INS khukhri लड़ाकू विमान
INS कुकरी शुरू करता हूं पूर्वी पाकिस्तान जो बाद में बांग्लादेश बना वहां पर पाकिस्तानी सेना और छापामार मुक्ति वाहिनी सेना के बीच लड़ाई छिड़ी हुई थी मुक्ति वाहिनी अलग देश की मांग कर रही थी और उनकी लड़ाई में पाकिस्तानियों का मानना था कि इस उफान लेते विद्रोह की वजह छापामार सैनिकों को भारत की दी हुई सह है और यह बात ठीक गई थी क्योंकि पाकिस्तानियों का हुमनराईट को लेकर व्यवहार हद पार कर रहा था और भारत पर सैनिक हस्तक्षेप का दबाव बढ़ रहा था रहा था भारत के सेनाध्यक्ष जनरल मानक सौन पूरी तरह तैयार थे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी चाहती थी कि हमला अप्रैल में हो 3 दिसंबर 1971 में इंदिरा गांधी एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे शाम के 5:40 पाकिस्तानी वायु सेना के सेवर जैतसर स्टार फाइटर्स विमानों ने भारतीय वायु सीमा पार करके पठानकोट श्रीनगर अमृतसर जोधपुर और आगरा के सैनिक हवाई अड्डे पर बम गिराने शुरू कर दिऐ है इंदिरा गांधी ने उसी समय दिल्ली लौटने का फैसला किया है दिल्ली में ब्लैक आउट होने के कारण पहले उनके विमान को लखनऊ मोड़ आ गया और फिर 11:00 बजे के आसपास वह दिल्ली पहुंची मंत्रिमंडल की आपात बैठक के बाद कांपती हुई आवाज में अटक अटक कर उन्होंने देश को संबोधित किया पाकिस्तान के इन हमलो के जवाब में भारतीय सेना आखिरकार पूर्वी पाकिस्तान में बांग्लादेश की स्वतंत्रता संग्राम में बंगाली राष्ट्रवादी गुटों के समर्थन में कूद पड़ी और ठीक उसी रात भारत ने पाकिस्तान से युद्ध की घोषणा कर दी युद्ध की घोषणा से पहले ही पाकिस्तान ने इंडियन नेवी के युद्धपोत ने लड़ाई के जहाज INS विक्रांत को खत्म करने की नियत से राजी पनडुब्बी पर मौजूद राजपूत के कैप्टन ने पानी में हलचल देखी डैक्स चार्ज जॉब कर दिए यानी एंटी सबमरीन बार फैर वेपंस लागू कर दिए रतन पनडुब्बियों से लड़ने वाले हथियार चार्ज क्या है जो अपने हाजी को गहरे समंदर में डुबो दिया नौसेना पाकिस्तान के इरादों से बात साफ हो गई थी
और समझ गई थी कि दुश्मन की पनडुब्बी मुंबई बंदरगाह को अपना निशाना बनाएगी इसमें कोई शक नहीं था कि उनके लड़ाकू जहाज हाजी के डूबने का बदला लेने के लिए पाकिस्तान की नौसेना फड़फड़ा रही होगी इंडियन नेवी के कैप्टन ने तय किया लड़ाई शुरू होने से के पहले सारे नौसेना फीट को मुंबई से बाहर ले जाया जाए जब 2 और 3 दिसंबर की रात को नौसेना के पोत मुंबई छोड़ रहे थे तो इंडियन नेवल रेडियोडिटेक्शन इक्विपमेंट को दी करीब 30 मील दूर दक्षिण पश्चिमी कोई दूर तक एक पनडुब्बी की गतिविधि का पता लगा पाकिस्तान की पनडुब्बी बहुत आधुनिक थी सभी ताजा तकनीकों से लैस थी पश्चिमी बड़े 14 जून को तत्काल पनडुब्बी पर हमला करके तबाह करने की मुहिम पर भेज दिया गया बेडे में दो युद्धपोत शामिल थे आइनेंस कुकरीन और आइनेंस कृपाण ये दोनों टाइप फॉर बैकवर्ड क्लास में गेट थे एंटी सबमरीन फॉरगेट अपने मिशन पर 8 दिसंबर को मुंबई से चले और 9 दिसंबर की सुबह होने तक उस इलाके में पहुंच गए थे जहां पाकिस्तानी पनडुब्बी के होने का संदेह था और इस विकेट की कमान थे कैप्टन महेंद्रनाथ मुल्लाह के हाथ में जो शिप के आगे के हिस्से में रेलिंग से टिके हुए समंदर को ताक रहे थे दिमाग में अपने दुश्मन की पनडुब्बी को नष्ट करने की स्टडी चल रही थी और हाथ में एक लेटर पैड फड़फड़ा रहा था जिसमें वह अपनी 14 बरस की बच्ची को खत लिख रहे थे जो उनसे बहुत दूर