नकली गुरु को त्याग देना पाप nhi
यह सारी सच्चाइ समझ कर वह पुण्य आत्मा काफी परभावित हुआ तथा कहा कि आपके द्वारा (संत रामपाल जी महाराज द्वारा ) बताया
गया ज्ञान सही है और हमारी साधना ठीक नही है। वह लगातार तीन बार सतसंग सुनने आया तथा
कहा कि दिल तो कहता है कि मैं भी नाम ले लू लेकिन मेरे सामने एक दीवार खड़ी है।
1 एक तो कहते हैं गुरु नहीं बदलना चाहिए, पाप होता है।
2 दूसरे मै ने लगभग 400.500 (चार सौ-पांच सौ) भक्तों को इसी पंथ के संत से उपदेश दिलवा
रखा है वे मुझे अपना सरदार तथा पूर्ण ज्ञान युक्त समझते है । अब मुझे श२म लगती है वे क्या
कहेंगे ? अर्थात् मुझे धिक्कारेंगे।
मैंने (संत रामपाल दास ने) उस भक्त आत्मा को बताया :-- कबीर साहिब व सर्व संत यही कहते है
कि झूठे गुरु को तुरन्त त्याग दे।
प्रमाण के लिए कबीर पंथी शब्दावली पृष्ट
न.. 263 से सहाभार --
झूठे गुरु के पक्ष को, तजत न कीजै बार।
राह न पावै शब्द का, भटकै द्वारहिं द्वार।।
जैसे एक वैद्य (डॉक्टर) से इलाज नही हो तो दूसरा वैद्य (डॉक्टर) ढूंढना चाहिए। गलत डॉ. के
आश्रित रह कर अपने प्राण नहीं गंवाने चाहिए।
दूसरा आपने उनको स्पष्ट बताना चाहिए कि अपनी साधना ठीक नही है। आप भी यहां से दोबारा
नाम ले लो तथा उन 400.500 प्राणियो का भी उद्धार करवाओ। इस पर वह ज्ञानी पुरुष जो प्रवक्ता भी
बना हुआ था बोला कि में गुरु नहीं बदल सकता। मेरा मान घट जाएगा तथा वे लोग मुझे बुरा-भला
कहेंगे
। बेशक नरक मे जाऊँ, मैं मार्ग नहीं बदल सकता। इस प्रकार जीव कहीं मान वश तो कही
अज्ञान वश काल के जाल में फंसा ही रहता है। इस से आप भक्त जन गीता जी के ज्ञान को समझे
तथा कबीर साहिब का उपदेश मुझ दास से प्राप्त करके कल्याण करवाए

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