महान परिवर्तन का शंखनाद बरवाला की घटना
विचार बदलेंगे तो क्रियाओं में परिवर्तन होगा
अब देश की आजादी का लाभ केवल 5़ या10 % 15 प्रतिशत जनता को हुआ है। विशेषकर 5 प्रतिशत को ही अधिक लाभ
है। देश की आबादी के 5 प्रतिशत व्यक्ति भ्रष्ट राजनेता, भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी तथा अन्य विभागों के भ्रष्ट
अधिकारी व कर्मचारी तथा मिलावट करने वाले व फैक्ट्री के मालिक तथा भ्रष्ट जज हैं।
भारत देश की आजादी सन् 1947 से लेकर वर्तमान (2015) तक भारत के प्रधानमन्त्रा ईमानदार रहे हैं।
केवल प्रधानमन्त्रा की ईमानदारी पर्याप्त नहीं है। उदाहरण के लिए आदरणीय श्री मनमोहन सिंह पूर्व प्रधानमन्त्रा जी स्वयं तो
ईमानदार थे, परंतु अन्य मन्त्रागणों ने जो उत्पात किया, वह प्रत्यक्ष है। एक मन्त्री जी पर आरोप लगा कि 1लाख75000़ हजार करोड
(एक लाख पिछत्तर हजार करोड़)़ रूपये का घोटाला किया है। मन्त्रा जी को जेल भी जाना पड़ा। फिर जमानत हो गई। केन्द्र
तथा राज्य सरकारों में एैसे-एैसे कई हजार घोटाले हैं जो प्रकाश में नहीं आ सके हैं।
देश की गरीबी का कारण यही है क्योंकि गरीब जनता से कर (ज्ंग) लिया जाता है। उसका दुरूपयोग करके भ्रष्ट
राजनेता, भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारी तथा भ्रष्ट जज अपनी जेबों में डालते हैं। हम यहाँ स्पष्ट करना अनिवार्य समझते हैं कि
सब राजनेता, अधिकारी, कर्मचारी तथा जज भ्रष्ट नहीं हैं। परन्तु अधिकता भ्रष्टों की ही है। भ्रष्ट मन्त्रा खरबों का गोलमाल
करके भ्रष्ट जज को करोड़ों रिश्वत देकर बरी हो जाता है।
उदाहरण के लिए हाल में ही आए न्यायालयों के फैसलेः- 1ण् सलमान खान अभिनेता को निचली कोर्ट ने 5 वर्ष की
सजा सुनाई। उसी दिन हाईकोर्ट ने जमानत दे दी।
2ण् जयललिता मुख्यमन्त्रा (तमिलनाडु प्रांत) को निचली अदालत ने 4 वर्ष की सजा सुनाई तथा भारी जुर्माना किया,
जेल भेज दी। महीने के बाद जमानत तथा तीन-चार महीने के बाद हाई कोर्ट ने बरी कर दी। हमारा कहना है कि या तो निचली
कोर्ट का जज भ्रष्ट है या हाई कोर्ट का जज। एक मुकदमें में दो प्रकार के फैसले आने पर संदेह होना स्वाभाविक है। जजों
की जिम्मेदारी जबाबदेही बनानी होगी।
समाधानः- संत रामपाल दास जी के सत्संग विचार सुनकर भारत की जनता सर्व बुराई रहित हो जाएगी। रिश्वत लेना
तो दूर रहा अपनी नेक कमाई का 10 प्रतिशत दान किया करेगी।

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