शिमला में बोर्डिंग स्कूल में पढ़ रही थी मुल्लाह अपनी बेटी पर जरा सा नाराज थे कि उसके विषय में 90% से ज्यादा नहीं आए हैं क्यों सबसे बेहतर नहीं है आखिर उनकी बेटी थी एक ऐसे पिता की बेटी जो किसी हाल में कमतर साबित नहीं होना चाहते थे वह अपनी बेटी को सख्त हिदायतें दे रहे थे कि वो किसी भी कीमत पर अपने लक्ष्य से ना भटके अभी वक्त सिर्फ पढ़ाई में ध्यान देने का है मजबूत भविष्य के लिए गहरी नहीं खोजने का है उन्होंने लिखा live laughter and love will come later कैंटीन में खाने की शिकायत करने वाली बेटी को उन्होंने जवाब दिया कि अच्छा है कि तुम्हें दो वक्त का खाना मिल रहा है देश की 90% आबादी को इतना भी नसीब नहीं है मैं खुश हूं कि तुम्हें अभाव में रहने की आदत पड़ रही है कैप्टन मुल्ला जानते थे कि फौजियों की जिंदगी का कोई भरोसा नहीं वह अपनी बेटी को एक मजबूत इंसान बनाना चाहते थे अपनी तरह पिता के मन के बवंडर समुंद्र में पैता हुई हलचल से कहीं ज्यादा बड़े होते हैं 15 मई 1926 को जन्मे कप्तान महेंद्र नाथ 1948 में रॉयल इंडियन नेवी में कमीशन हुए थे 10 साल बाद लेफ्टिनेंट कमांडर फिर 8 साल बाद 1964 कमांडर सुबह से सरल और ईमानदार शख्स थे और बेहद कड़क और जुझार ऑफिसर थे अपनी टीम से भी उनकी यही उम्मीद रहती थी उन्हें टॉप टास्कमास्टर कहा जाता था महेंद्र मुल्ला एक स्पष्ट वादी अफसर थे और अपने शानदार दबंग व्यक्तित्व के कारण सबके बीच बहुत लोकप्रिय थे नेवल ऑफिसर जो कोर्ट मार्शल से गुजरते थे उनके लिए क्या पद मिला एक डिफेंस काउंसिल के रूप में बहुत डिमांड में रहते थे वह जजों और वकीलों के परिवार से थे शायद इसीलिए कायदे कानून को लेकर बड़ी गहरी समझ रखते थे 9 दिसंबर की सुबह पाकिस्तान सेना की दसवीं क्लास पनडुब्बी पीएनआर ने अपने एरिया में दो सोना कांटेक्ट किए सुनाने साउंड वेव या ध्वनि की मदद से समुद्र में किसी चीज का पता लगाना पनडुब्बी के शौर्य ट्रांसलेशन ने उनकी पहचान एक व्हाट्सएप के तौर पर कर ली लेकिन उनको रोक नहीं पाए उनके रास्ते में अड़चन पैदा करने की कोशिश असफल हो गई और रेंज बढ़ने से उनका संपर्क टूट गयाड्यू के तट से कोई 40 नॉटिकल माइल अंदर अरब महासागर के शांत पानी में तैरते आयनेस्को करी को अंदाजा भी नहीं था कि उसका दुश्मन उसके आसपास घात लगाए बैठा है 2 और 3 दिसंबर की दरमियानी रात इसी पनडुब्बी में तैनात पाकिस्तानी लेफ्टिनेंट कमांडर तसनीम अहमद पानी के नीचे अपनी वसूल में कसमसा रहे थे पूरा का पूरा इंडियन नेवल फ्लीट उनके ऊपर से गुजरा और वह कुछ नहीं कर सके उनके पास हमला करने के आदेश नहीं थे क्योंकि युद्ध की औपचारिक घोषणा भी हुई नहीं थी कंट्रोल रूम में कई लोगों ने तो फायर करने के लिए दबाव डाला लेकिन ऐसा नहीं कर सकते थे क्योंकि हमला करना युद्ध करने जैसा था और एक लेफ्टिनेंट कमांडर अपनी तरफ से ऐसा कतई नहीं कर सकता था हा क्योंकि दुश्मन नजदीक था हां लालच जरूर आता रहा दुश्मन इतने करीब हो और वह भी खतरे से एकदम अनजान ऐसा मौका आसानी से कहां मिलता है अब भारतीय नौसेना को पाकिस्तानी पनडुब्बी अंगूर के द्वारा भेजे गए संदेशों से उनके वहां होने का पता चल चुका था जाके एक पाकिस्तानी पनडुब्बियों के तटों के आस-पास ही घूम रही है धीमी रफ्तार से जा रही थी कप्तान ने रफ्तार इसलिए धीमी इसलिए रखी थी क्योंकि उसके बेहतर और उन्नत 170 174 सोनार का डिटेक्शन बढ़ाना था इस वक्त 12 नोट 20- 21 किलोमीटर प्रति घंटा थी ठीक उसी समय और हंगोरअपने