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कैसे मिले भगवान 📢


         

सावधान :- राधास्वामी पंथ में पाँच नाम देते हैं। ज्योति निरंजन, ओंकार,
रंरंकार, सोहं और सतनाम, इसी पंथ की शाखा धन-धन सतगुरू-सच्चा सौदा सिरसा
वाले अब तीन नाम 1. सतपुरूष 2. अकाल मूर्ति 3. शब्द स्वरूपी राम तथा
जगमालवाली वाले ‘‘धन-धन सतगुरू तेरा ही आसरा’’ एक नाम देते हैं, पहले पांच
नाम ही दान किए जाते थे। दिनोंद (जिला भिवानी) हरियाणा में श्री ताराचन्द जी
वाला पंथ एक ‘‘राधा स्वामी’’ नाम देता है इसी को सारनाम बताता है
श्री आसाराम जी (अहमदाबाद वाला) सोहं मन्त्रा को दो भागों में स्मरण करने को
कहता है तथा कई अन्य मन्त्रा भी देता है। जिन में से रूची अनुसार साधक को स्वयं
चुनना होता है।
1. गायत्रा मन्त्रा (ओम् भूर्भुवः ------) 2. ओम् नमः शिवाय 3. ओम् नमः भगवते
वासुदेवाय 4.------
श्री सुधांशु जी (बकरवाला दिल्ली वाले) हरि ओम्-तत्-सत् का जाप मन्त्रा देता है।
श्री शिव भगवान को अजन्मा-अजर-अमर अर्थात् मृत्युंज्य तथा सर्वेश्वर आदि बताते
हैं। जब कि श्री देवी महापुराण तथा शिव महापुराण में श्री शिव का जन्म मृत्यु लिखा
है।
‘‘निरंकारी ‘‘ पंथ वाले एक नाम’’ तू ही एक निरंकार। मैं तेरी शरण मुझे बख्स
लो’’ देते हैं तथा परमात्मा को निराकार बताते हैं। जबकि परमात्मा सशरीर है।
उपरोक्त मन्त्रा शास्त्राविरूद्ध होने से मोक्ष दायक नहीं हैं।
‘‘हंसा देश पंथ’’(श्री सतपाल जी महाराज पंजाबी बाग दिल्ली वाला तथा श्री प्रेम
रावत उर्फ बालयोगेश्वर जी महरौली दिल्ली वाला) हंस का जाप दो हिस्से करके जाप
करने को देते हैं। इसको उल्टा करके सहं करके सोहं को भी दो हिस्से करके जाप
करने को देते है तथा आँख बन्द करके हठ योग क्रियाऐं देते हैं जो शास्त्राविरूद्ध हैं
मोक्ष दायक नहीं हैं।
भावार्थ है कि ओम्-तत्(सांकेतिक) तथा सत्(सांकेतिक) के अतिरिक्त सर्व
साधना शास्त्रा विरूद्ध अर्थात् मनमाना आचरण (पूजा) है। जो पवित्रा गीता अध्याय 16
श्लोक (मन्त्रा) 23 में व्यर्थ कहा है तथा (श्लोक) मन्त्रा 24 में कहा है कि परमात्मा की
भक्ति के लिए शास्त्रों(वेदों) को ही आधार मानें।
उपरोक्त साधना शास्त्रा विरूद्ध है, मोक्ष दायक नहीं है।
कृ
ृप्या पढ़ें मोक्ष दायक साधना :-
सर्वप्रथम उपदेश प्राप्त करने वाले को मानव शरीर में बने कमलों को खोलने का
मन्त्रा जाप दिया जाएगा। जिससे आपकी कुण्डलनी शक्ति जागृत हो जाएगी अर्थात्
कमल खिल जाएगें। आप का त्रिकुटी तक जाने का रास्ता साफ हो जाएगा। मानव

