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#RamRajya_Is_Coming

सतयुग में लोग सदाचारी होते थे पराई स्त्री को मां, बेटी व बहन की दृष्टि से देखा जाता था। संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से पुनः विश्व में जागृति आएगी और लोग पराई स्त्री का सम्मान करेंगे उसे मां, बेटी व बहन की दृष्टि से देखेंगे।
सतयुग में बच्चे अपने माता-पिता का आदर और सेवा करते थे वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज के तत्वज्ञान से लोगों का आध्यात्मिकता की ओर झुकाव होगा और बच्चे अपने माता पिता का आदर और सेवा करेंगे।सतयुग में चारों तरफ हरियाली थी  अनाज और फलों का अभाव नहीं था वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से पुन: सतयुग आएगा।
आध्यात्मिक वातावरण से ऐसा माहौल होगा कि समय पर वर्षा होगी पृथ्वी पर चारों तरफ हरियाली होगी।सतयुग में जातिवाद, समाजवाद, पांखडवाद ये सब कुरीतियों से मानव दूर था। सभ्य समाज की तरह सभी  मिल-जुलकर सुखी से जीवन व्यतीत करते थे। ठीक उसी प्रकार संत रामपाल जी महाराज जी के शिष्य भी जातिवाद, समाजवाद, पाखंडवाद से दूर हटकर सभ्य समाज की तरह मिल-जुलकर सुखी से जीवन व्यतीत करते है।

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जंगली भैंसों का एक झुण्ड जंगल में घूम रहा था, तभी एक बछड़े (पाड़ा) ने पुछा," पिताजी, क्या इस जंगल में ऐसी कोई चीज है जिससे डरने की ज़रुरत है ?" बस शेरों से सावधान रहना ...", भैंसा बोला "हाँ, मैंने भी सुना है कि शेर बड़े खतरनाक होते हैं . अगर कभी मुझे शेर दिखा तो मैं जितना हो सके उतनी तेजी से दौड़ता हुआ भाग जाऊँगा ..", बछड़ा बोला . "नहीं, इससे बुरा तो तुम कुछ कर ही नहीं सकते ..", भैंसा बोला बछड़े को ये बात कुछ अजीब लगी, वह बोला" क्यों ? वे खतरनाक होते हैं, मुझे मार सकते हैं तो भला मैं भाग कर अपनी जान क्यों ना बताऊं?" भैंसा समझाने लगा," अगर तुम भागोगे तो शेर तुम्हारा पीछा करेंगे, भागते समय वे तुम्हारी पीठ पर आसानी से हमला कर सकते हैं और तुम्हे नीचे गिरा सकते हैं ... और एक बार तुम गिर गए तो मौत पक्की समझो ..." तो.. तो। ऐसी स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए ?", बछड़े ने घबराहट में पुछा . अगर तुम कभी भी शेर को देखो , तो अपनी जगह डट कर खड़े हो जाओ और ये दिखाओ की तुम जरा भी डरे हुए नहीं हो . अगर वो ना जाएं तो उसे अपनी तेज सींघें दिखाओ ...

कविर्देव किसी भी मां से जन्म नहीं लेते हैं। कबीर साहेब स्वयं प्रकट होता है। इसलिए प्रकट दिवस के रूप में मनाया जाता है

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