इरादों को अमल करने पर तुला था और भारत के वारशिप की धीमी गति उसका काम आसान कर रही थी 9 दिसंबर को अंगूर काठियावद की तरफ जा रही तभी उसके सोनार पर कुछ कांटेक्ट डिटेक्टर दुए उनके सोना हमसे सब पता लग रहा था वह वारशिप है उनकी दूरी कोई 6 से 8 मील की बताएं पाकिस्तानी सबमरीन ने अपने दुश्मन का पीछा शुरू कर दिया खोज लेने की लंबी दूरी की अपनी क्षमता के कारण हंगूर को जल्दी खुकरी और कृपाण के होने का पता चल गया और यह दोनों पोर्ट जिग जैग तरीके से पाकिस्तानी पनडुब्बी की खोज कर रहे थे और हंगोर ने उनके और नजदीक आने का इंतजार किया फिर रेन्ज में आते ही उसने - कृपाण को अपना निशाना बनाया और एक होमिंग टोरपीडो उसकी तरफ दाग दिया पाकिस्तान हिंदुस्तान के जहाजों को हिंदुस्तान के पानी में ही डूबा देना चाहता था अपने पोत गाजी का बदला लेने का बहुत अच्छा मौका उसके हाथ लग गया था होमिग टोरपीडो का अपना सोनार होता है वह खुद अपना लक्ष्य खोज कर वार करता है यह बहुत आधुनिक self-propelled वेपन था वार्ड निशाने पर लगा था लेकिन भारत की वारशिप की किस्मत अच्छी थी टोरपीडो फटा नहीं पनडुब्बी के आसपास होने से पानी में नीचे गहराई में हलचल हो रही थी जल समंदर की लहरों के अलावा किसी और मूवमेंट का इशारा कर रही थी फाइनेंस कृपाण को खतरे का आभास हो गया कप्तान ने टीम को अलर्ट किया और पूरी तेजी से शिप को मोड़ दिया वह उसे दूर ले जाने लगे सिर्फ अपना बचाओ करना युद्ध नहीं होता युद्ध तो आक्रमण से जीत जाते हैं कृपाण ने अपनी सुरक्षा में एक और मैं अपनी सुरक्षा में एक एंटी सबमरीन मोटर अंगूर को निशाना बनाते हुए दाग दिया लेकिन वह पाकिस्तानियों का कोई नुकसान नहीं कर सका जब अंगूर का पहला वार खाली गया तो उसने स्पीड बढ़ाने के लिए स्मोकिंग शुरू कर दिया न सतह पर तैरते हुए बाहर से भी हवा खींचते रहना लेकिन उसके प्रयासों को सफलता नहीं मिली 9 तारीख की शाम को पाकिस्तान के अंगूर ने भारत के दोनों युद्ध पोतों की चाल का एक पैटर्न समझ लिया था शाम 7:00 बजे पनडुब्बी फाइनेंस को करीब 12 की स्पीड से चल रही थी उससे अंदाजा भी नहीं था कि
अब हंगौर हमला करने के लिए तैयार थी
वह परेश कोप्पैक्ट पर चल रही थी पानी की सतह पर लेकिन अंधेरे की वजह से कुछ दिखाई नहीं दे रहा थाहमको बहुत तेजी से पलटा था और उसने कुफरी को पीछे से निशाना बनाया और एक और और टोरपिडो दाग दी कोकरी की तरफ आया 1:30 मिनट की रन थी टोरपिडो कोकरी की मैगजीन के नीचे जाकर एक्सप्लोड हुआ कोकरी में परंपरा की रात 8:45 के समाचार सभी इकट्ठा होकर एक साथ सुना करते थे ताकि उन्हें पता रहे कि बाहर की दुनिया में क्या हो रहा है समाचार शुरू हुए यह आकाशवाणी है अब समाचार
समाचार शब्द पूरा नहीं हुआ था कि टोरपीडो ने शिप को हिट किया किया झटका इतनी जोर का था कि 1200 भारी-भरकम पूरी तरह हिल गई जैसे कोई बवंडर आया हो समंदर मे कैप्टन अपनी कुर्सी से गिर गए और उनका सर लोहे से टकराया और माथे से खून बहने लगा अभी किसी को समझ में आता क्या हुआ है कि उससे पहले ही एक धमाका और दूसरा धमाका होते ही पूरे पोत की बत्ती चली गई को कैप्टन मुल्लाह ने आदेश दिया कि वह पता लगाएं कि हो क्या रहा है कहां है और कितना नुकसान हुआ है कुछ भी पता करने का एक्शन लेने का वक्त नहीं बचा था कुकरी में दो छेद हो उस चुके थे और उनमें तेजी से पानी भर रहा था उसके फनल से धू धू करती आग निकल रही थी लपटें निकल रही थी उधर सब लेफ्टिनेंट भागकर ब्रिज पर पहुंचे उस समय वेस्टर्न सीट केस टास्क फोर्स के कमांडर कैप्टन मुल्लाने पश्चिमी नौसेना कमान के प्रमुख को सिग्नल भिजवाए की कुकरी पर हमला हो गया है आखरी टोरपीडो के बाद के कारण सुख का सारा तेल बहकर समंदर की तरह पर फैलता जा रहा था कई हिस्सों में आग लग गई थी लोग अंडर वॉटर वाटर तैरकर ही किसी तरह से दूर जा सकते थे आसपास का तेल के कारण दम घुट रहा था कैप्टन मुल्ला जानते थे कि बचाव दल की जरूरत है सही मायनों में कप्तान थे।