27. माता-पिता की सेवा व आदर करना परम कर्तव्य | जीने की राह
प्रत्येक माता-पिता की तमन्ना होती है कि मेरी संतान योग्य बने। समाज में बदनामी न ले। अच्छे चरित्रा वाली हो, आज्ञाकारी हो। वृद्धावस्था में हमारी सेवा करे। हमारी बहु हमारे कहने में चलने वाली आए। समाज में हमारी इज्जत रखे। वृद्धावस्था में हमारी सेवा करे। प्यार से व्यवहार करे। सत्ययुग, त्रोता, द्वापर तक यह मर्यादा चरम पर रही। सब सुखी जीवन जीते थे। कलयुग में कुछ समय तक तो ठीक रहा, परंतु वर्तमान में स्थिति विपरीत ही है। इसे सुधारने का उद्देश्य लेखक (रामपाल दास) रखता है। आशा भी करता हूँ कि भगवान की कृपा से ज्ञान के प्रकाश से सब संभव हो जाता है, हो भी रहा है और होगा, यह मेरी आत्मा मानती है। www.jagatgururampalji.org
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