‘‘जगन्नाथ मंदिर की पूर्ण सत कथा कहानी जिस समय दुर्वासा ऋषि के शॉप से 56 करोड़ यादव आपस में लड़कर गए। कुछ शेष बचे थे, वे श्री कृष्ण जी ने मूसलों से मार डाले। बलभद्र (बलराम) शेष नाग का अवतार था। मृत्यु के पश्चात् सर्प रूप बनाकर यमुना नदी में प्रवेश कर गया। श्री कृष्ण जी वृक्ष के नीचे विश्राम करने के लिए लेट गए। एक बालीया नाम के भील शिकारी ने श्री कृष्ण के पैर में लगे पदम को हिरण की आँख जानकर वृक्ष की झुरमटों के अंदर से विषाक्त तीर मार दिया। जिस कारण श्री कृष्ण जी की मृत्यु हुई। मृत्यु से पहले श्री कृष्ण जी से उस शिकारी ने क्षमा याचना की तथा कहा हे राजन! मेरे से धोखे से तीर लग गया। मैंने जान-बूझकर नहीं मारा। श्री कृष्ण जी ने कहा कि यह तेरा और मेरा पिछले जन्म का बदला था, सो आपने पूरा कर लिया। आप त्रोतायुग में सुग्रीव के भाई बाली थे। उस समय मैं रामचन्द्र रूप में जन्मा था। मैंने आपको वृक्ष की ओट लेकर मारा था। आज आपने मुझे वृक्ष की ओट से ही मारा है। मैं कुछ समय का मेहमान हूँ। एक कार्य कर दे, मेरे रिश्तेदार पाण्डवों को संदेशा भेज दो कि यादव आपस में लड़कर मर रहे हैं, शीघ्र आओ। ज...