एक मजबूत इंसान उनका इलाज करने वाले डॉक्टर हैरान रह जाते थे कि कैसे वह दर्द को बिना दवा बिना पेन रिलीफ के सहन कर लेते थे
आईनस कुकरी में सवार 18 अफसरों और कोई 200 सेलर्स कुछ समझ पाते कि क्या हो रहा है कि पानी उनके घुटनों तक पहुंच गया था लोग जान बचाने के लिए इधर उधर भाग रहे थे खुखरी का ब्रिज समुद्री सतह से चौथी मंजिल पर था लेकिन मिनट से कम समय में ब्रिज और समुद्र का स्तर बराबर हो चुका था मुलाने अपने सब लेफ्टिनेंट की तरफ देखा और बोले gat dowm
यह उनका आदेश था जिसे डालने की किसी में हिम्मत नहीं थी लेफ्टिनेंट में आखिरी बार अपने कमांडर की तरह देखा और फौलाद की सुरक्षा छोड़कर अरब सागर की भयानक लहरों के बीच कूद गए कैप्टन मूल्ला यहां वहां दौड़कर लोगों को नीचे कूदने को बोल रहे थे जितनी लाइव जैकेट्स थी सब बाट दी गए जितनी लाइफबोट्स थी सब पानी में उतार दी गई शिप में मौजूद आखरी जैकेट भी अपने जूनियर को पहना दी बोले
Save yourself don't worry about me के कप्तान थे उन्हें भारतीय नौसेना की परंपरा का निर्वाह करना था वह अपनी प्यारी शिप का साथ छोड़ नहीं सकते थे आईना इसको खरीद धीरे धीरे नीचे जाति जा रही थी लोग बरसे ज्यादा ठंडे पानी में छलांग लगा रहे थे समुद्र में लहरें उठी थी शायद नहीं जानते थे कि वह अकेले नहीं है जो समंदर के गर्भ में समाने जा रहे हैं उनकी टीम के कई लोग और थे उनके अपने आदमी को आदमी की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनके हाथों में थी और वह कुछ नहीं कर पा रहे थे बेबस थे तो उन्होंने अपनी पोजीशन
कैप्टन को अपने पैरों में पानी महसूस हो रहा था एक वार शिप का कमांडर सामने दिखती मौत से घबरा जाए तो वह कमांडर कैसा है उनके जूनियर स्टाफ ने अपने कैप्टन जैसा दिलेर ओ सैयमी आज तक नहीं देखा था उन्होंने दूर से देखा कि आयनेस क्रुकी का अगला हिस्सा 80 डिग्री का एंगल बनाकर पानी के अंदर जा रहा था और कैप्टन के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी शेरो-शायरी के शौक़ीन कैप्टन महेंद्र नाथ के लिए ही शायद अहमद नदीम कासमी गए थे
कौन कहता है की मौत आई तो मर जाऊंगा मैं तो दरिया हूं समंदर में उतर जाऊंगा
आईनस कुकरी पानी में डूबने लगी तो एक बड़ा सा भवर बन गया और एक बड़े निवाले जैसे पूरे शिप को खींच कर अपने आप में समा लिया ऐसा लगा जैसे किसी नाटक का पटाक्षेप हुआ हो किसी बेहद दु:खद नाटक का चारों तरफ शोर मचा हुआ था लेकिन जब खुकरी आंखों से ओझल हुआ तो समय कुछ थम सा गया था जैसे मौत के बाद का माहौल
जो बच गए हैं उन्हें किनारे तक पहुंचाने की बचने वालों की आंखे जल रही थी समुद्र में तेल फैलने के कारण लोग उल्टियां कर रहे थे खुखरी के डूबने के 40 मिनट बाद कुछ दूरी पर रोशनी दिखाई दी
उन्होंने उसके पास पहुंचे थे
थोड़ी देर बाद क्षितिज के पानी पर जहाज के तीन मस्तूरिया नेमास दिखाई दिए नस का 4 नाम का जहाज आ गया था बचने वालों की संख्या 64 थी सभी को जहाज पर आते ही कंबल और गर्म चाय दी गई ।
