😵-हिसार_धाम - 😵
जेल :- शब्द अगर किसी मनुष्य के #चरित्र से जुड़ जाता है तो उसकी गरिमा पर सवाल उठने लगते है, और बदनामी का दाग लग ही जाता है!
किसी व्यक्ति के जेल जाने के बाद उसे घृणा या #संदेह कि निगाह से देखा जाना लाजमी है!
जेल जाने के भी विविध कारण हो सकते है और कभी-कभी उद्देश्य भी | व्यक्ति दुराचारी, भ्रष्टाचारी, दुष्कर्मी, चोर, हत्यारा, होकर भी “जेल” जाता है, और ऐसे व्यक्ति से घृणा करना या उसकी बेगुनाही पर संदेह करना स्वाभाविक है |
लेकिन जरुरी नही की जेल जाने वाला हर व्यक्ति कुकर्मी हो, कुछ लोग #परमार्थ और समाज सुधार के उद्देश्य को पुरा करने के लिए भी “जेल” जैसी प्रताड़नाये स्वीकार करते है | जहाँ एक तरफ चंद्र शेखर आजाद, भगत सिंह, जैसे देश-प्रेमी हंसते-हंसते फांसी चढ़ गये तो वही दुसरी तरफ महात्मा गांधी जैसे राष्ट्रपिता भी जेल भोगकर परमार्थ मे “जेल”जाने की मिशाल कायम कर गये|
श्री कृष्ण! जी का तो जन्म ही जेल मे हुआ था, फिर भी इंसान आज उन्हे धिक्कारने की बजाय पूजता है | ईसा मसीह ने “सत्य” कहा तो इसी जनता ने उन्हे शूली पर टांग दिया, और वर्तमान मे उन्हे गॉड कहकर संबोधित किया जाता है | एक विदेशी व्यक्ति “निकोलस” ने शोध मे पता लगाया की पृथ्वी घुमती है | इसी जनता ने निकोलस को झुठा बताकर उसे फांसी पर चढ़ा दिया, लेकिन कुछ समय पश्चात जब यह बात सच साबित हुई तो इतिहास के पन्नों पर आज भी निकोलस का नाम सुनहरे शब्दो मे दर्ज है |
#वास्तविकता तो यह है की जब कभी भी किसी #महान_पुरुष ने जनहित मे किसी रहस्यमयी सत्य को उजागर करके जन-मानस को सच का आइना दिखाना चाहा तो इसी जनता द्वारा ऐसे महापुरुषो को प्रताड़ित करके तिरष्कृत भी किया गया | ठीक इसी तरह संत रामपाल जी महाराज ने एक महान पुरुष की भूमिका निभाई है और समस्त जनसमुह को एक नई चेतना प्रदान करके एवं ज्ञान के गूढ़ रहस्य उजागर करके समाज को बहुमुल्य सत्ज्ञान प्रदान करने की कोशिश की है, लेकिन भोली जनता सहयोग करने के बजाय अलोचना करने लगी |
#संत_रामपाल_जी_महाराज का गुनाह सिर्फ इतना है की उन्होने जनहित मे अपना समुल अस्तित्व न्योछावर करके जनता की भलाई सोची |
उन्होने घर-परिवार से सक्षम होते हुए भी समाज को अपना संपुर्ण जीवन सौंप दिया, एवं समय अभाव के चलते इंजीनियर की नौकरी त्यागकर मनुष्य को दुखो के चंगुल से छुड़ाने एवं घर-घर तक सतभक्ति का संदेश पहुँचाने की ठान ली | यही सत-भक्ति अनादि काल से किसी भी ॠषी,मुनि, संत महंतो को समझ मे नही आई, और ना ही इस रहस्य को समझने या समझाने मे वह सक्षम रहे | जिसके परिणाम स्वरुप इन नकलियो की अज्ञानता की सच्चाई समाज के सामने आने लगी और बोखलाकर संत रामपाल जी महाराज के खिलाफ साजिशे रचने लगे |
