पुस्तक ‘‘जीने की राह’’ में बताया गया है कि वर्तमान में बच्चों को अच्छे विचार नहीं मिल रहे।
जो बुजुर्ग व्यक्ति युवाओं तथा बच्चों को किसी बहाने अपने पास बैठाते थे। दो-तीन बुजुर्ग आपस में चर्चा
करते थे कि भाई! एक घटना उस गाँव में बुरी घटी है। दूसरा पूछता कि ऐसा क्या हो गया? यूँ सुना
है कि गाँव के एक जवान लड़के ने एक लड़की के साथ छेड़छाड़ कर दी। लड़की वालों ने लड़के के
साथ मारपीट कर दी। बिना कारण को जाने लड़के वालों ने लड़की वालों से झगड़ा कर दिया। लड़के
वालों के दो व्यक्ति मर गए, लड़की वालों का एक मर गया। दोनों पक्षों के कई-कई व्यक्ति घायल हो
गए। तीसरा बुजुर्ग कहता था कि हे भाई! कैसा कुपूत पैदा हो गया। तीन मानष खा गया। ऐसे पुत्रा से
बेऔलाद रह ले। कैसा खोटा जमाना आ गया। लड़के ने जुल्म कर दिया। अपने गाँव की इज्जत के
साथ खिलवाड़ कर रखा था। ऐसा कर्म कोई बालक ना करे।
उनके पास बैठे सुन रहे बच्चों पर उनकी बातों की छाप ऐसी पड़ती थी कि युवा बच्चे अन्य को
भी यही घटना सुनाकर ऐसी गलती न करने की प्रेरणा करते और स्वयं भी किसी बहन-बेटी को आँख
उठाकर नहीं देखते थे।
पुस्तक ‘‘जीने की राह’’ से बुजुर्गों वाली शिक्षा मिलती है। इसे पढ़ने के पश्चात् कोई व्यक्ति
दुराचार (बलात्कार) व छेड़छाड़ करना तो दूर की कौड़ी है, सोचेगा भी नहीं। इस पुस्तक को निःशुल्क
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विवाह कैसे करें :- इस विषय को पुस्तक में पढ़ने से आत्मा को ऐसा झटका लगता है जिससे
‘‘ऑनरकिलिंग’’ की नौबत सदा के लिए समाप्त हो जाएगी।
प्रेम विवाह के लिए बताया है कि = अपने गोत्रा में न करें। अपने गाँव में न करें तथा वर्जित
गोत्रा तथा वर्जित विवाह क्षेत्रा में न करें। अच्छा रहे कि विवाह की बात माता-पिता पर ही छोड़ दें। प्रेम
विवाह से हानि तथा सामाजिक सहमति से किए गए विवाह के लाभ का हृदय छूने वाला सटीक विवरण
बताया है जिसको पढ़ने से युवा वर्ग यह गलती कभी नहीं करेंगे। समाज में शांति रहेगी। ऑनरकिलिंग
समाप्त हो जाएगी। मुदकमेबाजी भी समाप्त हो जाएगी।
लड़की को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने की आजादी सदा से रही है। परंतु प्रेम विवाह
का रोग नहीं था। एक्का-दुक्का प्रमाण किसी युग में मिलता है जैसे हीर-रांझा, परंतु ये जोड़े सुखी कभी
नहीं रहे। विवाह तो सुख से जीवन बिताने के लिए व अपना वंश बढ़ाने के लिए किया जाता है।
अपनी पसंद का वर चुनने की आजादी वर्तमान में भी है। लड़की को लड़का दिखाया जाता है।
दिखाया जाना चाहिए। दोनों अपनी मर्जी से हाँ करें। लड़के-लड़की को चाहिए कि माता-पिता पर
विश्वास करें। वे माता-पिता कभी अपनी संतान को दुःखी देखना नहीं चाहते। इसलिए वे अपनी बेटी
का रिश्ता उचित स्थान व लड़के से करते हैं। अंतर्जातीय विवाह कर सकते हैं। हमारा नारा है :-
जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा। हिन्दु मुस्लिम सिक्ख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।।
भावार्थ :- प्राणी की जाति जीव है क्योंकि मानव, देवता तथा अन्य पशु-पक्षी सब जंतु जीव हैं।
यह हमारी जाति है। मानव श्रेणी के जीव होने के नाते मानवता हमारा धर्म है यानि परमात्मा ने मानव
को समझ दी है। उसको शुभ कर्म करने चाहिए। पशुओं-पक्षियों की तरह एक-दूसरे से छीनकर, दुर्बल
को मारकर अपना स्वार्थ सिद्ध नहीं करना चाहिए। एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए। यह हमारा धर्म
है। जितने धर्म विश्व में हैं, सबमें मानव हैं। किसी में भी अन्य प्राणी नहीं है। इसलिए हम सबको मानव
धर्म का पालन करना चाहिए। एक परम पिता की हम सब संतान हैं।
🙏अन्य धर्मों में भी विवाह कर सकते हैं। इस प्रकार के अनेकों प्रकरण तथा हिदायतें पुस्तक ‘‘जीने
की राह’’ में लिखे हैं जिनको पढ़ने से अधिक आनंद व समझ आएगा।
Pustak ,Jeene Ki Raah, nishulk mangwane ke liye kripya Nimil number par Apna pura Pata address send kare 7496801825
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