INS कुकरी शुरू करता हूं पूर्वी पाकिस्तान जो बाद में बांग्लादेश बना वहां पर पाकिस्तानी सेना और छापामार मुक्ति वाहिनी सेना के बीच लड़ाई छिड़ी हुई थी मुक्ति वाहिनी अलग देश की मांग कर रही थी और उनकी लड़ाई में पाकिस्तानियों का मानना था कि इस उफान लेते विद्रोह की वजह छापामार सैनिकों को भारत की दी हुई सह है और यह बात ठीक गई थी क्योंकि पाकिस्तानियों का हुमनराईट को लेकर व्यवहार हद पार कर रहा था और भारत पर सैनिक हस्तक्षेप का दबाव बढ़ रहा था रहा था भारत के सेनाध्यक्ष जनरल मानक सौन पूरी तरह तैयार थे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी चाहती थी कि हमला अप्रैल में हो 3 दिसंबर 1971 में इंदिरा गांधी एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे शाम के 5:40 पाकिस्तानी वायु सेना के सेवर जैतसर स्टार फाइटर्स विमानों ने भारतीय वायु सीमा पार करके पठानकोट श्रीनगर अमृतसर जोधपुर और आगरा के सैनिक हवाई अड्डे पर बम गिराने शुरू कर दिऐ है इंदिरा गांधी ने उसी समय दिल्ली लौटने का फैसला किया है दिल्ली में ब्लैक आउट होने के कारण पहले उनके विमान को लखनऊ मोड़ आ गया और फिर 11:00 बजे के आसपास वह दिल्ली पहुंची मंत्रिमंडल की आपात बैठक के बाद कांपती हुई आवाज में अटक अटक कर उन्होंने देश को संबोधित किया पाकिस्तान के इन हमलो के जवाब में भारतीय सेना आखिरकार पूर्वी पाकिस्तान में बांग्लादेश की स्वतंत्रता संग्राम में बंगाली राष्ट्रवादी गुटों के समर्थन में कूद पड़ी और ठीक उसी रात भारत ने पाकिस्तान से युद्ध की घोषणा कर दी युद्ध की घोषणा से पहले ही पाकिस्तान ने इंडियन नेवी के युद्धपोत ने लड़ाई के जहाज INS विक्रांत को खत्म करने की नियत से राजी पनडुब्बी पर मौजूद राजपूत के कैप्टन ने पानी में हलचल देखी डैक्स चार्ज जॉब कर दिए यानी एंटी सबमरीन बार फैर वेपंस लागू कर दिए रतन पनडुब्बियों से लड़ने वाले हथियार चार्ज क्या है जो अपने हाजी को गहरे समंदर में डुबो दिया नौसेना पाकिस्तान के इरादों से बात साफ हो गई थी
और समझ गई थी कि दुश्मन की पनडुब्बी मुंबई बंदरगाह को अपना निशाना बनाएगी इसमें कोई शक नहीं था कि उनके लड़ाकू जहाज हाजी के डूबने का बदला लेने के लिए पाकिस्तान की नौसेना फड़फड़ा रही होगी इंडियन नेवी के कैप्टन ने तय किया लड़ाई शुरू होने से के पहले सारे नौसेना फीट को मुंबई से बाहर ले जाया जाए जब 2 और 3 दिसंबर की रात को नौसेना के पोत मुंबई छोड़ रहे थे तो इंडियन नेवल रेडियोडिटेक्शन इक्विपमेंट को दी करीब 30 मील दूर दक्षिण पश्चिमी कोई दूर तक एक पनडुब्बी की गतिविधि का पता लगा पाकिस्तान की पनडुब्बी बहुत आधुनिक थी सभी ताजा तकनीकों से लैस थी पश्चिमी बड़े 14 जून को तत्काल पनडुब्बी पर हमला करके तबाह करने की मुहिम पर भेज दिया गया बेडे में दो युद्धपोत शामिल थे आइनेंस कुकरीन और आइनेंस कृपाण ये दोनों टाइप फॉर बैकवर्ड क्लास में गेट थे एंटी सबमरीन फॉरगेट अपने मिशन पर 8 दिसंबर को मुंबई से चले और 9 दिसंबर की सुबह होने तक उस इलाके में पहुंच गए थे जहां पाकिस्तानी पनडुब्बी के होने का संदेह था और इस विकेट की कमान थे कैप्टन महेंद्रनाथ मुल्लाह के हाथ में जो शिप के आगे के हिस्से में रेलिंग से टिके हुए समंदर को ताक रहे थे दिमाग में अपने दुश्मन की पनडुब्बी को नष्ट करने की स्टडी चल रही थी और हाथ में एक लेटर पैड फड़फड़ा रहा था जिसमें वह अपनी 14 बरस की बच्ची को खत लिख रहे थे जो उनसे बहुत दूर शिमला में बोर्डिंग स्कूल में पढ़ रही थी