संत रामपाल जी महाराज ने सर्व सदग्रंथ जैसे वेद, शास्त्र, कुरान, गुरुग्रंथ और बाईबल अदि सदग्रंथो का गहन अध्ययन किया और यह पता लगाया आखिर वास्तविक सतभक्ति विधि और मंत्र क्या है, जिससे मनुष्य सुखी भी होगा और #पुर्ण_मोक्ष पाकर जन्म मरण के भारी रोग से पूर्णत: छुटकारा पा सकेगा |
चुँकि यह रहस्य संत रामपालजी महाराज के अतिरिक्त कोई ना उजागर कर सका, तो वर्तमान के नकली संत, महंत, कथाकार, नकली धर्मगुरु, अज्ञानी शँकराचार्य, और #अध्यात्म के नकली ठेकेदारो को अपना पतन प्रत्यक्ष दिखने लगा | धर्म की नकली दुकाने बंद होते देख इन ज्ञानहीन संतो ने संत रामपाल जी महाराज की आवाज को पुरी तरह दबाने का भरसक प्रयास किया, जिसका परिणाम आज आपके सामने है की संत रामपालजी महाराज आज “जेल” मे है | लेकिन कहते है ना की बकरी के सिंग मारने से शेर की छाती जख्मी नही होती |
#लाख_कोशिश के बावजुद संत रामपालजी महाराज की आवाज को नही दबा सके विरोधी | विपरीत इसके भारी सफलता हाथ लगी है |
संत रामपालजी महाराज ने #दहेज प्रथा, नशा, चोरी, रिश्वत, बेइमानी, जैसी बुराईयो को जड़ से उखाड़ फेंकने की जो मुहीम छेड़ी है वह सफलता की और अग्रसर है और लाखो परिवार संत रामपाल जी महाराज से नाम उपदेश लेकर इन समस्त बुराईयों को त्यागकर शास्त्र अनुकुल साधना करके सुखमय जीवन व्यतीत कर रहे हैं |
#निष्कर्ष:- पहली बार ऐसा हुआ की संतो को सुधारने वाला संत आ चुका है |
जेल :- शब्द अगर किसी मनुष्य के #चरित्र से जुड़ जाता है तो उसकी गरिमा पर सवाल उठने लगते है, और बदनामी का दाग लग ही जाता है!
किसी व्यक्ति के जेल जाने के बाद उसे घृणा या #संदेह कि निगाह से देखा जाना लाजमी है!
जेल जाने के भी विविध कारण हो सकते है और कभी-कभी उद्देश्य भी | व्यक्ति दुराचारी, भ्रष्टाचारी, दुष्कर्मी, चोर, हत्यारा, होकर भी “जेल” जाता है, और ऐसे व्यक्ति से घृणा करना या उसकी बेगुनाही पर संदेह करना स्वाभाविक है |
लेकिन जरुरी नही की जेल जाने वाला हर व्यक्ति कुकर्मी हो, कुछ लोग #परमार्थ और समाज सुधार के उद्देश्य को पुरा करने के लिए भी “जेल” जैसी प्रताड़नाये स्वीकार करते है | जहाँ एक तरफ चंद्र शेखर आजाद, भगत सिंह, जैसे देश-प्रेमी हंसते-हंसते फांसी चढ़ गये तो वही दुसरी तरफ महात्मा गांधी जैसे राष्ट्रपिता भी जेल भोगकर परमार्थ मे “जेल”जाने की मिशाल कायम कर गये|
श्री कृष्ण! जी का तो जन्म ही जेल मे हुआ था, फिर भी इंसान आज उन्हे धिक्कारने की बजाय पूजता है | ईसा मसीह ने “सत्य” कहा तो इसी जनता ने उन्हे शूली पर टांग दिया, और वर्तमान मे उन्हे गॉड कहकर संबोधित किया जाता है | एक विदेशी व्यक्ति “निकोलस” ने शोध मे पता लगाया की पृथ्वी घुमती है | इसी जनता ने निकोलस को झुठा बताकर उसे फांसी पर चढ़ा दिया, लेकिन कुछ समय पश्चात जब यह बात सच साबित हुई तो इतिहास के पन्नों पर आज भी निकोलस का नाम सुनहरे शब्दो मे दर्ज है |
