सब जगत साकार है परमात्मा भी साकार ही है
साकारता का नाम ही ब्रह्मंड है ब्रह्मांड की प्रत्येक वस्तु का परिमाप है सुर्य चन्द्र सब का व्यास और परिधि से हम परिचित है वायु भी निराकार नही होती वायुमंडल का भी परिमाप है कि भुमि से तीन सौ किलोमीटर का घेरा है वायु को भी दिशा,गति और शक्ति से माप लेते है।
हिन्दु निर्गुण और निराकार मे भेद ही नही कर पाते जबकि ये दोनो बिल्कुल अलग अलग शब्द है निर्गुण सगुण का विपरीतार्थक शब्द है सगुण यानि रज,तम,सत गुणो के सहित है जो व्यक्त है देखा जा सकता है निर्गुण तीनो गुणो से परे जो अव्यक्त है। सगुण जैसे आम का पेड
निर्गुण मतलब आम की गुठली मे आम का पेड।
निर्गुण निराकार नही होता दोनो मे शाब्दिक भेद भी है जिसका आकार ना हो निराकार कहा जाता है कोई भी अस्तित्व निराकार नही हो सकता भिन्न भिन्न आकार लेने वाले को या अचानक प्रकट होने वाले को भी निराकार नही कह सकते जैसे बादल पल पल मे आकार बदल लेते है पर है साकार। बहुत ज्यादा बडा है तो जिसको हम मापने मे अक्षम है तो वह भी बहुत ज्यादा साकार ही है बहुत छोटा है जिसे देख नही सकते तो भी साकार ही है।
मुस्लिम परमात्मा को नूर बताते है तख्त पर बैठा है पर दिखने मे नूर जैसा है उनकी अज्ञानता इसी बात से है जब तख्त भी है और बैठा भी है नूर ही नूर कैसे हो सकता है तख्त पर वो भी बैठना दोनो ही मानव सृदश साकार होने के लक्षण है है यह अलग बात है कि परमात्मा के नूरी शरीर का नूर ही नूर को देख पाये हो। प्रकाश की ज्योति का भी परिमाण हो सकता प्रकाश की गति भी मापी जाती है प्रकाश भी सीधी रेखा मे चलता है प्रकाश का भी एक दायरा है किसी भी वस्तु को निरा कार नही कह सकते बहुत से सुक्ष्म जीवाणु है जिन्हे हम देख नही पाते पर उन्हे निराकार तो नही कह सकते सुक्ष्म और स्थूल दोनो ही साकार है स्थूल शरीर मे कैद सुक्ष्म आत्मा शरीर और आत्मा दोनो ही साकारता के बोधक है।
सर्गुण रूप में भगवान रामपाल जी इस समय धरती पर लीला कर रहे है और निर्गुण रूप में भगवान कबीर सतलोक में तख्त पर विराजित है🙏🙏🙏🙏🙏
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जय हो भगवान रामपाल जी की जय हो।



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