मुल्लाह अपनी बेटी पर जरा सा नाराज थे कि उसके विषय में 90% से ज्यादा नहीं आए हैं क्यों सबसे बेहतर नहीं है आखिर उनकी बेटी थी एक ऐसे पिता की बेटी जो किसी हाल में कमतर साबित नहीं होना चाहते थे वह अपनी बेटी को सख्त हिदायतें दे रहे थे कि वो किसी भी कीमत पर अपने लक्ष्य से ना भटके अभी वक्त सिर्फ पढ़ाई में ध्यान देने का है मजबूत भविष्य के लिए गहरी नहीं खोजने का है उन्होंने लिखा live laughter and love will come later कैंटीन में खाने की शिकायत करने वाली बेटी को उन्होंने जवाब दिया कि अच्छा है कि तुम्हें दो वक्त का खाना मिल रहा है देश की 90% आबादी को इतना भी नसीब नहीं है मैं खुश हूं कि तुम्हें अभाव में रहने की आदत पड़ रही है कैप्टन मुल्ला जानते थे कि फौजियों की जिंदगी का कोई भरोसा नहीं वह अपनी बेटी को एक मजबूत इंसान बनाना चाहते थे अपनी तरह पिता के मन के बवंडर समुंद्र में पैता हुई हलचल से कहीं ज्यादा बड़े होते हैं 15 मई 1926 को जन्मे कप्तान महेंद्र नाथ 1948 में रॉयल इंडियन नेवी में कमीशन हुए थे 10 साल बाद लेफ्टिनेंट कमांडर फिर 8 साल बाद 1964 कमांडर सुबह से सरल और ईमानदार शख्स थे और बेहद कड़क और जुझार ऑफिसर थे अपनी टीम से भी उनकी यही उम्मीद रहती थी उन्हें टॉप टास्कमास्टर कहा जाता था महेंद्र मुल्ला एक स्पष्ट वादी अफसर थे और अपने शानदार दबंग व्यक्तित्व के कारण सबके बीच बहुत लोकप्रिय थे नेवल ऑफिसर जो कोर्ट मार्शल से गुजरते थे उनके लिए क्या पद मिला एक डिफेंस काउंसिल के रूप में बहुत डिमांड में रहते थे वह जजों और वकीलों के परिवार से थे शायद इसीलिए कायदे कानून को लेकर बड़ी गहरी समझ रखते थे 9 दिसंबर की सुबह पाकिस्तान सेना की दसवीं क्लास पनडुब्बी पीएनआर ने अपने एरिया में दो सोना कांटेक्ट किए सुनाने साउंड वेव या ध्वनि की मदद से समुद्र में किसी चीज का पता लगाना पनडुब्बी के शौर्य ट्रांसलेशन ने उनकी पहचान एक व्हाट्सएप के तौर पर कर ली लेकिन उनको रोक नहीं पाए उनके रास्ते में अड़चन पैदा करने की कोशिश असफल हो गई और रेंज बढ़ने से उनका संपर्क टूट गयाड्यू के तट से कोई 40 नॉटिकल माइल अंदर अरब महासागर के शांत पानी में तैरते आयनेस्को करी को अंदाजा भी नहीं था कि उसका दुश्मन उसके आसपास घात लगाए बैठा है 2 और 3 दिसंबर की दरमियानी रात इसी पनडुब्बी में तैनात पाकिस्तानी लेफ्टिनेंट कमांडर तसनीम अहमद पानी के नीचे अपनी वसूल में कसमसा रहे थे पूरा का पूरा इंडियन नेवल फ्लीट उनके ऊपर से गुजरा और वह कुछ नहीं कर सके उनके पास हमला करने के आदेश नहीं थे क्योंकि युद्ध की औपचारिक घोषणा भी हुई नहीं थी कंट्रोल रूम में कई लोगों ने तो फायर करने के लिए दबाव डाला लेकिन ऐसा नहीं कर सकते थे क्योंकि हमला करना युद्ध करने जैसा था और एक लेफ्टिनेंट कमांडर अपनी तरफ से ऐसा कतई नहीं कर सकता था हा क्योंकि दुश्मन नजदीक था हां लालच जरूर आता रहा दुश्मन इतने करीब हो और वह भी खतरे से एकदम अनजान ऐसा मौका आसानी से कहां मिलता है अब भारतीय नौसेना को पाकिस्तानी पनडुब्बी अंगूर के द्वारा भेजे गए संदेशों से उनके वहां होने का पता चल चुका था जाके एक पाकिस्तानी पनडुब्बियों के तटों के आस-पास ही घूम रही है धीमी रफ्तार से जा रही थी कप्तान ने रफ्तार इसलिए धीमी इसलिए रखी थी क्योंकि उसके बेहतर और उन्नत 170 174 सोनार का डिटेक्शन बढ़ाना था इस वक्त 12 नोट 20- 21 किलोमीटर प्रति घंटा थी ठीक उसी समय और हंगोरअपने इरादों को अमल करने पर तुला था और भारत के