क्योंकि मैं अभी 2018 में ही इस परिस्थिति में था ।
मैं अपनी एक मित्र के साथ था में उसकी माता जी भी थी । वो बस पर आगे . थी उसके ठीक पीछे हम बैठे हुए थे । हम दोनों झांक झांक कर विभिन्न विषयों पर चर्चा भी कर रहे थे । सामने एक गोल मुंह वाला पुलिस हवलदार बैठा था । उसका चेहरा गहरे रंग का था और गाल एकदम भरे हुए थे मुझे अच्छे से याद है , उसके बाल झड़े हुए थे और चेहरे पर एक विचित्र प्रकार की शांति थी मानो वह मोह माया से मुक्त है ।
हम दोनों ने उसे देखा मेरी महिला मित्र ने उसकी प्रशंसा कर दी कि देखिये सोमेंद्र जी कितने शांत हैं ये , हमने भी प्रशंसा में दो चार वाक्य बोल दिए ।
उसके बाद हम बैठ गए , लगभग 20 मिनट बाद वो महोदय पास आये मेरा नाम पूछा और उसके बाद मेरी महिला मित्र का नाम पूछा और उसकी माता श्री का नाम पूछने के बाद उसने तुरंत मेरे बाल पकड़ लिए और अपने वाक्यों में अपशब्दों के आभूषण पिरोकर बोलने लगे । उनके वाक्यों में से अपशब्द हटाकर हम बात रहे हैं । “ज्यादा दिमाग खराब है तो बोल यही पुलिस स्टेशन आने वाला है उतार के दो चार बेल्ट लगाएंगे” ।
अच्छा हम ठहरे आत्मसम्मानी व्यक्ति , हम उठे और हमने बोला किस जुर्म में पुलिस स्टेशन जाएंगे ।
वो बोले लड़की से बाते कर रहे हो ।
हम बोले हर नागरिक को लाइफ ऐंड लिबर्टी का अधिकार है। संविधान के अनुच्छेद-21 का दायरा काफी बड़ा है। इस अनुच्छेद के तहत लाइफ ऐंड लिबर्टी का मूल अधिकार मिला हुआ है। इसका मतलब साफ है कि हर शख्स को यह अधिकार है कि वह अपनी मर्जी से जिंदगी का निर्वाह करे।
वो थोड़ा घबरा गया और हमने ये भांप लिया । उसने मेरा कॉलर पकड़ा और बोला हमसे अंग्रेजी न झाड़ो वरना अभी यहीं मारेंगे।
हम और अड़ गए हमने बोल दिया हम जेल जाने से नही डरते ले चलो देखते है क्या कर सकते हो वैसे भी तुम्हारी औकात नही ये भाषा समझ सको 12th तक पढ़े होंगे और तोंद देखो कहाँ जा रहा है ।
उसने हाथ उठा दिया हमने हाथ पकड़ लिया उसका और एक हाथ से हमने भी हाथ उठाने की कोशिश की लेकिन सौभाग्य से वहां एक इंस्पेक्टर भी थे जो दिल्ली पुलिस में कार्यरत थे उन्होंने हमें रोक लिया और उसे भी समझाया ।
लेकिन हवलदार ने हमे फिर धमकाया जेल तो तुम जाओगे
हमने बोला आप मुझे बिना कारण बताए गिरफ्तार नहीं किया कर सकते ।
अगर कर लिए तो क्या ?
आप हमसे मारपीट या अमानवीय व्यवहार नहीं कर सकते और आप हमें 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं रख सकते ( धारा 167) ,परिवार वालो को सूचित करना पड़ेगा ।
लेकिन वह हवलदार अड़ा रहा और हम भी अब हम डरने लगे थे तो हमने अपने दोस्त को फ़ोन किआ और एक वकील के साथ आगे आने वाले थाने पे आने को बोला ।
ये सुनकर वो थोड़ा पीछे हुआ । आखिरकार जब थाना आने वाला हुआ तो उसने हमसे क्षमा मांगी और हाथ मिलाने की कोशिश की हम बोले क्षमा है लेकिन आगे से किसी को ऐसे परेशान न करना ।
तो सारांश यह है आपके पास अधिकार तो कई हैं लेकिन जिसकी लाठी उसकी भैंस , अतः आप अगर पुलिस से भिड़ने की सोच रहे हैं तो पहले एक वकील और कुछ व्यक्तियों का प्रबंध जरूर कर लीजिए ।
और सबसे बुरी बात है कायर समाज , अर्थात कोई तुम्हारी तरफ नही आएगा भले ही तुम सही हो । उस बस में हम सही थे लेकिन कोई भी हमारे पक्ष में नही बोला अगर हम बच गये तो किस्मत और बुद्धि से , बाद में कुछ लड़कों ने ताली बजाई मेरे लिए परन्तु मेरे लिए वह मेरे नकारात्मक अनुभवों में से एक है

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