शरीर में कमल (चक्र) बने हैं। 1. मूल कमल में देव (स्वामी) गणेश जी का कार्यालय
है, 2. स्वाद कमल में भगवान (स्वामी) ब्रह्मा जी का कार्यालय है, 3.नाभि कमल में
भगवान(स्वामी) विष्णु जी का कार्यालय है, 4. हृदय कमल में भगवान(स्वामी) शिव
जी का कार्यालय है, 5. कण्ठ कमल में शक्ति दुर्गा का कार्यालय है। इन पांचों
शक्तियों के पांच नाम (मंत्रा) जाप के हैं जो आपको प्रथम दिए जाएगें। जिनके जाप से
आपको आगे जाने का रास्ता मिलेगा अर्थात् आपकी कुण्डलनी शक्ति जागृत हो
जाएगी। दूसरे शब्दों में आपके कमल खुल जाएंगे।(योगीजनों ने इन्हीं कमलों को हठ
योग से खोलने का व्यर्थ प्रयत्न किया।) तब आप त्रिकुटी पर पहुंच पाओगे। यह तो
प्राथमिक पढ़ाई है जो पांच नामों की है। केवल बात बनाने से कि हम तो सीधे त्रिकुटी
में जाते हैं, कोई कार्य सिद्ध नहीं होगा।
जैसे हम विदेश(काल लोक) में आए हैं। स्वदेश(सतलोक) जाना है। हमारे ऊपर
विदेश के कार्यालयों (बिजली-पानी-टेलिफोन आदि) का बिल बकाया है तथा कुछ
ऋण भी शेष है। प्रथम ऋण मुक्त प्रमाण पत्रा लेने होंगे। फिर आप त्रिकुटी अर्न्तराष्ट्रीय
हवाई अड्डे (इन्टरनैशल एयर पोर्ट) पर पहुंच सकते हैं अन्यथा नहीं। आप यहां
विदेश (काल के लोक) में ऋणी हो गए हैं। आप पर बहुत कर्जा है। जिस कारण से
आपकी सर्व सुविधाएं छीनी जा चुकी हैं। जैसे बिजली का बिल न भरने से कनेक्शन
कट जाता है। लाभ समाप्त हो जाता है। इसी प्रकार आपके सर्व कार्य उल्ट-पुल्ट हो
गए हैं। सतगुरू आपका जमानती (गारन्टर) बनेगा तथा श्री ब्रह्मा जी, श्री विष्णु जी
तथा श्री शिवजी आदि से आपके सर्व लाभ पुनर् चालु कराएगा। फिर उपरोक्त पांचों
शक्तियों के नाम जाप की मजदूरी करके आपने ऋण मुक्त भी होना है तथा जब तक
इस विदेश(काल लोक) में रहोगे सांसारिक सुविधाएं भी प्राप्त करते रहना है। सतनाम
दो अक्षर (मन्त्रा) के जाप (ओम् ़ तत्) में एक ओम् (ऊँ) अक्षर है। इस ओम् नाम के
जाप की कमाई से ब्रह्म के इक्कीस ब्रह्मण्डों का ऋण चुकाना है। हम पहले ओम् नाम
की कमाई स्वर्ग-महास्वर्ग में खर्च करते रहे। अब हम ओम् (ऊँ) मंत्रा के जाप की पूजा
ब्रह्म (काल) को दे देंगे। यह हमें छोड़ देगा। भावार्थ है कि सतनाम के इस एक अक्षर
‘‘ओम्’’ के जाप की कमाई साधक को काल जाल से छुड़ाएगी। आप जी ने श्री नानक
जी की वाणी में पढ़ा कि पूरा सतगुरू दो अक्षर का भेद बताएगा एक अक्षर छुड़ाएगा
दूसरा तत् मन्त्रा (जो सांकेतिक है) प्रभु को भंवर गुफा से पारदर्शक पर्त के पार
सतलोक में सतपुरूष को लखाएगा अर्थात् दर्शन कराएगा

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