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चलो फिर अयोध्या चलते हैं।

चलो फिर अयोध्या चलते हैं।

अरे रुको 1992 में भी तो गए थे, तब क्या हुआ था ?

तब आडवाणी और भाजपा के नेता आये थे जिन्होंने भाषण दिया और हमें बताया कि धर्म की पुकार है जान की चिंता न करो और मस्जिद तोड़ दो। भाषण देकर वो वापस दिल्ली चले गए और दंगों में लगभग 2000 लोग मारे गए जिनमें हिन्दू मुस्लिम दोनों धर्म के लोग थे। पुलिस ने दंगा रोकने की कोशिश की, भीड़ को भागने के लिए दूर से हवाई फायर किये तो शातिर लोगों ने 2 कोठरी बंधुओं को अंदर ही मार डाला और इल्जाम पुलिस और उस टाइम की सपा सरकार पे लगा दिया। जिन छुटभैया नेताओं को बड़े नेता कमान देकर दिल्ली निकल गए थे उन्हें पुलिस ने पकड़ के जेल भेज दिया। *जेल में किसी ने उनकी सुध नहीं ली, कोई नेता मिलने या जमानत कराने नहीं आया। जब वो जेल से बाहर आये तो पढ़ने-लिखने, नौकरी में आवेदन करने, या कोई एग्जाम देने, शादी करने की उम्र निकल चुकी थी।*

1992 के कितने युवा नेताओं का नाम याद है आप को ? एक भी नहीं ना? एक्जैक्टली !!
यही बताने की कोशिश कर रहा हूँ की वो सब मेहनत मजदूरी करके अपना पेट पाल रहे हैं। मथुरा के सुरेश बघेल भी उकसाये/भरमाये 23 साल के नौजवान थे। मस्जिद उड़ाने के लिए डाइनामाइट ला के राखी थी पुलिस ने पकड़ लिया और 5 साल की जेल हो गयी।  भाजपा नेताओं के उस चहेते हीरो को जेल में कोई देखने तक नहीं आया। मंदिर के लिए जिंदगी बर्बाद करने वालों को कोई छोटे-मोटे मंदिर का पुजारी भी बनाने को तैयार नहीं हुआ। आज एक गौशाला में जिंदगी काट रहे हैं।

ये शिवसेना वाले उत्तर भारतियों (हिन्दू मुस्लिम) दोनों को मार कर महाराष्ट्र से भगा देते हैं क्योंकि हम उनकी नौकरी खा रहे हैं। रिक्सा चलाने वाले, पान बीड़ी का खोखा रखने वाले, गोदी-मीलों में काम करने वालों को भगा कर यूपी में राम मंदिर के लिए दंगा करवाने आ रहे हैं। नौकरी के लिए हम उत्तर-भारतीय और मराठी हैं
लेकिन मंदिर के सहारे वोट माँगने के लिए हम सब हिन्दू हो गए।

खैर ये सब छोडो, चलो अयोध्या चलते हैं। चुनाव सर पे हैं, पाकिस्तान में नवाज शरीफ या मुशर्रफ भी नहीं है जो युद्ध करवा देते, अब तो सिर्फ मंदिर ही बचा है। चलो उसमें ही पलीता लगा के वोट की रोटी सेंकी जाएँ।
चलो फिर अयोध्या चलते हैं।

*अयोध्या में तनाव है*
                         क्योंकि
*2019 मे लोकसभा चुनाव है*
आपका अपना-

संदीप सैणी

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