#वास्तविकता तो यह है की जब कभी भी किसी #महान_पुरुष ने जनहित मे किसी रहस्यमयी सत्य को उजागर करके जन-मानस को सच का आइना दिखाना चाहा तो इसी जनता द्वारा ऐसे महापुरुषो को प्रताड़ित करके तिरष्कृत भी किया गया | ठीक इसी तरह संत रामपाल जी महाराज ने एक महान पुरुष की भूमिका निभाई है और समस्त जनसमुह को एक नई चेतना प्रदान करके एवं ज्ञान के गूढ़ रहस्य उजागर करके समाज को बहुमुल्य सत्ज्ञान प्रदान करने की कोशिश की है, लेकिन भोली जनता सहयोग करने के बजाय अलोचना करने लगी |
#संत_रामपाल_जी_महाराज का गुनाह सिर्फ इतना है की उन्होने जनहित मे अपना समुल अस्तित्व न्योछावर करके जनता की भलाई सोची |
उन्होने घर-परिवार से सक्षम होते हुए भी समाज को अपना संपुर्ण जीवन सौंप दिया, एवं समय अभाव के चलते इंजीनियर की नौकरी त्यागकर मनुष्य को दुखो के चंगुल से छुड़ाने एवं घर-घर तक सतभक्ति का संदेश पहुँचाने की ठान ली | यही सत-भक्ति अनादि काल से किसी भी ॠषी,मुनि, संत महंतो को समझ मे नही आई, और ना ही इस रहस्य को समझने या समझाने मे वह सक्षम रहे | जिसके परिणाम स्वरुप इन नकलियो की अज्ञानता की सच्चाई समाज के सामने आने लगी और बोखलाकर संत रामपाल जी महाराज के खिलाफ साजिशे रचने लगे |
संत रामपाल जी महाराज ने सर्व सदग्रंथ जैसे वेद, शास्त्र, कुरान, गुरुग्रंथ और बाईबल अदि सदग्रंथो का गहन अध्ययन किया और यह पता लगाया आखिर वास्तविक सतभक्ति विधि और मंत्र क्या है, जिससे मनुष्य सुखी भी होगा और #पुर्ण_मोक्ष पाकर जन्म मरण के भारी रोग से पूर्णत: छुटकारा पा सकेगा |
चुँकि यह रहस्य संत रामपालजी महाराज के अतिरिक्त कोई ना उजागर कर सका, तो वर्तमान के नकली संत, महंत, कथाकार, नकली धर्मगुरु, अज्ञानी शँकराचार्य, और #अध्यात्म के नकली ठेकेदारो को अपना पतन प्रत्यक्ष दिखने लगा | धर्म की नकली दुकाने बंद होते देख इन ज्ञानहीन संतो ने संत रामपाल जी महाराज की आवाज को पुरी तरह दबाने का भरसक प्रयास किया, जिसका परिणाम आज आपके सामने है की संत रामपालजी महाराज आज “जेल” मे है | लेकिन कहते है ना की बकरी के सिंग मारने से शेर की छाती जख्मी नही होती |
#लाख_कोशिश के बावजुद संत रामपालजी महाराज की आवाज को नही दबा सके विरोधी | विपरीत इसके भारी सफलता हाथ लगी है |
संत रामपालजी महाराज ने #दहेज प्रथा, नशा, चोरी, रिश्वत, बेइमानी, जैसी बुराईयो को जड़ से उखाड़ फेंकने की जो मुहीम छेड़ी है वह सफलता की और अग्रसर है और लाखो परिवार संत रामपाल जी महाराज से नाम उपदेश लेकर इन समस्त बुराईयों को त्यागकर शास्त्र अनुकुल साधना करके सुखमय जीवन व्यतीत कर रहे हैं |
#निष्कर्ष:- पहली बार ऐसा हुआ की संतो को सुधारने वाला संत आ चुका है |

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