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मुसलमान खतना क्यों करवाते हैं

मुसलमान मूंछ क्यों कटवाते हैं सिर पर चोटी क्यों नहीं रखते खतना क्यों होती है इन अनसुलझे प्रश्नों को के उत्तर आज बताता हूं
हजरत मुहम्मद (मुसलमान धर्म का प्रवर्तक) एक स्त्री के साथ अवैध संबंध बनाकर पाप के भागी बन गए थे। उनकी पत्नी बड़े घराने से थी जो बहुत पैसे वाली धनवान थी। उसकी उस क्षेत्र में बहुत चलती थी। धन के प्रभाव से लोग उसकी आज्ञा का पालन करते थे। नौकर भी रखती थी। जब हजरत मुहम्मद दूर क्षेत्र में प्रचार करने जाने लगा तो उसकी पत्नी खदीजा ने कहा था कि किसी अन्य स्त्री के चक्कर न पड़ना। यदि ये गलती की तो तेरे को सजा दी जाएगी। मुहम्मद ने शर्त स्वीकार कर ली। दूर स्थान पर मुसलमान धर्म का प्रचार करते समय आदि माया की प्रेरित सुंदर स्त्री जो विधवा थी, मुहम्मद के सम्पर्क में आई, मुसलमान बन गई। दोनों का अवैध संबंध भी हो गया खदीजा को उसके नौकरों ने बताया तो खदीजा ने मुहम्मद को बुलाकर सजा दिलाई। मुहम्मद का लिंग, आगे से मूंछे तथा सिर की चोटी कटवाने का आदेश नौकरों को दिया। नौकरों ने मूँछे तथा चोटी काट दी, परंतु लिंग नहीं काटा। लिंग की कुछ खाल (चमड़ी) जो आगे के भाग पर होती है, वह काट दी और खदीजा को बता दिया कि आपके आदेशानुसार सजा दे दी है। मूंछे व चोटी तो स्पष्ट कटी दिखाई दे रही थी सभा में लिंग की खाल दिखाई गई और मुहम्मद फिर से प्रचार के लिए चला गया। मुहम्मद की पत्नी खदीजा अब निश्चिंत थी कि कहीं जाए, लिंग कट चुका है। जब दूर देश में अपने मुसलमान अनुयाईयों में गया तो यह हुलिया देखकर कारण जानना चाहा तो मुहम्मद ने बताया कि हमने अपने धर्म की अलग पहचान बनानी है। जो सच्चा मुसलमान होगा, वह तो अल्लाह के लिए ये तीन वस्तु तो क्या सिर कटा लेगा। जो नकली होगा, वह ऐसा नहीं कर सकेगा। अब आपने देखना है कि अल्लाह का आदेश मानना है या नहीं। श्रद्धालु कुर्बान होते हैं। सब आदमियों ने आगे से मूंछे, सिर की चोटी कटवा ली तथा लिंग की आगे से खाल भी कटवा दी जिससे सुन्नत कहते हैं। फिर तो यह धर्म चिन्ह ही बन गया। छोटी आयु के लड़कों की सुन्नत की परंपरा पड़ गई।
अभी तक आपको ही है सिर्फ मनगढ़ंत कहानी लग रही होगी लेकिन इसका प्रमाण भी आपको बताना जरूरी है  पारख के अंग की वाणी नं. 203-206 :

गरीब, हद्दी तो छूटे नहीं, कीड़ी बदला दीन । मोहम्मद की बेगम गुसे, काट लिए अंस तीन।203 ।। गरीब, बरषै तरकै डोबि दे, त्यारे तीनूं लोक। ऐसे हरिजन संत हैं, सौदा रोकमरोक ।।204 || गरीब, बहतरि खूहनि क्षय करी, चूणक ऋषीश्वर देख । कपिल सिंघारे सघड़के, लागे पाप अनेक । 205 ।। गरीब, द्वादस कोटि निनानवे, गोरख जनक बिदेह। यौं त्यारै यौं डोबिदे, यामें नहीं संदेह I206 ।। . सरलार्थ :- इस वाणी में हजरत मुहम्मद जी के विषय में वर्णन है जो "माया के ग्रंथ" की वाणी नं. 3 के सरलार्थ में लिखा है जो इस प्रकार है : अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें 

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