्राप्ति का उत्तम साधन है।
इसके बाद हुये श्रीकृष्ण जी इनकी मान्यता भी बहुत है इनका उल्लेख महाभारत नामक महाकाव्य मे है इन्हे योगीपुरुष भी माना जाता है इनकी पूजा भी विभिन्न प्रकार से की जाती है इन्हे लड्डू गोपाल भी कहा जाता है इनके बालरूप को झूला भी झूलाया जाता है। हम अपने ही इष्ट को झूला झूलाये अपने पुर्वज की मूर्ति के साथ ही एक बालक की भांति व्यवहार करे कोई अपने इस पुर्वज को पति माने कोई भगवान कोई पाबंदी नही है। इस पर आप कोई तर्क ना करे इससे आस्था जुडी है आस्था के विषय पर बुद्वि के प्रयोग का हमारे यहां सख्त प्रतिबन्ध है। आपको यह कभी नही सोचना है कि किस प्रकार की मूर्ति की आपको पूजा करनी है या कोई भी व्यक्ति यदि रामकृष्ण किसी का भी मेकअप करके आ जाये तो आपको उसके सामने हाथ जोड कर सिर झुकाना ही झूकाना है भले ही उस व्यक्ति के चरित्र का इन महापुरुषों के चरित्र से कोई लेनादेना ना हो।
T.V. पर यदि रामायण या कृष्ण लीला आती थी तो उस पर भी श्रद्धा सुमन अर्पित करते हम देखते थे खैर अब you tube का जमाना आ गया तो श्रद्धा सुमन कैसे अर्पित होते है यह आप बता देना। जय श्रीराम का बोलबाला है जय श्रीकृष्ण सुनने को नही मिलता क्यो मत पूछना आस्था पर प्रशन धार्मिकता को खतरा हो जाएगा। एक और विडंबना है हमारे हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को खतरा वहीं पर होता है जहां बहुसंख्यक होते है जहाँ अल्पसंख्यक है वहाँ धार्मिक भावनाएं सही रहती है आप फिर पूछना चाहते हो क्यो तो फिर से आस्था आप जब भी कुछ जानना चाहोगे कि क्यो हम कहेगें कि अपनी अपनी आस्था होती है। यह हिन्दू धर्म के प्रचार की सबसे नायाब विधि है जिसके कारण हिन्दू धर्म के महान ग्रन्थो की कोई भागीदारी करने का विकल्प ही नही रखा जाता हिन्दू ग्रन्थ सभी पूजनीय माने जाते है पढे भी अनवरत जाते है पर समझे नही जाते यदि कोई महापुरुष उन्हे समझाने का प्रयत्न करता है तो उसे देशद्रोह के तहत जेल मे डाल दिया जाता है।
अतः हिन्दू धर्म ग्रन्थो के विषय मे वार्ता करने की हिमाकत ना करे उन्हे पढे ओर सो जाये अन्यथा आप मुस्लिम देशो को कट्टरपंथी कहने लायक नही रहोगे जहां कुरान को केवल पढा ही जाता है समझने का विकल्प ही नही रखा जाता।
हिन्दुओं का महान पवित्र ग्रन्थ श्रीमद्भगवद्गीता जी और पवित्र वेद है जिनको शिरोधार्य माना जाता है लेकिन किसी भी हिन्दू की पूजापद्धति गीतानुसार या वेदानुकूल नही होगी इनका मानना है कि पढनी तो गीता जी जरूर चाहिए लेकिन माननी पडिंत जी की चाहिए अब पडिंत जी का स्थान श्रीमद्भगवद्गीता और वेदो से पहले क्यों है यह पूछने से फिर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुचेगी अतः आप शान्त रहे एक और भेद हम चुपके से बता दिये देते है कि राम कृष्ण की मूर्तिपूजा की जाये यह रामायण और महाभारत दोनो मे से किसी मे भी उल्लेखित नही है आप भी किसी को मत बताना क्योंकि 2019 के चुनाव है। हिन्दू गलत उपासना करे या सही इससे किसी को कोई सरोकार नही है पर सरकार अपने नरेन्द्र भाई मोदी जी की आनी चाहिए क्योंकि इसी से हिन्दू धर्म की रक्षा हो सकती है हिन्दू धर्म को खतरा भी बहुत है अपनो से है या अन्य से यह सोचना हिन्दूओं का काम नही है बस धर्मरक्षा जरूरी है धर्मरक्षा से पहले यह जानना भी जरुरी नही है कि हिन्दू धर्म क्या है ??
किसी भी विचारधारा की रक्षा भी तो तभी होगी जब उसकी उचित जानकारी होगी ज्ञान होगा लेकिन जानना नही है क्योंकि आस्था का प्रशन है और आस्था अपनी अपनी होती है तो यह भी मत पूछना कि फिर धर्मग्रंथ किस लिये है। अरे भाई वो सिर्फ पढने के लिये है नक्शा हाथ मे रखो चीन का और जा पहुचों ईरान इसी का नाम होता है आस्था आस्था और आस्था।
इन्ही धर्मग्रंथों को नही जानने से लाखो बहन और भाई सैकड़ों वर्ष पहले मुस्लिम धर्म को अपना कर भारत का कलेजा जिसकी आज एक अलग राष्ट्र की पहचान पाकिस्तान के रुप मे होती है वह ले चुके है इन्ही ग्रन्थों नही जानने से हिन्दू धर्मी भाई बहन भ्रमित होकर सांईबाबा के भक्त हो रहे जो सांईबाबा स्वयं हिन्दू धर्म से अनभिज्ञ थे इन्ही धर्मग्रंथों को नही जानने को लेकर भारत मे ईसाईयत का प्रचार प्रसार जोरो पर है इसी नही जानने को लेकर आज भी हिन्दुओं मे जात बिरादरी धर्म सम्प्रदाय पर घमासान है जिसके धर्मग्रंथों मे ऐसा अमृतज्ञान हो जिससे हमेशा विश्वकल्याण होता आया हो और आज उसी विचारधारा के लोग छोटी छोटी बातो पर सामाजिक सद्भावना भूला कर हिंसक होते हुये भीड के रुप मे मानवहत्या करते हो इससे दुर्भाग्यपूर्ण क्या हो सकता है पर होने दिजिए आप किसी विश्वकल्याण की कल्पना मत कीजिए बस 2019 के चुनाव की सोचिये यह उसी प्रकार से जिस प्रकार से किसी ऊंट पर किशमिश लदी हो और वह अनजान ऊंट कंटीली झाडियां खा रहा हो आप सब भी इन्हे कुछ ना कहे क्योंकि इनकी आस्था के साथ साथ चुनाव का भी प्रशन है एक बात हम कहे देते जो इनको हजम ही नही होती और ये सब चिन्ताएं छोडकर हमसे एक ही सवाल करते रहेगे और वह है
भगवान रामपाल जी महाराज की जय हो जय हो🙏🙏

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