सतयुग में लोग सदाचारी होते थे पराई स्त्री को मां, बेटी व बहन की दृष्टि से देखा जाता था। संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से पुनः विश्व में जागृति आएगी और लोग पराई स्त्री का सम्मान करेंगे उसे मां, बेटी व बहन की दृष्टि से देखेंगे।
सतयुग में बच्चे अपने माता-पिता का आदर और सेवा करते थे वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज के तत्वज्ञान से लोगों का आध्यात्मिकता की ओर झुकाव होगा और बच्चे अपने माता पिता का आदर और सेवा करेंगे।सतयुग में चारों तरफ हरियाली थी अनाज और फलों का अभाव नहीं था वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से पुन: सतयुग आएगा।
आध्यात्मिक वातावरण से ऐसा माहौल होगा कि समय पर वर्षा होगी पृथ्वी पर चारों तरफ हरियाली होगी।सतयुग में जातिवाद, समाजवाद, पांखडवाद ये सब कुरीतियों से मानव दूर था। सभ्य समाज की तरह सभी मिल-जुलकर सुखी से जीवन व्यतीत करते थे। ठीक उसी प्रकार संत रामपाल जी महाराज जी के शिष्य भी जातिवाद, समाजवाद, पाखंडवाद से दूर हटकर सभ्य समाज की तरह मिल-जुलकर सुखी से जीवन व्यतीत करते है।
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