एक सुशिक्षित सभ्य व्यक्ति मेरे पास आया। वह उच्च अधिकारी भी था तथा किसी अमुक पंथ व संत
से नाम भी ले रखा था व प्रचार भी करता था वह मेरे (संत रामपाल दास) से धार्मिक चर्चा करने
लगा। उसने बताया कि ‘‘मैंने अमुक संत से नाम ले रखा है, बहुत साधना करता हूँ। उसने कहा मुझे
पाँच नामों का मन्त्रा (उपदेश) प्राप्त है जो काल से मुक्त कर देगा।‘‘ मैंने (रामपाल दास ने) प ूछा
कौन-2 से नाम हैं। वह भक्त बोला यह नाम किसी को नहीं बताने होते। उस समय मेरे पास बहुत से
हमारे कबीर साहिब के यथार्थ ज्ञान प्राप्त भक्त जन भी बैठे थे जो पहले नाना पंथो से नाम उपदेशी थे।
परंतु सच्चाइ र् का पता लगने पर उस पंथ को त्याग कर इस दास (रामपाल दास) से नाम लेकर अपने
भाग्य की सराहना कर रहे कि ठीक समय पर काल के जाल से निकल आए। पूरे परमात्मा (पूर्ण
ब्रह्म) को पाने का सही माग र् मिल गया। नही ं तो अपनी गलत साधना वश काल के मुख मे ं चले जाते।
उन्हीं भक्तो ं मे ं से एक न े कहा कि मैं भी पहल े उसी पंथ से नाम उपद ेशी (नामदानी) था। यही पाँच
नाम मैंने भी ले रखे थे परंतु वे पाँचा ें नाम काल साधना के हैं, सतपुरुष प्राप्ति के नहीं हैं। वे पाँचों
नाम मैंने ख्भक्त जो दूसरे प ंथ से आया था अब कबीर साहिब के अन ुसार इस दास (रामपाल दास) स े
नाम ले रखा है कह रहा है उस अमुक संत-पंथ के उपदेशी सभ्य व्यक्ति को, भी ले रखे थे। वे नाम ह ैं
- 1ण् ज्योति निंरजन 2ण् औ ंकार 3ण् रंरकार 4ण् सोहं 5ण् सत्यनाम।
तब म ैंनें उस पुण्यात्मा को समझाया कि आप जरा विचार करो। संतमत सतसंग साहिब कबीर से
चला है। साहिब कबीर स्वय ं पूर्ण परमात्मा है ं। उन्होंने ही इस काल लोक म ें आकर अपनी जानकारी
आप ही देनी पड़ी। क्यो ंकि काल ने साहिब कबीर का ज्ञान गुप्त कर रखा ह ै। चारों वेदों, अठारह
पुराणा ें, गीता जी व छः शास्त्रों मे ं केवल ब ्रह्म (काल ज्योति नि ंरजन) की उपासना की जानकारी है।
सतपुरुष की उपासना का ज्ञान नहीं है।
एक तुलसी दास जी हाथ रस वाले (जिनको उस तुलसी दास जिसने रामायण का हिन्दी निरूपण


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