वारशिप की धीमी गति उसका काम आसान कर रही थी 9 दिसंबर को अंगूर काठियावद की तरफ जा रही तभी उसके सोनार पर कुछ कांटेक्ट डिटेक्टर दुए उनके सोना हमसे सब पता लग रहा था वह वारशिप है उनकी दूरी कोई 6 से 8 मील की बताएं पाकिस्तानी सबमरीन ने अपने दुश्मन का पीछा शुरू कर दिया खोज लेने की लंबी दूरी की अपनी क्षमता के कारण हंगूर को जल्दी खुकरी और कृपाण के होने का पता चल गया और यह दोनों पोर्ट जिग जैग तरीके से पाकिस्तानी पनडुब्बी की खोज कर रहे थे और हंगोर ने उनके और नजदीक आने का इंतजार किया फिर रेन्ज में आते ही उसने - कृपाण को अपना निशाना बनाया और एक होमिंग टोरपीडो उसकी तरफ दाग दिया पाकिस्तान हिंदुस्तान के जहाजों को हिंदुस्तान के पानी में ही डूबा देना चाहता था अपने पोत गाजी का बदला लेने का बहुत अच्छा मौका उसके हाथ लग गया था होमिग टोरपीडो का अपना सोनार होता है वह खुद अपना लक्ष्य खोज कर वार करता है यह बहुत आधुनिक self-propelled वेपन था वार्ड निशाने पर लगा था लेकिन भारत की वारशिप की किस्मत अच्छी थी टोरपीडो फटा नहीं पनडुब्बी के आसपास होने से पानी में नीचे गहराई में हलचल हो रही थी जल समंदर की लहरों के अलावा किसी और मूवमेंट का इशारा कर रही थी फाइनेंस कृपाण को खतरे का आभास हो गया कप्तान ने टीम को अलर्ट किया और पूरी तेजी से शिप को मोड़ दिया वह उसे दूर ले जाने लगे सिर्फ अपना बचाओ करना युद्ध नहीं होता युद्ध तो आक्रमण से जीत जाते हैं कृपाण ने अपनी सुरक्षा में एक और मैं अपनी सुरक्षा में एक एंटी सबमरीन मोटर अंगूर को निशाना बनाते हुए दाग दिया लेकिन वह पाकिस्तानियों का कोई नुकसान नहीं कर सका जब अंगूर का पहला वार खाली गया तो उसने स्पीड बढ़ाने के लिए स्मोकिंग शुरू कर दिया न सतह पर तैरते हुए बाहर से भी हवा खींचते रहना लेकिन उसके प्रयासों को सफलता नहीं मिली 9 तारीख की शाम को पाकिस्तान के अंगूर ने भारत के दोनों युद्ध पोतों की चाल का एक पैटर्न समझ लिया था शाम 7:00 बजे पनडुब्बी फाइनेंस को करीब 12 की स्पीड से चल रही थी उससे अंदाजा भी नहीं था कि
अब हंगौर हमला करने के लिए तैयार थी
वह परेश कोप्पैक्ट पर चल रही थी पानी की सतह पर लेकिन अंधेरे की वजह से कुछ दिखाई नहीं दे रहा थाहमको बहुत तेजी से पलटा था और उसने कुफरी को पीछे से निशाना बनाया और एक और और टोरपिडो दाग दी कोकरी की तरफ आया 1:30 मिनट की रन थी टोरपिडो कोकरी की मैगजीन के नीचे जाकर एक्सप्लोड हुआ कोकरी में परंपरा की रात 8:45 के समाचार सभी इकट्ठा होकर एक साथ सुना करते थे ताकि उन्हें पता रहे कि बाहर की दुनिया में क्या हो रहा है समाचार शुरू हुए यह आकाशवाणी है अब समाचार
समाचार शब्द पूरा नहीं हुआ था कि टोरपीडो ने शिप को हिट किया किया झटका इतनी जोर का था कि 1200 भारी-भरकम पूरी तरह हिल गई जैसे कोई बवंडर आया हो समंदर मे कैप्टन अपनी कुर्सी से गिर गए और उनका सर लोहे से टकराया और माथे से खून बहने लगा अभी किसी को समझ में आता क्या हुआ है कि उससे पहले ही एक धमाका और दूसरा धमाका होते ही पूरे पोत की बत्ती चली गई को कैप्टन मुल्लाह ने आदेश दिया कि वह पता लगाएं कि हो क्या रहा है कहां है और कितना नुकसान हुआ है कुछ भी पता करने का एक्शन लेने का वक्त नहीं बचा था कुकरी में दो छेद हो उस चुके थे और उनमें तेजी से पानी भर रहा था उसके फनल से धू धू करती आग निकल रही थी लपटें निकल रही थी उधर सब लेफ्टिनेंट भागकर ब्रिज पर पहुंचे उस समय वेस्टर्न सीट केस टास्क फोर्स के कमांडर कैप्टन मुल्लाने पश्चिमी नौसेना कमान के प्रमुख को सिग्नल भिजवाए की कुकरी पर हमला हो गया है आखरी टोरपीडो के बाद के कारण सुख का सारा तेल बहकर समंदर की तरह पर फैलता जा रहा था कई हिस्सों में आग लग गई थी लोग अंडर वॉटर वाटर तैरकर ही किसी तरह से दूर जा सकते थे आसपास का तेल के कारण दम घुट रहा था कैप्टन मुल्ला जानते थे कि बचाव दल की जरूरत है सही मायनों में कप्तान थे।