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ब्राह्मणवाद द्वारा वैदिकता का हरण परिणाम कुम्भ Prayagraj PrayagrajKumbh

PRAYAGRAJ kumbhmala2019
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हम सत्य सनातन है वैदिक है यह कहते हुये कुम्भ के मेले मे करोडो हिन्दू डूबकी लगाने का ढोंग करेगे वेद मे कुम्भ को स्वीकृति कहां है? यह जांच लेना हिन्दशक्ति का कर्त्तव्य क्यो नही है यदि वेद मे कुम्भ आदि स्नान का जिक्र नही फिर भी हम इन सब को महत्व देते है तो हम स्वयं को सनातन और वैदिक कैसे कह सकते है।
वेद मे पाप काटने का पूरा विवरण है वेद कहते है कि परमात्मा पाप काट देता है लेकिन उसके लिये किसी स्थान विशेष पर जाकर स्नान करने की विधि कदाचित नही है। वैदिक का अपहरण ब्राह्मणवाद बहुत पहले कर चुका जिसके परिणाम स्वरूप इन स्नान और तीर्थो की व्यर्थं की बातो को महत्व दिया जाने लगा। एक बार विचार करे अमृत के कुम्भ पर देवताओं और राक्षसो का झगडे मे चन्द बून्द पृथ्वीलोक पर गिरी तो वह स्थान पाप नाशक कैसे हुआ उस अमृत का पान करनेवाले देवता भी मरते है उनकी भी देह छूटती है विचार करो परमेश्वर के बच्चो विचार करो उस पानी मे रहने वाले जीव लाखो कष्ट पाते है उनकी मुक्ति नही होती विचार करो और सत्य को पहचानो।
कबीर परमात्मा कहते है
"प्रभी लेन जात है दुनिया हमरा ज्ञान किन्हु ना सुनिया'

आज तथाकथित हिन्दू बनी भाजपा सरकार भी पुर्णतया ब्राह्माणवाद के चंगुल मे है जो इस प्रकार की वेदविरुद्ध साधनाओ को बढावा देने का पाप कर रही है। इन सब की वजह से हिन्दू विचलित है वह पुराण और वेद के मध्य भेद नही समझ पा रहा है वेद परमेश्वर का ज्ञान है और पुराण देवताओं का ज्ञान है देवता एक पद मात्र है परमेश्वर सब को धारण करने वाला है जिस प्रकार देवताओं के मध्य परमेश्वर को विलुप्त करने का ब्राह्मणवाद के इस षड्यंत्र के शिकार हिन्दू हो चुके है उस का परिणाम यह स्नान के लिये जुटी हुई भीड़ है| 👀
वैदिकता कभी भी किसी के आय का स्त्रोत नही हो सकती क्योकि वैदिकता इन्सान को पुर्णगुरु द्वारा ज्ञान देकर स्वतंत्र करने का परिचायक है जो हमारे पंडो को कभी स्वीकार्य नही हो सकता। ये ब्राह्मण वाद हमारी गुलामी का बोधक है।

पंडो ने चारो तरफ से आस्तिकता पर अपना प्रकोप फैला रखा है चाहे वो सन्यासी हो या गृहस्थी हर आस्तिक व्यक्ति को वैदिकता से विचलित कर हिन्दू बनाकर ब्राह्मणवाद का जोकर बना छोड दिया गया है। आम आदमी की बुद्वि इतनी विक्षिप्त कर दी गयी है कि वो राजा रामचन्द्र जी को ही सृष्टिकर्ता मान बैठा है। इस ब्राह्मणवाद के इतने बडे लश्कर है जिनका विरोध नामुमकिन सा प्रतीत होता है।
🗯
हम इस ब्राह्मण वाद का पुर्णतया विरोध करने मे ज्ञान आधार पर सक्षम है हम पौराणिक और वैदिकता मे भेद समझ चुके है इस भेद को समझाने के लिये पूज्यनीय परमेश्वर स्वयं चल कर आते रहते है लेकिन हम मूर्खता के रथ पर आरूढ बुद्विहीन प्राणी उस परमेश्वर का ही विरोध करते करते अपना अन मोल जीवन नाश कर देता है।

भगवान रामपाल जी महाराज की जय 👌
समझदार व्यक्ति पोस्ट को पढ़कर विचार करेगा और ज्ञान ही गाली देगा

Comments

जी बिल्कुल सही कहा आपने। वेदों में कहीं भी कुंभ स्नान का वर्णन नहीं है।

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