एक मजबूत इंसान उनका इलाज करने वाले डॉक्टर हैरान रह जाते थे कि कैसे वह दर्द को बिना दवा बिना पेन रिलीफ के सहन कर लेते थे
आईनस कुकरी में सवार 18 अफसरों और कोई 200 सेलर्स कुछ समझ पाते कि क्या हो रहा है कि पानी उनके घुटनों तक पहुंच गया था लोग जान बचाने के लिए इधर उधर भाग रहे थे खुखरी का ब्रिज समुद्री सतह से चौथी मंजिल पर था लेकिन मिनट से कम समय में ब्रिज और समुद्र का स्तर बराबर हो चुका था मुलाने अपने सब लेफ्टिनेंट की तरफ देखा और बोले gat dowm
यह उनका आदेश था जिसे डालने की किसी में हिम्मत नहीं थी लेफ्टिनेंट में आखिरी बार अपने कमांडर की तरह देखा और फौलाद की सुरक्षा छोड़कर अरब सागर की भयानक लहरों के बीच कूद गए कैप्टन मूल्ला यहां वहां दौड़कर लोगों को नीचे कूदने को बोल रहे थे जितनी लाइव जैकेट्स थी सब बाट दी गए जितनी लाइफबोट्स थी सब पानी में उतार दी गई शिप में मौजूद आखरी जैकेट भी अपने जूनियर को पहना दी बोले
Save yourself don't worry about me के कप्तान थे उन्हें भारतीय नौसेना की परंपरा का निर्वाह करना था वह अपनी प्यारी शिप का साथ छोड़ नहीं सकते थे आईना इसको खरीद धीरे धीरे नीचे जाति जा रही थी लोग बरसे ज्यादा ठंडे पानी में छलांग लगा रहे थे समुद्र में लहरें उठी थी शायद नहीं जानते थे कि वह अकेले नहीं है जो समंदर के गर्भ में समाने जा रहे हैं उनकी टीम के कई लोग और थे उनके अपने आदमी को आदमी की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनके हाथों में थी और वह कुछ नहीं कर पा रहे थे बेबस थे तो उन्होंने अपनी पोजीशन
कैप्टन को अपने पैरों में पानी महसूस हो रहा था एक वार शिप का कमांडर सामने दिखती मौत से घबरा जाए तो वह कमांडर कैसा है उनके जूनियर स्टाफ ने अपने कैप्टन जैसा दिलेर ओ सैयमी आज तक नहीं देखा था उन्होंने दूर से देखा कि आयनेस क्रुकी का अगला हिस्सा 80 डिग्री का एंगल बनाकर पानी के अंदर जा रहा था और कैप्टन के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी शेरो-शायरी के शौक़ीन कैप्टन महेंद्र नाथ के लिए ही शायद अहमद नदीम कासमी गए थे
कौन कहता है की मौत आई तो मर जाऊंगा मैं तो दरिया हूं समंदर में उतर जाऊंगा
आईनस कुकरी पानी में डूबने लगी तो एक बड़ा सा भवर बन गया और एक बड़े निवाले जैसे पूरे शिप को खींच कर अपने आप में समा लिया ऐसा लगा जैसे किसी नाटक का पटाक्षेप हुआ हो किसी बेहद दु:खद नाटक का चारों तरफ शोर मचा हुआ था लेकिन जब खुकरी आंखों से ओझल हुआ तो समय कुछ थम सा गया था जैसे मौत के बाद का माहौल
जो बच गए हैं उन्हें किनारे तक पहुंचाने की बचने वालों की आंखे जल रही थी समुद्र में तेल फैलने के कारण लोग उल्टियां कर रहे थे खुखरी के डूबने के 40 मिनट बाद कुछ दूरी पर रोशनी दिखाई दी
उन्होंने उसके पास पहुंचे थे
थोड़ी देर बाद क्षितिज के पानी पर जहाज के तीन मस्तूरिया नेमास दिखाई दिए नस का 4 नाम का जहाज आ गया था बचने वालों की संख्या 64 थी सभी को जहाज पर आते ही कंबल और गर्म चाय दी गई ।



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